महाराष्ट्र के पालघर जिले के मसवान स्थित सहायता प्राप्त आश्रमशाला में दो छात्रों की मौत के बाद स्कूल की व्यवस्था और बच्चों को समय पर इलाज मिलने को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक एक 7 वर्षीय छात्र की अगस्त में बीमारी के दौरान मौत हुई थी, जबकि इसके बाद एक अन्य छात्र की भी मौत हुई। इसी दौरान स्कूल के कई अन्य बच्चों में बुखार, खांसी और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें सामने आई थीं। मामले की जांच के दौरान स्कूल की चिकित्सा व्यवस्था और प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
5 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
पालघर पुलिस ने 1 सितंबर को पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। इनमें स्कूल के अध्यक्ष निलेश सांबरे, मानद सचिव महेश नाइक, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक राहुल सांख्ये, छात्रावास अधीक्षक अमृता सावंत और छात्रावास अधीक्षक पांडुरंग रामचंद्र लहारे के नाम बताए गए हैं। FIR में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोप बच्चों को बीमारी के दौरान समय पर पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से जुड़े हैं।
फिर 3 अधिकारियों पर ही कार्रवाई क्यों हुई
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 5 लोगों पर FIR और 3 अधिकारियों का निलंबन दो अलग-अलग कार्रवाई हैं। तीन अधिकारी यानी प्रधानाध्यापक राहुल सांख्ये, अधीक्षक अमृता सावंत और पांडुरंग लहारे को प्रशासन ने जांच लंबित रहने तक निलंबित किया था। यह विभागीय कार्रवाई थी, जबकि पांच लोगों के खिलाफ FIR आपराधिक जांच का हिस्सा है। इसलिए दोनों आंकड़ों में अंतर होना अपने आप में विरोधाभास नहीं है।







