उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद आज 22 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अहम चरण में पहुंच गया है। मामले में आरक्षण और मेरिट सूची से जुड़े विवाद पर अदालत के सामने अलग-अलग पक्षों की दलीलें रखी जा रही हैं। सुनवाई का एक प्रमुख मुद्दा मेधावी SC और OBC अभ्यर्थियों को अनारक्षित यानी सामान्य सीटों पर माइग्रेशन का लाभ देने से जुड़ा है। इसके साथ ही पहले से चयनित और करीब छह वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की नियुक्तियों के भविष्य पर भी चर्चा हो रही है।
मेधावी SC OBC अभ्यर्थियों का माइग्रेशन मुख्य मुद्दा
इस पूरे विवाद में आरक्षित वर्ग के उन अभ्यर्थियों का मुद्दा महत्वपूर्ण है जिन्होंने सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार अनारक्षित सीटों पर शामिल किए जाने यानी माइग्रेशन का सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने है। मामले से जुड़े पक्षों की दलील है कि आरक्षण व्यवस्था लागू करते समय मेधावी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अधिकारों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसी मुद्दे पर नई मेरिट सूची और आरक्षण व्यवस्था को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है।
2024 में हाई कोर्ट ने पुरानी सूची रद्द करने का आदेश दिया था
इस विवाद की महत्वपूर्ण कड़ी 13 अगस्त 2024 का इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला है। अदालत ने 69 हजार सहायक शिक्षकों की चयन सूची को नए सिरे से तैयार करने का निर्देश दिया था और कहा था कि नई सूची निर्धारित नियमों तथा आरक्षण व्यवस्था के अनुसार बनाई जाए। अदालत के आदेश में 1 जून 2020 और 5 जनवरी 2022 की चयन सूचियों को नजरअंदाज कर नई चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया था। इसी आदेश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अब शीर्ष अदालत में इसके अलग-अलग कानूनी पहलुओं पर सुनवाई चल रही है।







