12 लाख की सैलरी पर बहस
बेंगलुरु में सालाना 12 लाख रुपये की सैलरी सुनने में अच्छी लग सकती है, लेकिन शहर में रहने के खर्च को लेकर एक प्रोफेशनल के बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। प्रोडक्ट मैनेजर और कंटेंट क्रिएटर शिवांक गोयल ने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि किराया, ट्रांसपोर्ट और मनोरंजन जैसे खर्चों के कारण 12 LPA की सैलरी उन्हें 4 LPA जैसी महसूस होती है।
₹1 लाख महीने की सैलरी पर शिवांक की राय
शिवांक गोयल ने कहा कि 1 लाख रुपये महीने से कम कमाने वाले लोगों को बेंगलुरु आने से पहले शहर के खर्चों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर कैफे कल्चर, टिकट वाले इवेंट और सब्सक्रिप्शन आधारित हॉबीज को रोजमर्रा के खर्च बढ़ाने वाले कारणों के रूप में बताया। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत अनुभव और राय है, इसे बेंगलुरु में रहने वाले हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का सार्वभौमिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट
गोयल ने घर किराए पर लेने के दौरान करीब 2 लाख रुपये के सिक्योरिटी डिपॉजिट का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, शहर में इतनी बड़ी राशि का डिपॉजिट देना सामान्य मान लिया गया है। हालांकि वास्तविक किराया और डिपॉजिट इलाके, मकान और किरायेदारी की शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
5 किलोमीटर के कैब सफर का उदाहरण
बेंगलुरु के ट्रैफिक और कैब खर्च को लेकर भी गोयल ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने करीब 5 किलोमीटर की दूरी के लिए 600 रुपये तक के कैब किराए और ट्रैफिक में लगभग एक घंटे तक समय लगने का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि कम दूरी के सफर में भी पैसे और समय दोनों का खर्च बढ़ सकता है।
बाहर निकलना भी खर्च से जुड़ा
गोयल ने बेंगलुरु की लाइफस्टाइल को लेकर कहा कि कैफे, रेस्टोरेंट, इवेंट और पेड हॉबीज जैसी गतिविधियां मनोरंजन के बजट को बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कब्बन पार्क का भी उदाहरण दिया और कहा कि शहर के कुछ हिस्सों से वहां पहुंचने में काफी समय लग सकता है। उनका तर्क है कि किसी जगह की एंट्री मुफ्त होने के बावजूद वहां पहुंचने का समय और ट्रांसपोर्ट खर्च अलग लागत पैदा कर सकता है।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय
गोयल के वीडियो के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं रहीं। कुछ लोगों ने किराया, ट्रांसपोर्ट और बाहर खाने-पीने के बढ़ते खर्च को लेकर उनकी बात से सहमति जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने कहा कि बेंगलुरु में कम खर्च वाले विकल्प भी मौजूद हैं। लोगों ने घर साझा करने, सस्ते इलाकों में रहने और कम खर्च वाली गतिविधियों को अपनाने जैसे विकल्पों का उल्लेख किया।
सैलरी और बचत का अंतर
शिवांक गोयल के बयान ने यह चर्चा जरूर शुरू कर दी है कि किसी शहर में अच्छी सैलरी मिलने और वास्तव में अच्छी बचत होने के बीच कितना अंतर हो सकता है। बेंगलुरु में रहने का वास्तविक खर्च व्यक्ति के घर, इलाके, आने-जाने के तरीके और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। इसलिए 12 LPA को 4 LPA जैसा महसूस होने वाला आंकड़ा गोयल का व्यक्तिगत आकलन है, न कि शहर में रहने वाले सभी लोगों के लिए लागू कोई निश्चित गणना।







