Home राजनीति Opposition March To SC: ‘चलो दिल्ली’ अभियान के तहत सुप्रीम कोर्ट तक...

Opposition March To SC: ‘चलो दिल्ली’ अभियान के तहत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे विपक्षी नेता

चलो दिल्ली’ अभियान के तहत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना बनाई। इस मार्च में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं के शामिल होने की बात कही गई। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को ‘चलो दिल्ली–लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम दिया। विपक्ष का कहना है कि वह मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर अपनी चिंताएं सामने रखना चाहता है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों और उनके समर्थन में पेश किए गए तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

 

CJI से मुलाकात के अनुरोध पर क्या हुआ
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी नेता ज्ञापन के जरिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, SIR प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था से जुड़े अपने सवाल सामने रखना चाहते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, CJI ने प्रशासनिक स्तर पर इस तरह के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो प्रभावित पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने मार्च के जरिए अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखने की तैयारी की।

 

मार्च में शामिल हो सकते हैं कई विपक्षी नेता
राहुल गांधी और खरगे के अलावा अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना के संजय राउत, एनसीपी की सुप्रिया सुले, सीपीआई के डी राजा और सीपीएम के एमए बेबी सहित विपक्ष के अन्य नेताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को अपने विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया है। नेताओं की ओर से नागरिकों, युवाओं और सिविल सोसाइटी समूहों से भी मार्च में भाग लेने की अपील की गई।

 

दिल्ली मेट्रो के छह स्टेशनों पर प्रतिबंध की सूचना
प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एडवाइजरी जारी की गई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, संबंधित दिन सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और बाराखंभा रोड मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद रखने की सूचना दी गई थी। हालांकि, इन स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहने की बात कही गई। यात्रियों को सलाह दी गई कि वे यात्रा से पहले मेट्रो और यातायात से संबंधित आधिकारिक अपडेट देख लें, क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था के कारण मार्ग और आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

 

राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि विपक्षी मार्च में युवा, विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले नागरिक शामिल होंगे। उन्होंने पिछले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। ये आरोप कांग्रेस और विपक्षी नेताओं के हैं; इन पर संबंधित पक्षों के बयान और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी के आधार पर स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है।

 

खरगे ने लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाया
मल्लिकार्जुन खरगे ने भी चुनावी प्रक्रिया और विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष CJI को ज्ञापन देकर अपनी चिंताओं से अवगत कराना चाहता है। खरगे ने दावा किया कि पिछले प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान तैनात किए गए थे। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और कहा कि वे लोकतंत्र तथा नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखेंगे। सरकार और संबंधित एजेंसियों का पक्ष भी इस विवाद को पूरी तरह समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

विपक्ष ने SIR और चुनावी पारदर्शिता पर उठाए सवाल
विपक्षी दलों का विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जुड़ा है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और चुनावी अधिकारों से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, इन आरोपों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए निर्वाचन आयोग का पक्ष, उपलब्ध दस्तावेज और संबंधित न्यायिक कार्यवाही देखना जरूरी है। विपक्ष ने आगे भी संयुक्त कार्यक्रमों और मार्च के जरिए इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई है।