Home राजनीति TMC Election Symbol: सुप्रीम कोर्ट का TMC नाम-सिंबल विवाद पर बड़ा निर्देश

TMC Election Symbol: सुप्रीम कोर्ट का TMC नाम-सिंबल विवाद पर बड़ा निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर दो विरोधी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर अहम निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग को मामले का अंतिम फैसला तय समयसीमा में करने का निर्देश दिया है।

 

चुनाव आयोग को तीन महीने में करना होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, दोनों पक्षों को पहले चार सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें, जवाब और आवश्यक साक्ष्य पूरे करने होंगे। इसके बाद चुनाव आयोग को विवाद पर तीन महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना होगा। अदालत ने इस मामले को अनिश्चित समय तक लंबित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से निपटाने की दिशा तय की है।

 

ममता बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत TMC के मूल नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। चुनाव आयोग ने यह अंतरिम व्यवस्था पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद के चलते की थी।

 

दोनों गुटों को दिए गए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों के मद्देनजर दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

 

6 अक्टूबर के उपचुनावों पर भी विवाद का असर
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत इन चुनावों में दोनों गुट अपने-अपने आवंटित नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करेंगे, जबकि मूल पार्टी नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न को लेकर अंतिम फैसला बाद की प्रक्रिया में होगा।

 

अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के निर्देश के बाद विवाद के निपटारे के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो गई है। पहले दोनों गुटों को अपनी दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद चुनाव आयोग को निर्धारित तीन महीने की अवधि में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना फैसला करना होगा।