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Sugar Ethanol Policy: चीनी की कीमतों पर लगाम के लिए एथनॉल नीति में बदलाव

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार का कदम
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एथनॉल खरीद नीति में बदलाव किया है। नई खरीद व्यवस्था के तहत सरकारी तेल विपणन कंपनियां गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथनॉल की खरीद नहीं करेंगी। इस कदम का उद्देश्य गन्ने का अधिक हिस्सा चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कराना है। पिछले वर्ष लगभग 29 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथनॉल बनाने में किया गया था।

 

एथनॉल खरीद में कच्चे माल के विकल्प बदले
तेल विपणन कंपनियों ने करीब 1,100 करोड़ लीटर एथनॉल खरीदने के लिए निविदा जारी की है। इसमें मक्का, टूटे अनाज, भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे जाने वाले अतिरिक्त चावल और सी-हेवी शीरे से बने एथनॉल की खरीद के विकल्प खुले रखे गए हैं। वहीं, गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथनॉल को खरीद सूची से बाहर रखा गया है। सी-हेवी शीरा चीनी बनाने की प्रक्रिया में बचने वाला उप-उत्पाद है, जिसमें चीनी की मात्रा कम होती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से चीनी की उपलब्धता पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है।

 

गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण फसल प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में बाढ़, रोगों और कीटों के प्रकोप से उत्पादन पर असर पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है। खबर में दिए गए अनुमान के अनुसार, देश में चीनी की सालाना खपत करीब 300 लाख टन है, जबकि इस वर्ष उत्पादन लगभग 280 लाख टन रहने का अनुमान है।

 

कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने में एथनॉल की भूमिका
भारत में पेट्रोल के साथ एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है। ऐसे में सरकार के सामने चीनी उत्पादन के लिए पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने और एथनॉल की आपूर्ति बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। अनाज आधारित एथनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से मक्का और चावल की मांग पर भी असर पड़ सकता है। इससे खाद्य सुरक्षा और पशुचारे की उपलब्धता से जुड़े सवाल पैदा हो सकते हैं।

 

चीनी मिलों की उत्पादन योजना पर पड़ सकता है असर
नीति में बदलाव का असर उन चीनी मिलों पर पड़ सकता है, जो गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथनॉल बनाती हैं। खरीद के विकल्प सीमित होने से मिलों को अपने उत्पादन, कच्चे माल के इस्तेमाल और बिक्री की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि मिलें उपलब्ध वैकल्पिक कच्चे माल का कितना इस्तेमाल कर पाती हैं और एथनॉल खरीद की शर्तों के अनुसार अपनी योजनाओं को कैसे ढालती हैं।

 

स्पेशल अपडेट: चीनी और ईंधन की जरूरतों के बीच संतुलन
एथनॉल खरीद नीति में बदलाव का मुख्य उद्देश्य चीनी उत्पादन के लिए गन्ने की उपलब्धता बढ़ाना है, जबकि पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भी जारी रखना है। आगे चीनी की कीमतों और उपलब्धता पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह उत्पादन, मौसम, बाजार की मांग और वैकल्पिक कच्चे माल की आपूर्ति पर निर्भर करेगा।