मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर बैगा और गोंड समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। रिपोर्टों में मई 2026 से प्रभावित इलाकों में बच्चों की मौत और लगातार बीमारी की बात कही गई है। हालांकि इन सभी मौतों का अंतिम चिकित्सकीय कारण अभी न्यायिक प्रक्रिया में जांच और सरकारी रिपोर्टों का विषय है।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
बालाघाट के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में प्रभावित गांवों की जमीनी स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े तथ्य अदालत के सामने रखे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता ने खुद प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्राउंड रिपोर्ट और अन्य सामग्री अदालत में प्रस्तुत की। कोर्ट ने सरकार को संबंधित सर्वे रिपोर्ट और स्थिति से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई आगे भी जारी है।
बीमारी और कुपोषण ने बढ़ाई चिंता
प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के बीमार पड़ने के साथ कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर भी चिंता सामने आई है। रिपोर्टों में खसरा और मलेरिया जैसी बीमारियों की आशंका तथा बच्चों के लगातार अस्पताल पहुंचने का उल्लेख है। एक रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण से भी प्रभावित हैं और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में मौतों के वास्तविक कारणों की चिकित्सकीय जांच और आधिकारिक आंकड़ों का महत्व बढ़ गया है।







