प्रवर्तन निदेशालय के पणजी जोनल कार्यालय ने गोवा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई साइबर ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत तीन आरोपियों भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला गोवा के एक नागरिक से करोड़ों रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पीड़ित को अलग-अलग तरीकों से डराकर और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई। इसके बाद ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजे जाने की जानकारी सामने आई। ED अब आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की भूमिका और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है।
गोवा के नागरिक से ₹2.60 करोड़ की ठगी
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में गोवा के एक नागरिक को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर निशाना बनाया गया था। साइबर ठगों ने कथित तौर पर पीड़ित को जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर अपने जाल में फंसाया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में करीब ₹2.60 करोड़ की रकम ट्रांसफर कराई गई। ठगी की रकम के लेनदेन की जांच करते हुए ED को इस नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों का इस्तेमाल किन लोगों ने किया और रकम को आगे कहां भेजा गया। मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए पूरे साइबर नेटवर्क की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। ED की जांच में मनी ट्रेल को महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है।
मामले में अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार
इस कार्रवाई के साथ ही डिजिटल अरेस्ट से जुड़े इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इससे पहले ED ने 23 अगस्त 2026 को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया था। अब 27 अगस्त 2026 को भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण की गिरफ्तारी की गई है। जांच एजेंसी इन सभी आरोपियों के बीच संबंध और उनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है। ED यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को किस तरह अलग-अलग खातों में भेजा गया। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।




