राहुल गांधी की SIR याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। हालांकि, याचिका फिलहाल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो पाई है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका की जांच के दौरान दाखिल प्रक्रिया से जुड़ी कुल 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। इनमें कुछ नेताओं के वकालतनामे पर हस्ताक्षर नहीं होना, निर्धारित कोर्ट फीस में कमी और जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां स्पष्ट न होना शामिल है। इन आपत्तियों के कारण याचिका को सूचीबद्ध किए जाने से पहले जरूरी सुधार और स्पष्टीकरण की आवश्यकता सामने आई है।
अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत नौ नेताओं के हस्ताक्षर नहीं
रजिस्ट्री की आपत्तियों में वकालतनामे पर हस्ताक्षर से जुड़ा मुद्दा प्रमुख है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता क्रमांक 11 तक के वकालतनामों में संबंधित नेताओं के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सौगत रॉय, संजय राउत, एम. ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं। वकालतनामा अदालत में किसी वकील को संबंधित पक्ष की ओर से पैरवी करने का अधिकार देने वाला दस्तावेज होता है। इस पर जरूरी हस्ताक्षर न होने पर रजिस्ट्री आपत्ति दर्ज कर सकती है और दस्तावेजों में सुधार की मांग कर सकती है।
मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र और कोर्ट फीस पर आपत्ति
रजिस्ट्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रति जमा करने को कहा है। इसके साथ ही याचिका दाखिल करते समय जमा की गई कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी भी दर्ज की गई है। रजिस्ट्री ने याचिका के समर्थन में लगाए गए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियां स्पष्ट नहीं होने पर भी आपत्ति जताई है। अदालत में याचिका की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों का स्पष्ट होना और निर्धारित फीस जमा होना जरूरी होता है। इसलिए इन कमियों को दूर करना याचिका की आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत पक्षकार बनाने पर स्पष्टीकरण
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस रिट याचिका में चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी बनाए जाने पर भी रजिस्ट्री ने स्पष्टीकरण मांगा है। याचिकाकर्ताओं से यह बताने को कहा गया है कि संबंधित मामले में चुनाव आयुक्तों को उनके व्यक्तिगत नाम और पद के आधार पर पक्षकार बनाने का क्या कारण है। यह आपत्ति याचिका में प्रतिवादियों को शामिल करने के तरीके और उससे संबंधित कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी है। इस मुद्दे पर मांगा गया स्पष्टीकरण भी दर्ज आपत्तियों में शामिल है।
SIR से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों की मांग
INDIA गठबंधन की याचिका में चुनाव आयोग के 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने की मांग की गई है। इसमें संबंधित फाइलें, बैठकों के एजेंडे, कार्यवाही का विवरण और चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज आपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। रजिस्ट्री ने चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची से हटाए गए नामों से संबंधित दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां पेन ड्राइव में उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। याचिका में मांगे गए इन रिकॉर्ड का उद्देश्य SIR प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और दस्तावेजों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना है। रजिस्ट्री की आपत्तियों का निपटारा और आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति होने के बाद ही याचिका को सूचीबद्ध किए जाने की आगे की प्रक्रिया बढ़ सकेगी।







