दुनिया में बढ़ते तापमान को लेकर वैज्ञानिकों और जलवायु संस्थाओं की चिंता लगातार बढ़ रही है। यूरोपीय संघ की Copernicus Climate Change Service के मुताबिक अगस्त 2026 वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड का सबसे गर्म अगस्त रहा और औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.65°C ऊपर दर्ज किया गया। अगस्त 2026 जुलाई 2023 के साथ अब तक का संयुक्त रूप से सबसे गर्म महीना भी रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार इस गर्मी में इंसानी गतिविधियों से बढ़ रहा दीर्घकालिक तापमान और प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा El Niño दोनों महत्वपूर्ण कारक हैं।
1.5°C की सीमा पार होने का खतरा
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानी UNEP की 2 सितंबर 2026 को जारी Limiting Overshoot रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि आने वाले कुछ वर्षों में 1.5°C की सीमा को पार कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक 1.5°C से ऊपर जाने के साथ अत्यधिक मौसम, ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र स्तर बढ़ने और पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव जैसे जोखिम बढ़ते जाएंगे। हालांकि UNEP ने यह भी स्पष्ट किया है कि तेज और लगातार उत्सर्जन कटौती के जरिए तापमान के ओवरशूट को सीमित करना और बाद में इसे फिर 1.5°C से नीचे लाना अभी भी संभव है।
मजबूत El Niño से मौसम पर असर
प्रशांत महासागर में El Niño की स्थिति अब मजबूत हो रही है और वैज्ञानिक आकलनों में इसे आने वाले महीनों में बेहद मजबूत घटना बनने की संभावना जताई गई है। Copernicus के अनुसार अगस्त में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के समुद्री सतह तापमान में रिकॉर्ड स्तर की गर्मी दर्ज हुई और El Niño के और मजबूत होने के संकेत मिले हैं। WMO ने भी कहा है कि इसका प्रभाव बारिश और तापमान के पैटर्न पर 2027 तक पड़ सकता है। हालांकि “Super El Niño” की तीव्रता और उसके अंतिम प्रभावों को लेकर पूर्वानुमान में अनिश्चितता बनी हुई है।







