देशभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट, भगवान कृष्ण का आकर्षक श्रृंगार, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसी उपलक्ष्य में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।
इस बार खास संयोग में मनाया जाएगा जन्माष्टमी पर्व
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस अवसर पर मंदिरों और घरों में कान्हा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भक्त भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित करेंगे और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के बाद महाआरती की जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।
जन्माष्टमी का व्रत हर किसी के लिए जरूरी नहीं
जन्माष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं। हालांकि, धार्मिक परंपराओं में व्रत के साथ व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और परिस्थितियों का भी ध्यान रखने की बात कही जाती है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को कठोर उपवास से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे लोग अपनी क्षमता के अनुसार पूजा-पाठ करके भी पर्व में शामिल हो सकते हैं।




