मेरठ में खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ
उत्तर प्रदेश के मेरठ में मंडल स्तरीय खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी शुरू हुई। उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, मेरठ मंडल की ओर से आयोजित यह 10 दिवसीय प्रदर्शनी खादी, हस्तशिल्प और पारंपरिक ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगाई गई है। इसका मकसद कारीगरों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना, स्थानीय हुनर को पहचान दिलाना और रोजगार के नए अवसरों को प्रोत्साहित करना है। प्रदर्शनी का उद्घाटन राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल और मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने किया।
खादी, रेशमी साड़ियों और मिट्टी के उत्पादों ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से आए उद्यमियों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। यहां खादी के पारंपरिक परिधानों के साथ रेशमी साड़ियां, कश्मीरी शॉल, क्रॉकरी, सूखे मेवे और कई तरह के स्वदेशी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। माटी कला से जुड़े उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। प्रदर्शनी में पारंपरिक शिल्प और आधुनिक जरूरतों से जुड़े उत्पादों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है, जिससे स्थानीय कारीगरों को अपने हुनर के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिल सके।
ग्रामीण उद्योगों से रोजगार बढ़ाने की उम्मीद
यह प्रदर्शनी केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि छोटे उद्यमियों और पारंपरिक कारीगरों को ग्राहकों तक सीधे पहुंचने का अवसर भी देती है। खादी के वस्त्रों, मिट्टी के बर्तनों और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों का बाजार बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। ऐसे आयोजन स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ लोगों को स्वदेशी वस्तुएं अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं। इससे पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े परिवारों की आजीविका को सहारा मिलने और नए रोजगार अवसर विकसित होने की संभावना रहती है।
माटी कला को संरक्षण और बाजार मिलने की उम्मीद
प्रदर्शनी में मिट्टी से उपयोगी और सजावटी सामान तैयार करने वाली शिप्रा शर्मा ने पारंपरिक कला के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना है कि मिट्टी से जुड़ा हुनर धीरे-धीरे सीमित होता जा रहा है, ऐसे में इसे प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजन कारीगरों को पहचान दिलाने के साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और स्थानीय कला से जोड़ने में मदद कर सकते हैं। माटी कला जैसे पारंपरिक कार्यों को बाजार मिलने से कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने का अवसर मिलता है।
खादी और स्वदेशी आंदोलन की विरासत पर जोर
उद्घाटन के बाद अतिथियों ने प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और उद्यमियों के उत्पादों को देखा। इस दौरान खादी के ऐतिहासिक महत्व और ग्रामीण आजीविका में इसकी भूमिका पर भी चर्चा हुई। विधायक गुलाम मोहम्मद ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले गांवों में सूत कातना और तैयार करना ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण माध्यम हुआ करता था। महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन का उल्लेख करते हुए खादी को देश की परंपरा और स्वदेशी भावना का प्रतीक बताया गया। मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने शहरवासियों से प्रदर्शनी में आकर स्थानीय और स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील की।
चरखा कातकर दिया खादी अपनाने का संदेश
कार्यक्रम में चरखा विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। अतिथियों ने चरखे से सूत कातकर खादी की परंपरा को याद किया और युवाओं को खादी से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने अतिथियों का खादी का पटका पहनाकर स्वागत किया, जबकि मेरठ मंडल की क्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने उन्हें चरखे के स्मृति चिह्न भेंट किए। आयोजकों ने लोगों से खादी के वस्त्रों, हस्तशिल्प, माटी कला और अन्य स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी करने की अपील की, ताकि पारंपरिक कारीगरों और छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल सके।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और उत्कृष्ट इकाइयों का सम्मान
प्रदर्शनी में स्कूली छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों और पारंपरिक व्यवसायों के महत्व का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी पुरस्कार योजना के अंतर्गत खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली इकाइयों को सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर के माध्यम से स्वदेशी उत्पाद तैयार करने वाले उद्यमियों के प्रयासों को पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
स्पेशल अपडेट
मेरठ में आयोजित यह 10 दिवसीय प्रदर्शनी खादी, माटी कला और अन्य ग्रामोद्योग उत्पादों को बढ़ावा देने का अवसर है। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी और स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी से छोटे उद्यमियों तथा पारंपरिक कारीगरों को बाजार मिल सकता है। ऐसे आयोजन ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहित करने, स्थानीय हुनर को आगे बढ़ाने और रोजगार की संभावनाओं को मजबूत करने में मददगार हो सकते हैं।







