सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए
महिलाओं के खिलाफ अपराध की हालिया घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को सार्वजनिक सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बीट गश्त बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालकों तथा सहायकों का सख्त सत्यापन करने पर जोर दिया। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली परिवहन विभाग को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है।
कैब, बस और ऑटो चालकों का सत्यापन अनिवार्य करने पर जोर
अदालत ने कहा कि सरकारी और निजी बसों, कैब, टैक्सी, ऑटो-रिक्शा तथा ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित सेवाओं से जुड़े चालकों और सहायकों का सख्त सत्यापन किया जाना चाहिए। केवल विधिवत पंजीकृत और सत्यापित व्यक्तियों को ही ऐसे वाहन चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि वाहन में यात्रियों को दिखाई देने वाली जगह पर सत्यापित चालक और सहायक के नाम तथा तस्वीरें प्रदर्शित की जानी चाहिए, ताकि किसी अनधिकृत व्यक्ति के वाहन चलाने की स्थिति में यात्री इसकी पहचान कर सकें और शिकायत दर्ज करा सकें।
पुलिस गश्त और सीसीटीवी निगरानी मजबूत करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस गश्त और सीसीटीवी व्यवस्था की वास्तविक समय में निगरानी के लिए समर्पित नियंत्रण कक्ष या कमांड सेंटर की भूमिका पर जोर दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को संयुक्त रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि राजधानी में ऐसे कितने नियंत्रण कक्ष मौजूद हैं, उनका क्षेत्रीय कवरेज क्या है और किसी घटना या सुरक्षा संबंधी कमी की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए कौन-सी व्यवस्था लागू है।
शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था और नागरिकों की भागीदारी
अदालत ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन से नागरिकों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करने पर विचार करने को कहा, ताकि लोग अपने आसपास की आपराधिक गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी समस्याओं की जानकारी सीधे अधिकारियों तक पहुंचा सकें। सार्वजनिक परिवहन में शिकायत दर्ज कराने के लिए भी समर्पित व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया, खासकर उन बसों, कैब और रिक्शा के लिए जो ऐप-आधारित सेवाओं से पंजीकृत नहीं हैं। अदालत के अनुसार, शिकायतों पर कार्रवाई और उनके निपटारे की निगरानी प्रभावी ढंग से होनी चाहिए।
अवैध शराब की दुकानों और भीड़ पर भी नजर
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को उन शराब की दुकानों और प्रतिष्ठानों की पहचान करने का निर्देश दिया, जो आवश्यक अनुमति के बिना संचालित हो रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। बीट अधिकारियों को शराब की दुकानों के आसपास भीड़, शोर-शराबे और लोगों के जमावड़े पर नजर रखने तथा पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
पुलिस कार्रवाई में जवाबदेही जरूरी
पीठ ने स्पष्ट किया कि अपराध रोकने के लिए सख्त पुलिसिंग जरूरी है, लेकिन इससे पुलिस को मनमाने या अनुपातहीन तरीके से कार्रवाई करने का अधिकार नहीं मिलता। अदालत के अनुसार, पुलिस का हस्तक्षेप कानून, आनुपातिकता और जवाबदेही के दायरे में होना चाहिए। निर्देशों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाना, अपराध की रोकथाम में सुधार करना और नागरिकों का पुलिस तथा प्रशासन पर भरोसा मजबूत करना है।







