नेपाल के रसुवा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया और कई इलाकों में पानी तेजी से घुस गया। बाढ़ की चपेट में आने से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई है और कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। कई सड़कें, पुल और स्थानीय बुनियादी ढांचे भी बाढ़ के पानी में बह गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। स्थिति को देखते हुए लोगों से नदियों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की गई है।
मौतों का आंकड़ा 392 तक पहुंचा
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 389 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि तिब्बत की तरफ तीन मौतों की पुष्टि के बाद कुल आंकड़ा 392 बताया गया। हालांकि राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है। सैकड़ों लोगों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल मलबे और बाढ़ के पानी के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता अब फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की है।
त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल से 350 मजदूरों का रेस्क्यू
बाढ़ के बीच त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे 350 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। टनल में बाढ़ का पानी घुसने के बाद मजदूरों के अंदर फंसे होने से राहत और बचाव एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया। कई घंटे की मशक्कत के बाद सभी 350 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। रेस्क्यू किए गए मजदूरों में कई भारतीय नागरिकों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। सभी सुरक्षित निकाले गए लोगों को मेडिकल जांच के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।





