प्रसिद्ध चित्रकार और उसकी सुंदर तस्वीर
एक नगर में एक प्रसिद्ध चित्रकार रहता था। उसकी बनाई तस्वीरों की दूर-दूर तक प्रशंसा होती थी। एक दिन उसने अपने घर के बाहर अपनी बनाई एक सुंदर तस्वीर लगाई और नीचे लिखा कि अगर किसी को तस्वीर में कोई कमी नजर आए तो उस स्थान पर निशान लगा दें।
तस्वीर पर लगे ढेरों निशान
अगली सुबह चित्रकार ने जब तस्वीर देखी तो वह हैरान रह गया। पूरी तस्वीर पर जगह-जगह निशान लगे हुए थे। यह देखकर उसे लगा कि शायद उसकी कला में वास्तव में कई कमियां हैं। वह निराश हुआ और इस बारे में अपने गुरु से बात करने पहुंच गया।
गुरु ने दिया नया तरीका
चित्रकार की बात सुनकर गुरु मुस्कुराए और उन्होंने उसे अगले दिन एक नई तस्वीर बनाने की सलाह दी। साथ ही गुरु ने कहा कि तस्वीर के नीचे इस बार अलग संदेश लिखा जाए।
नई तस्वीर के साथ बदला संदेश
अगले दिन चित्रकार ने नई तस्वीर बनाई और उसके नीचे लिखा—यदि किसी को तस्वीर में कोई कमी दिखाई दे तो कृपया उसे सुधारकर दिखाएं। शाम को उसने तस्वीर उसी स्थान पर लगा दी।
इस बार तस्वीर पर कोई निशान नहीं
अगली सुबह जब चित्रकार वहां पहुंचा तो वह देखकर चकित रह गया कि तस्वीर बिल्कुल वैसी ही थी जैसी उसने बनाई थी। किसी ने उसमें कोई सुधार नहीं किया था।
गुरु ने समझाया आलोचना का अर्थ
चित्रकार तुरंत गुरु के पास पहुंचा और पूछा कि एक दिन लोगों ने उसकी तस्वीर में इतनी सारी कमियां बताईं, लेकिन दूसरे दिन किसी ने एक भी कमी सुधारकर क्यों नहीं दिखाई। गुरु ने समझाया कि दूसरों के काम में कमी निकालना आसान होता है, लेकिन उस कमी को दूर करने के लिए ज्ञान, मेहनत और जिम्मेदारी की जरूरत होती है।







