Home ज्योतिष Panchang October 15: आज का पंचांग: 15 अक्टूबर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

Panchang October 15: आज का पंचांग: 15 अक्टूबर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

आज आश्विन शुक्ल पंचमी की तिथि
15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, पंचमी तिथि रात 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। ज्येष्ठा नक्षत्र अगले दिन सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जबकि सौभाग्य योग रात 9 बजकर 15 मिनट तक प्रभावी बताया गया है। दिन के करण बव और बालव हैं। धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों की योजना बनाने के लिए तिथि, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी को पंचांग में महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

आज के शुभ मुहूर्त का समय
पंचांग के अनुसार, गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह लगभग 4:34 बजे से 5:22 बजे तक बताया गया है। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 1:57 बजे से 2:44 बजे तक और अमृत काल दोपहर 3:50 बजे से शाम 5:24 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों को शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए देखा जाता है। हालांकि, किसी विशेष कार्य के लिए मुहूर्त का चयन स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।

 

राहुकाल और अन्य अशुभ समय
आज राहुकाल दोपहर 1:27 बजे से 2:54 बजे तक रहेगा। यमगण्ड का समय सुबह 6:12 बजे से 7:39 बजे तक और गुलिक काल सुबह 9:06 बजे से 10:33 बजे तक बताया गया है। दुर्मुहूर्त लगभग सुबह 10:52 बजे से 11:37 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में इन अवधियों के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। इन समयों को धार्मिक परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए; किसी कार्य की सफलता केवल शुभ या अशुभ समय पर निर्भर नहीं मानी जा सकती।

 

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
15 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6:12 बजे और सूर्यास्त शाम 5:49 बजे बताया गया है। चंद्रोदय सुबह 10:21 बजे तथा चंद्रास्त रात 8:55 बजे होगा। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग का समय देखना उपयोगी है। दिन की धार्मिक गतिविधियों और पूजा-पाठ का समय तय करते समय स्थानीय सूर्योदय तथा अन्य पंचांग विवरणों को ध्यान में रखा जाता है।

 

ललिता पंचमी और नवरात्रि के पांचवें दिन का महत्व
आज ललिता पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दिन मां ललिता त्रिपुरसुंदरी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी दिन शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन भी है, जिसमें मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता की गोद में भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय बालरूप में विराजमान रहते हैं। देवी का यह स्वरूप मातृत्व, प्रेम, करुणा और ममता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर देवी को पुष्प अर्पित करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और दुर्गा चालीसा का पाठ कर सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।

 

आज के व्रत और पूजा-पाठ
आज के लिए ललिता पंचमी व्रत का उल्लेख किया गया है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विधान भी बताया गया है। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और देवी की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में मां स्कंदमाता की श्रद्धापूर्वक पूजा को सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख की कामना से जोड़ा जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुकूल नियमों का पालन कर सकते हैं।