जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे CJP नेता हिरासत में
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका समेत संगठन के प्रभारी अजिंक्य शिंदे तथा कई अन्य प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। संगठन के नेताओं ने वहां प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। इस घटना के बाद विरोध स्थल को लेकर संगठन और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद सामने आया है।
जंतर-मंतर की अधिसूचना को लेकर विवाद
खबर के अनुसार, गृह मंत्रालय की सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल बनाए रखने से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव किया है। इसके बाद CJP के नेताओं ने दिल्ली पुलिस की अधिसूचना पर नाराजगी जताई। संगठन का कहना है कि इस फैसले से नागरिकों के विरोध करने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अधिसूचना की सटीक कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
सौरव दास ने प्रधानमंत्री से उठाए सवाल
सौरव दास ने जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने से जुड़े फैसले को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर सवाल उठाए और पूछा कि क्या निर्णय लेने से पहले गृह मंत्रालय ने नागरिकों, संबंधित पक्षों और संगठनों से परामर्श किया था। CJP नेताओं का कहना है कि जंतर-मंतर केवल एक स्थान नहीं, बल्कि नागरिकों के विरोध और अपनी बात रखने के अधिकार से जुड़ा प्रतीक है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और अधिसूचना की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि महत्वपूर्ण है।
तिरंगा लेकर पहुंचने का किया दावा
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और संगठन के अन्य सदस्य सोमवार सुबह राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। उनके अनुसार, मौके पर पहुंचने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। दीपके ने कहा कि प्रशासनिक फैसलों के जरिए विरोध और असहमति की आवाज को खत्म नहीं किया जा सकता।
सौरव दास ने बताया प्रतिरोध का संदेश
सौरव दास ने दावा किया कि संगठन के सदस्य जंतर-मंतर में प्रवेश करने में सफल रहे थे। उन्होंने हिरासत में लिए जाने से पहले प्रदर्शन स्थल को दोबारा हासिल करने की बात कही। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने इस कार्रवाई को प्रतिरोध का संदेश बताया और कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाने के लिए आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार के फैसले पर CJP की प्रतिक्रिया
जंतर-मंतर से जुड़ी अधिसूचना में बदलाव को लेकर अभिजीत दीपके और सौरव दास ने केंद्र सरकार की आलोचना की। दीपके ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में हटाने का फैसला असहमति की आवाज को सीमित करने की कोशिश है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे कदम लोकतंत्र और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं। ये आरोप संगठन के नेताओं के बयानों पर आधारित हैं।
आंदोलन को देशभर में फैलाने की चेतावनी
अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में दावा किया कि जंतर-मंतर पहले ही संघर्ष का केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि विरोध स्थल की अधिसूचना में बदलाव से आंदोलन समाप्त नहीं होगा, बल्कि इसे राजधानी से बाहर भी फैलाया जा सकता है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। उनके बयान को संगठन की ओर से आंदोलन जारी रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।







