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Supreme Court Hearing Dates: सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका पर 27 अक्टूबर को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने तय की अलग-अलग मामलों की तारीखें
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हुए प्रदर्शनों, चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित की हैं। इन मामलों को विषय और कानूनी पहलुओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा गया है, ताकि प्रत्येक मामले पर तय कार्यक्रम के अनुसार सुनवाई हो सके। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी से जुड़ी याचिकाओं से लेकर दिल्ली में पुलिस कार्रवाई और महिला पत्रकारों से संबंधित मामले तक की सुनवाई नवंबर तक निर्धारित की गई है।

 

राहुल गांधी और ओवैसी की याचिकाओं पर 27 अक्टूबर को सुनवाई
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से संबंधित याचिकाओं पर 27 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। ये मामले चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े विवादों के व्यापक संदर्भ में सामने आए हैं। सुनवाई के दौरान संबंधित याचिकाओं में उठाए गए कानूनी सवालों पर विचार किया जाएगा।

 

दिल्ली के प्रदर्शनों और जंतर-मंतर मामले की तारीख 3 नवंबर
दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और जंतर-मंतर पर पुलिस की कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की गई है। इन मामलों में प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम और पुलिस कार्रवाई के कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाना है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और वहां पुलिस की भूमिका से जुड़े मुद्दे भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।

 

महिला पत्रकारों से जुड़े मामले पर 5 नवंबर को सुनवाई
महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित मामला 5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आएगा। यह मामला आरोपों और उनसे जुड़े कानूनी पहलुओं से संबंधित है। सुनवाई के दौरान अदालत संबंधित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी। आरोपों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही तय होंगे।

 

BNSS की धाराओं से जुड़ी याचिकाएं 19 नवंबर को
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 172 और धारा 163 से संबंधित याचिकाओं पर 19 नवंबर को सुनवाई निर्धारित की गई है। इन धाराओं से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर अदालत विचार करेगी। अलग-अलग मामलों के लिए तारीखें तय किए जाने से संबंधित पक्षों को अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, सुनवाई की निर्धारित तारीखों पर आगे की कार्यवाही और किसी संभावित आदेश की जानकारी अदालत की आधिकारिक सूचना से ही स्पष्ट होगी।