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शीतकालीन सत्र में बड़ा फैसला: पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर संसद में तीव्र बहस

संसदीय जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना गया है। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि उनके इस्तीफे के बाद भी इस कार्रवाई की संवैधानिक स्थिति को लेकर कानूनी सवाल बने हुए हैं। प्रस्ताव आगे बढ़ने की स्थिति में वर्मा को संसद में अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिल सकता है।

कैश कांड से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला मार्च 2025 में दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद सामने आया था। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को परिसर के एक स्टोररूम में बड़ी मात्रा में अधजली और बेहिसाब नकदी मिली थी। घटना के बाद मामले की जांच शुरू हुई और वर्मा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे। बाद में सुप्रीम कोर्ट की इन-हाउस प्रक्रिया और संसदीय जांच के जरिए आरोपों की पड़ताल की गई। इसी विवाद ने आगे चलकर उनके खिलाफ संसद में हटाने की प्रक्रिया का रास्ता तैयार किया।

जांच समिति ने तीनों आरोप माने साबित
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की। समिति ने कहा कि वर्मा के आधिकारिक आवास से मिली पर्याप्त मात्रा में बेहिसाब नकदी की मौजूदगी को वह संतोषजनक तरीके से स्पष्ट नहीं कर सके। रिपोर्ट में महत्वपूर्ण सामग्री को सुरक्षित रखने में चूक और घटना को लेकर दिए गए उनके स्पष्टीकरण को भी असंतोषजनक बताया गया। समिति ने तीनों आरोपों को साबित माना, हालांकि रिपोर्ट ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि आपराधिक कानून के अर्थ में नकदी व्यक्तिगत रूप से वर्मा की थी।