मैच में वाइड फैसले पर विवाद
भारत और जापान के बीच 22 सितंबर को खेले गए बारिश से प्रभावित T20 मुकाबले में आखिरी ओवर के दौरान वाइड बॉल के फैसले को लेकर विवाद हो गया। पांच ओवर प्रति पारी के इस मुकाबले में भारत ने जापान को दो रन से हराया, लेकिन अंतिम ओवर में बदले गए वाइड के फैसले ने मैच के बाद चर्चा तेज कर दी।
आखिरी ओवर में क्या हुआ
जापान को अंतिम ओवर में जीत के लिए आठ रन की जरूरत थी। अक्षर पटेल की गेंद पर ऑन-फील्ड अंपायर ने पहले वाइड का संकेत दिया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने फैसले पर आपत्ति जताई और अंपायर से बातचीत हुई। बाद में फैसला बदलकर गेंद को वाइड नहीं माना गया।
अक्षर और श्रेयस की अंपायर से चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार अक्षर पटेल और भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर इस फैसले को लेकर अंपायर से बातचीत करते नजर आए। फैसले के बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में भी बहस शुरू हुई। हालांकि, खिलाड़ियों द्वारा अंपायर के फैसले पर आपत्ति जताने को सीधे तौर पर किसी तरह की ‘धांधली’ का प्रमाण मानना उचित नहीं है।
वाइड बॉल पर क्या कहता है नियम
ICC की T20I खेलने की शर्तों के अनुसार वाइड तय करते समय गेंद की स्थिति के साथ बल्लेबाज की मूवमेंट भी महत्वपूर्ण होती है। मौजूदा नियमों में बल्लेबाज की डिलीवरी के समय स्थिति को संदर्भ बिंदु माना जाता है और यह देखा जाता है कि गेंद बल्लेबाज की पहुंच से बाहर थी या नहीं। बल्लेबाज की अपनी मूवमेंट गेंद को उससे दूर ले जाती है, तो ऐसी गेंद को वाइड नहीं माना जा सकता।
क्या वाइड का फैसला बदला जा सकता है
हां, अंपायर अपना फैसला बदल सकता है, लेकिन इसके लिए नियमों में समय और परिस्थिति से जुड़ी शर्तें हैं। ICC की अंपायर संबंधी शर्तों के अनुसार अंपायर अपना फैसला तभी बदल सकता है जब बदलाव तुरंत किया जाए। वहीं वाइड के नियम के अनुसार वाइड का संकेत दिए जाने के बाद गेंद अपने आप डेड नहीं हो जाती।
बल्लेबाज की मूवमेंट क्यों अहम है
वाइड का फैसला केवल इस आधार पर नहीं किया जाता कि गेंद बल्लेबाज के शरीर से किस तरफ गई। ICC की मौजूदा T20I वाइड-बॉल व्यवस्था में बल्लेबाज की स्थिति और मूवमेंट को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए किसी डिलीवरी को वाइड या वैध गेंद घोषित करने में अंपायर को गेंद और बल्लेबाज दोनों की स्थिति का आकलन करना होता है।







