जनजातीय संग्रहालय में कठपुतलियों की अनोखी प्रदर्शनी
भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में गुरुवार से पुतुल समारोह की शुरुआत हुई। इस प्रदर्शनी में भारत सहित करीब 10 देशों की 150 से अधिक कठपुतलियां प्रदर्शित की गई हैं। यहां चीन की लगभग 2,000 वर्ष पुरानी पी यिंग शी छाया कठपुतली कला से लेकर भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कठपुतलियों को देखने का अवसर मिल रहा है। कर्नाटक की लकड़ी से बनी राम और रावण की कठपुतलियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
10 देशों की लोककलाओं और परंपराओं की झलक
इस आयोजन का संचालन जनजातीय संग्रहालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली और डॉल्स थिएटर, कोलकाता के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। प्रदर्शनी में चीन के अलावा तुर्की, वियतनाम, इंडोनेशिया, मिस्र और अर्जेंटीना सहित कई देशों की कठपुतलियां शामिल हैं। इनके माध्यम से अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक परंपराओं, लोककथाओं और कलात्मक शैलियों को समझने का अवसर मिलता है। आयोजकों का उद्देश्य पारंपरिक कठपुतली कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और इसके प्रति लोगों की रुचि बढ़ाना है।
भोपाल में पहली बार इतने बड़े स्तर पर प्रदर्शन
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के राजेंद्र सिंह के अनुसार, वर्ष 1991 में दिल्ली में आयोजित पपेट फेस्टिवल के दौरान देश-विदेश की सैकड़ों कठपुतलियों का संग्रह किया गया था। बाद में इस संग्रह को विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। उनके मुताबिक, भोपाल में करीब 10 देशों की 150 से अधिक कठपुतलियों का इतना बड़ा प्रदर्शन पहली बार आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले लगभग 20 साल पूर्व भारत भवन में भी कुछ कठपुतलियां प्रदर्शित की गई थीं। यह प्रदर्शनी दर्शकों को कठपुतली कला के इतिहास और उसकी विविधता को करीब से जानने का अवसर दे रही है।
मंचीय प्रस्तुतियों से जीवंत हो रही कठपुतली कला
पुतुल समारोह में प्रदर्शनी के साथ कठपुतली कला की मंचीय प्रस्तुतियां भी आयोजित की जा रही हैं। समारोह के पहले दिन महाराष्ट्र से आए सत्यजीत पाथ्ये और उनके समूह ने प्रस्तुति दी। पी यिंग शी जैसी छाया कठपुतली शैलियों में प्रकाश और पर्दे की मदद से दृश्य प्रस्तुत किए जाते हैं, जबकि भारत की पारंपरिक कठपुतलियां लोककथाओं और धार्मिक प्रसंगों को दर्शाती हैं। आयोजकों के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करने, कलाकारों को मंच देने और इस विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।







