Home कारोबार New Rule For Foreign Income: विदेशी कमाई पर नया नियम, फ्रीलांसर और...

New Rule For Foreign Income: विदेशी कमाई पर नया नियम, फ्रीलांसर और यूट्यूबर की डॉलर इनकम पर क्या असर?

विदेशी कमाई पर लागू हुई नई व्यवस्था
भारत में बैठकर विदेशी क्लाइंट के लिए सर्विस देने वाले फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, डिजिटल एजेंसियों, सॉफ्टवेयर और आईटी प्रोफेशनल्स तथा डिजाइनर्स के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नई रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू हुई है। सर्विस एक्सपोर्ट के लिए एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म यानी EDF की जरूरत होगी। इसका मतलब यह है कि विदेशी करेंसी में मिलने वाले भुगतान के साथ यह रिकॉर्ड भी स्पष्ट होना चाहिए कि पैसा किस क्लाइंट से और किस सर्विस के बदले मिला है।

 

सर्विस एक्सपोर्ट को आसान उदाहरण से समझें
मान लीजिए दिल्ली में बैठा कोई फ्रीलांसर अमेरिका की एक कंपनी के लिए वेबसाइट डिजाइन करता है और उसे 2,000 डॉलर का भुगतान मिलता है। इस स्थिति में कोई सामान विदेश नहीं भेजा गया, लेकिन भारत से विदेशी क्लाइंट को सर्विस दी गई और उसके बदले विदेशी करेंसी मिली। वेबसाइट डिजाइन, कंसल्टिंग, डिजिटल मार्केटिंग, सॉफ्टवेयर और अन्य प्रोफेशनल सर्विस जैसे काम परिस्थितियों के अनुसार सर्विस एक्सपोर्ट के दायरे में आ सकते हैं।

 

अब इनवॉइस और पेमेंट का रिकॉर्ड जरूरी
नई व्यवस्था के तहत सर्विस एक्सपोर्ट करने वाले व्यक्ति या कारोबार को अपनी सर्विस और उसकी वैल्यू की डिक्लेरेशन करनी होगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी विदेशी क्लाइंट को 2,000 डॉलर का इनवॉइस जारी किया गया है और बैंक खाते में भी 2,000 डॉलर आए हैं, तो रिकॉर्ड में क्लाइंट, सर्विस, इनवॉइस की रकम और प्राप्त भुगतान की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। दी गई जानकारी के मुताबिक, EDF डिक्लेरेशन इनवॉइस जारी होने वाले महीने के खत्म होने के 30 दिन के भीतर करनी होगी। अक्टूबर 2026 के इनवॉइस के लिए पहली डिक्लेरेशन की डेडलाइन 30 नवंबर 2026 होगी।

 

फ्रीलांसर और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स पर असर
विदेशी ग्राहकों के लिए काम करने वाले फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, आईटी और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल, डिजिटल एजेंसियां और डिजाइनर अब अपनी विदेशी कमाई का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित तरीके से रखें। इनवॉइस, कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट, दी गई सर्विस की जानकारी, पेमेंट रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर यह स्पष्ट किया जा सके कि विदेशी करेंसी किस काम के बदले प्राप्त हुई है।

 

यूट्यूबर और इंफ्लुएंसर पर हर मामले में लागू नहीं होगा नियम
विदेश से पैसा मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर यूट्यूबर या इंफ्लुएंसर की आय अपने आप सर्विस एक्सपोर्ट मानी जाएगी। यदि किसी विदेशी ब्रांड या कंपनी को कोई सर्विस दी गई है और उसके बदले भुगतान मिला है, तो वह सर्विस एक्सपोर्ट के दायरे में आ सकती है। वहीं YouTube की एड रेवेन्यू, एफिलिएट इनकम या अन्य डिजिटल आय की प्रकृति अलग हो सकती है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आय किस वजह से हुई और भुगतान किस उद्देश्य से प्राप्त हुआ।

 

यह नया टैक्स नहीं, FEMA कंप्लायंस से जुड़ा बदलाव है
EDF की यह व्यवस्था कोई नया इनकम टैक्स नहीं है। यह फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी FEMA के तहत एक्सपोर्ट और विदेशी करेंसी की रिपोर्टिंग से जुड़ी आवश्यकता है। इसलिए विदेशी क्लाइंट से कमाई करने वालों के लिए सिर्फ इनकम टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड रखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लागू फॉरेन एक्सचेंज नियमों के अनुसार सर्विस एक्सपोर्ट और पेमेंट का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखना होगा।

 

बैंक और एक्सपोर्ट रिपोर्टिंग सिस्टम की भूमिका
EDF की जानकारी ऑथराइज्ड डीलर यानी बैंक के माध्यम से रिपोर्ट की जाती है और एक्सपोर्ट से जुड़ी जानकारी संबंधित एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम में दर्ज होती है। ऐसे में बैंकिंग रिकॉर्ड में विदेशी भुगतान का स्रोत और उसके पीछे मौजूद सर्विस या एक्सपोर्ट की जानकारी स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। विदेशी कमाई करने वालों को इसलिए अपने इनवॉइस और पेमेंट रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी से बचना होगा।