प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा की 11 सितंबर 1973 को 53वीं पुण्यतिथि थी। उनका निधन 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में हुआ था। आध्यात्मिक जगत में विशेष पहचान रखने वाले नीम करोली बाबा को उनके भक्त श्रद्धा और आस्था के साथ याद कर रहे हैं। उनके जीवन, साधना, सेवा और उनसे जुड़ी चमत्कारिक घटनाओं की कथाएं आज भी उनके अनुयायियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
भक्तों के बीच नीम करोली बाबा को हनुमान जी का अवतार माना जाता है। हालांकि यह धार्मिक आस्था और मान्यता का विषय है। उनके अनुयायियों के लिए बाबा का जीवन भक्ति, सेवा, सादगी और आध्यात्मिक साधना का संदेश देता है।
कौन थे नीम करोली बाबा?
नीम करोली बाबा का जन्म करीब वर्ष 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में बताया जाता है। उनका मूल नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा बताया जाता है। आगे चलकर आध्यात्मिक जीवन और साधना के कारण वे नीम करोली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए।
उनके जीवन से जुड़ी अनेक बातें उनके भक्तों और अनुयायियों के बीच प्रचलित हैं। कम उम्र से ही उनके भीतर आध्यात्मिक झुकाव और साधना की प्रवृत्ति होने की मान्यता है।
कम उम्र में विवाह, फिर आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़े
नीम करोली बाबा का विवाह करीब 11 वर्ष की उम्र में हुआ था। इसके बावजूद उनके जीवन में आध्यात्मिक साधना का प्रभाव लगातार बना रहा।
बताया जाता है कि वर्ष 1958 में उन्होंने अपना घर छोड़कर आध्यात्मिक जीवन को पूरी तरह अपना लिया। इसके बाद उन्होंने अपना जीवन साधना, सेवा और लोगों के मार्गदर्शन में समर्पित कर दिया। उनकी शिक्षाओं में भक्ति और सेवा को विशेष महत्व दिए जाने की बात उनके अनुयायी बताते हैं। यही कारण है कि समय के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई।







