Home सामाजिक Bengaluru School Admission Row: बेंगलुरु के स्कूलों में मां की नौकरी पर...

Bengaluru School Admission Row: बेंगलुरु के स्कूलों में मां की नौकरी पर सवाल

बेंगलुरु के स्कूलों पर उठे सवाल

बेंगलुरु में स्कूल एडमिशन से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने कामकाजी माताओं को लेकर कथित प्रवेश मानदंड पर बहस छेड़ दी है। Reddit पर 24 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक पोस्ट में एक अभिभावक ने दावा किया कि बनशंकरी इलाके के कुछ स्कूलों में ऐसे परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है जिनकी मां गृहिणी हैं। पोस्ट के अनुसार, कामकाजी मां होने की स्थिति में बच्चे का आवेदन आगे नहीं बढ़ने या अस्वीकार होने की आशंका बताई गई। हालांकि, यह दावा सोशल मीडिया पोस्ट और अभिभावक के अनुभवों पर आधारित है और संबंधित स्कूलों की ओर से इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

 

अभिभावक ने क्या दावा किया

पोस्ट लिखने वाले अभिभावक ने बताया कि उनकी ढाई साल की बेटी के लिए स्कूल तलाशते समय उन्हें इस कथित अनौपचारिक व्यवस्था के बारे में जानकारी मिली। उनका दावा है कि उन्होंने संबंधित स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के कुछ माता-पिता से बात की, जिन्होंने इसे एक तरह का 'ओपन सीक्रेट' बताया। पोस्ट के अनुसार, कुछ लोगों ने उन्हें आवेदन में मां की नौकरी की जानकारी छिपाने या गलत जानकारी देने की सलाह भी दी, लेकिन अभिभावक ने ऐसा करने से इनकार किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ स्कूल हर साल मां की नौकरी की स्थिति के बारे में जानकारी लेते हैं।

 

 

सोशल मीडिया पर मिले-जुले दावे

इस मामले में सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। कुछ यूजर्स ने आरोपों का समर्थन करते हुए अपने अनुभव साझा किए और संबंधित स्कूलों के खिलाफ शिकायत करने की बात कही। वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने ऐसे किसी नियम के अस्तित्व पर सवाल उठाया। एक टिप्पणी में एक व्यक्ति ने कहा कि उनके परिचितों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं और वहां मां के गृहिणी होने जैसी कोई शर्त नहीं है। एक अन्य यूजर ने दावा किया कि उनके परिवार में कई कामकाजी महिलाएं हैं और फिर भी उनकी अगली पीढ़ियां उसी स्कूल में पढ़ती रही हैं। इससे स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध अनुभव परस्पर विरोधी हैं।

 

स्कूल की आधिकारिक नीति की पुष्टि जरूरी

उपलब्ध रिपोर्टों में इस कथित नियम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बेंगलुरु के सभी स्कूल या किसी विशेष स्कूल की आधिकारिक प्रवेश नीति कामकाजी माताओं के बच्चों को दाखिले से रोकती है। मामले में संबंधित स्कूलों की आधिकारिक प्रवेश नीति और उनका पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। शिक्षा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष के लिए केवल सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय स्कूल के लिखित नियम और आधिकारिक जवाब को आधार बनाना जरूरी होगा।

 

मां की नौकरी को लेकर क्यों छिड़ी बहस

इस विवाद ने यह सवाल भी उठाया है कि बच्चे के स्कूल एडमिशन में माता-पिता की रोजगार स्थिति को किस हद तक महत्व दिया जाना चाहिए। सोशल मीडिया चर्चा में कुछ अभिभावकों ने कहा कि बच्चे की शिक्षा और देखभाल से जुड़े सवालों का आकलन परिवार की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए। दूसरी ओर, कुछ टिप्पणियों में ऐसे दावों को ही अपुष्ट बताया गया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामला एक अभिभावक के आरोप, सोशल मीडिया पर हुई चर्चा और उसके जवाब में सामने आए अलग-अलग अनुभवों तक सीमित है।