सितंबर इक्विनॉक्स क्या है
सितंबर इक्विनॉक्स पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर वार्षिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण खगोलीय पड़ाव है। उत्तरी गोलार्ध में इसे शरद विषुव कहा जाता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में यह वसंत विषुव का समय होता है। इस दौरान दोनों गोलार्धों को सूर्य का प्रकाश लगभग समान मात्रा में मिलता है।
इक्विनॉक्स शब्द का अर्थ
इक्विनॉक्स शब्द लैटिन के ‘Equus’ और ‘Nox’ से बना है, जिनका अर्थ क्रमशः ‘बराबर’ और ‘रात’ होता है। इसी कारण आम तौर पर माना जाता है कि इस दिन दिन और रात करीब 12-12 घंटे के होते हैं। हालांकि, वास्तविकता में अधिकांश स्थानों पर दोनों की अवधि बिल्कुल समान नहीं होती।
पृथ्वी का 23.5 डिग्री झुकाव
पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। सूर्य की परिक्रमा करते समय इसकी धुरी का झुकाव लगभग एक ही दिशा में बना रहता है। इसी वजह से वर्ष के अलग-अलग समय में कभी उत्तरी तो कभी दक्षिणी गोलार्ध को सूर्य की किरणें अधिक सीधी मिलती हैं और मौसम में बदलाव होता है।
विषुव के समय क्या होता है
वर्ष में दो बार, मार्च और सितंबर के आसपास, पृथ्वी की स्थिति ऐसी होती है कि सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के आसपास पड़ती हैं। इस दौरान पृथ्वी की दिन-रात सीमा दोनों ध्रुवों के करीब से गुजरती है और उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्ध को सूर्य का प्रकाश लगभग समान मात्रा में मिलता है।
दिन और रात 12-12 घंटे क्यों नहीं
इक्विनॉक्स के बावजूद अधिकांश स्थानों पर दिन और रात बिल्कुल 12-12 घंटे नहीं होते। इसका एक प्रमुख कारण पृथ्वी का वायुमंडल है। वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य अपनी वास्तविक स्थिति से थोड़ा ऊपर दिखाई देता है। इसी वजह से सूर्यास्त के बाद भी कुछ समय तक सूर्य दिखाई देता रहता है और सूर्योदय से पहले भी उसकी रोशनी नजर आने लगती है।
सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सामान्य तौर पर सूर्य के केंद्र के बजाय उसके ऊपरी किनारे के क्षितिज पर आने और जाने के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इससे दिन की गणना में कुछ अतिरिक्त समय जुड़ जाता है और वास्तविक दिन-रात की अवधि में अंतर दिखाई देता है।
इक्विलक्स क्या है
दिन और रात की वास्तविक अवधि के बराबर होने की तारीख हर स्थान पर एक जैसी नहीं होती। इसे ‘इक्विलक्स’ कहा जाता है और यह अक्षांश के अनुसार सितंबर इक्विनॉक्स से कुछ दिन पहले या बाद में हो सकती है। इसलिए विषुव और वास्तविक 12-12 घंटे वाले दिन को एक ही घटना मानना सही नहीं है।







