11 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 708 अंक यानी 0.95 फीसदी टूटकर 74,194 के आसपास आ गया, जबकि Nifty 50 करीब 234 अंक यानी 1 फीसदी गिरकर 23,243.70 के स्तर पर पहुंच गया। Reuters के मुताबिक दोनों प्रमुख सूचकांक जून के बाद अपने सबसे निचले स्तरों पर पहुंच गए थे। बाजार में यह गिरावट व्यापक रही और 16 प्रमुख सेक्टर्स में से 15 में कमजोरी देखने को मिली। छोटे और मिडकैप शेयरों में भी दबाव रहा, जिससे निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता और बढ़ी।
पश्चिम एशिया तनाव और महंगा कच्चा तेल बना बड़ा कारण
भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा दबाव इस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से पड़ रहा है। शुक्रवार के कारोबार में Brent crude 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया और बाद में करीब 109.97 डॉलर का चार महीने का उच्च स्तर भी देखा गया। तेल की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी से भारत के लिए आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इसके साथ ही वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। बाजार अब इस बात को लेकर सतर्क है कि लंबे समय तक महंगा तेल रहा तो केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर नीति पर भी असर पड़ सकता है।
ऑटो, मेटल और वित्तीय शेयरों पर ज्यादा दबाव
शुक्रवार के कारोबार में गिरावट सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली देखने को मिली। Reuters के अनुसार वित्तीय शेयरों में करीब 1.4 फीसदी, ऑटो सेक्टर में 1.3 फीसदी और मेटल इंडेक्स में लगभग 2.8 फीसदी की गिरावट रही। बाजार में बढ़ती लागत, महंगे कच्चे तेल और कमजोर वैश्विक संकेतों को लेकर निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में सतर्कता दिखाई। शुरुआती कारोबार में कुछ IT शेयरों ने बाजार की गिरावट के बीच मजबूती दिखाई, जबकि IndiGo, Tata Steel, Bajaj Finance और M&M जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला। इस व्यापक बिकवाली से बाजार की धारणा कमजोर बनी हुई है।






