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TTE Body Cameras: भोपाल रेल मंडल में TTE की वर्दी पर लगेंगे बॉडी कैमरे

भोपाल रेल मंडल में TTE की वर्दी पर लगेंगे बॉडी कैमरे
ट्रेन में टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टीटीई (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) के बीच होने वाली बहस और विवाद को रिकॉर्ड करने के लिए रेलवे नई व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। भोपाल रेल मंडल में टीटीई की वर्दी पर बॉडी वॉर्न कैमरे लगाए जाएंगे। पश्चिम मध्य रेलवे ने इस उद्देश्य से 56 कैमरों का ऑर्डर दिया है। इस पहल का मकसद टिकट चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना तथा जरूरत पड़ने पर घटनाक्रम का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है।

 

कंधे या छाती पर लगाए जाएंगे कैमरे
योजना के तहत टीटीई अपनी वर्दी पर कंधे या छाती के पास बॉडी कैमरे लगाएंगे। इन उपकरणों से टिकट जांच के दौरान ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकेगी। इससे यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच होने वाली बातचीत तथा किसी विवाद के दौरान की घटनाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा। यह रिकॉर्ड शिकायतों की जांच में उपयोगी साबित हो सकता है।

 

रात में भी रिकॉर्डिंग की सुविधा
इन बॉडी वॉर्न कैमरों में नाइट विजन की सुविधा भी होगी। इससे रात के समय ट्रेन के कोच में टिकट जांच के दौरान भी घटनाओं को रिकॉर्ड करना संभव होगा। इस सुविधा से कम रोशनी वाली परिस्थितियों में भी रिकॉर्डिंग करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कैमरों के इस्तेमाल से टिकट चेकिंग से जुड़ी घटनाओं का दस्तावेजी रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

 

यात्रियों और टीटीई के बीच विवाद की जांच में मिलेगी मदद
टिकट, किराए या बिना टिकट यात्रा जैसे मामलों में कभी-कभी यात्रियों और टीटीई के बीच बहस की स्थिति बन जाती है। ऐसी घटनाओं की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने पर शिकायतों की जांच करते समय संबंधित तथ्यों और घटनाक्रम को समझने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था की प्रभावशीलता के लिए रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने, उसके इस्तेमाल और यात्रियों की निजता से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।

 

पश्चिम मध्य रेलवे ने 56 कैमरों का दिया ऑर्डर
भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के अनुसार, पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से 56 बॉडी वॉर्न कैमरों का ऑर्डर दिया गया है। इस पहल से टिकट चेकिंग के दौरान पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की उम्मीद है। साथ ही, यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच होने वाले विवादों की जांच में रिकॉर्डिंग सहायक हो सकती है। कैमरों की तैनाती और इनके इस्तेमाल से जुड़ी आगे की जानकारी रेलवे की ओर से साझा किए जाने पर व्यवस्था की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।