ब्याज दर बढ़ने से ऋण वृद्धि में नरमी की संभावना
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बैंकों की ऋण वृद्धि में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन इसका व्यापक आर्थिक विस्तार पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमन के मुताबिक, मौजूदा क्रेडिट ग्रोथ करीब 18 प्रतिशत के स्तर पर है, जो पिछले दस वर्षों के औसत 12-14 प्रतिशत से काफी अधिक है।
क्रेडिट ग्रोथ अभी भी मजबूत रहने की उम्मीद
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से मांग और ऋण वृद्धि में कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन 18 से 20 प्रतिशत के आसपास की ऋण वृद्धि अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए पर्याप्त होगी। उन्होंने बताया कि नीतिगत दर में बदलाव का असर अंतिम उधारकर्ताओं की वास्तविक ऋण दरों पर आने में आमतौर पर करीब दो तिमाहियों का समय लग सकता है।
आरबीआई गवर्नर ने भी जताया भरोसा
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ऋण वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। उनके अनुसार, इसमें कुछ प्रतिशत अंकों का उतार-चढ़ाव अर्थव्यवस्था की समग्र तस्वीर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं करता। उन्होंने कहा कि बैंक ऋण वृद्धि के जरिए आर्थिक विकास को समर्थन देना जारी रखेंगे।
रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके साथ रेपो रेट 5.50 प्रतिशत हो गया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली ब्याज दर बढ़ोतरी बताई गई है। आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को भी कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर बदला है।
महंगे हो सकते हैं फ्लोटिंग रेट लोन
रेपो रेट बढ़ने का असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है, जिससे फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य ऋणों की ईएमआई बढ़ने की संभावना है। आरबीआई ने ब्याज दर बढ़ाने के पीछे पश्चिम एशिया में संघर्ष के दोबारा बढ़ने और वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ती चिंताओं को भी प्रमुख कारणों में शामिल किया है।







