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26वें SCO शिखर सम्मेलन में भारत का कड़ा संदेश: 26वां SCO शिखर सम्मेलन बिश्केक में संपन्न

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किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद का 26वां शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ। यह बैठक संगठन की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई, जिससे इस सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया। सम्मेलन की थीम ‘SCO के 25 वर्ष: सतत शांति, विकास और समृद्धि की ओर एक साथ’ रखी गई थी। दो दिवसीय बैठक में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन की अध्यक्षता किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने की। भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें भाग लेकर देश की प्राथमिकताओं को प्रमुखता से सामने रखा।

बिश्केक घोषणापत्र में आतंकवाद पर जोर
शिखर सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की ओर से बिश्केक घोषणापत्र जारी किया गया। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और सदस्य देशों के बीच सहयोग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड को स्वीकार नहीं करने की बात कही। उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत बताई। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सख्त और एकजुट कार्रवाई की वकालत करता रहा है। सम्मेलन में आतंकवाद को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया।

कनेक्टिविटी पर भारत की स्पष्ट नीति
SCO बैठक में भारत ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का समर्थन किया, लेकिन इसके साथ संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को जरूरी बताया। भारत का रुख रहा कि किसी भी कनेक्टिविटी परियोजना में संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के व्यापक प्रभावों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे संघर्षों का असर ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिक माध्यम बनाए रखने पर जोर दिया।