बजट 2027 से LTCG टैक्स में राहत की उम्मीद
बजट 2027 से पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से इस विषय पर निवेशकों की राय जानने की बात के बाद टैक्स दरों में संभावित कटौती को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। यदि सरकार टैक्स में बदलाव करती है, तो शेयर बाजार, इक्विटी म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी और सोने में निवेश करने वालों पर इसका अलग-अलग असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी तक LTCG टैक्स घटाने का कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं हुआ है।
शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड में क्या होगा असर?
मौजूदा नियमों के तहत सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और पात्र इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट्स को 12 महीने से अधिक रखने के बाद होने वाले निर्धारित दीर्घकालिक मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स लागू होता है। इस श्रेणी में एक वित्त वर्ष के दौरान कुल 1.25 लाख रुपये तक के पात्र लाभ पर छूट मिलती है। यदि सरकार टैक्स दर घटाती है या नियमों में राहत देती है, तो पात्र निवेशकों के हाथ में टैक्स चुकाने के बाद अधिक रकम बच सकती है। वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि टैक्स में कितनी कटौती होती है और निवेशक को कितना लाभ हुआ है।
प्रॉपर्टी बेचने पर टैक्स का गणित
रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए भी LTCG टैक्स में संभावित बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। सामान्य तौर पर अचल संपत्ति को 24 महीने से अधिक रखने के बाद उसका लाभ दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की श्रेणी में आता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, सामान्य मामलों में बिना इंडेक्सेशन लाभ की गणना पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लागू होता है। वहीं, 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई कुछ संपत्तियों के पात्र व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए पुराने नियमों के तहत इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत टैक्स और नए नियमों के तहत 12.5 प्रतिशत टैक्स की तुलना करके राहत का प्रावधान है, ताकि लागू शर्तों के अधीन पुराने नियमों से अधिक कर देनदारी न बने। यदि भविष्य में टैक्स दरों में बदलाव होता है, तो संपत्ति बेचने वालों की कर देनदारी भी प्रभावित हो सकती है।
सोने और डेट म्यूचुअल फंड पर भी ध्यान जरूरी
सोने में निवेश का टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश किस रूप में किया गया है और उसे कितने समय तक रखा गया है। भौतिक सोने, गोल्ड ETF और अन्य गोल्ड निवेश साधनों पर नियम एक जैसे नहीं हो सकते। इसी तरह, डेट म्यूचुअल फंड की कई श्रेणियों में होने वाले लाभ पर लागू नियम इक्विटी फंड से अलग हैं। पात्र डेट फंड निवेशों पर लाभ अक्सर निवेशक की लागू आयकर दर के अनुसार कर योग्य होता है। इसलिए केवल LTCG टैक्स में संभावित कटौती की चर्चा के आधार पर सभी निवेश विकल्पों की बचत की तुलना करना सही नहीं होगा।
सबसे ज्यादा बचत कहां होगी?
यदि LTCG टैक्स घटता है, तो सबसे अधिक फायदा उस निवेशक को हो सकता है जिसकी संबंधित श्रेणी में कर योग्य दीर्घकालिक कमाई ज्यादा है। लेकिन शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी और सोने के बीच वास्तविक तुलना करते समय निवेश की अवधि, कुल मुनाफा, खरीद मूल्य, लागू छूट, लेनदेन लागत और जोखिम को भी ध्यान में रखना होगा। टैक्स कम होने से किसी निवेश का टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न बढ़ सकता है, लेकिन इससे यह सुनिश्चित नहीं होता कि वह निवेश दूसरे विकल्पों से बेहतर ही रहेगा।
बजट से पहले निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बजट 2027 में LTCG टैक्स की दर, होल्डिंग अवधि या अन्य नियमों में बदलाव होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बाजार से जुड़े विशेषज्ञों और निवेशकों की ओर से कर व्यवस्था को सरल बनाने तथा निवेश पर कर बोझ घटाने की मांग की जाती रही है। फिलहाल निवेश का फैसला मौजूदा नियमों, अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर करना उचित है। यदि बजट में कोई राहत घोषित होती है, तो उसके वास्तविक लाभ का आकलन आधिकारिक प्रावधान सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।







