नेताओं के खिलाफ FIR की याचिकाएं खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में कई नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ ने याचिकाओं के एक समूह पर यह फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों को दिल्ली दंगों से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।
अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा समेत नेताओं के नाम
शेख मुजतबा फारूक की ओर से दायर याचिकाओं में बीजेपी नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों की वजह से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के। इन दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत होने का उल्लेख याचिका से जुड़ी रिपोर्ट में किया गया है।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं का भी जिक्र
लॉयर्स वॉइस की ओर से दायर एक अन्य याचिका में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया और असदुद्दीन ओवैसी सहित कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई थी। इस याचिका में एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीश के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई थी। अदालत ने संबंधित याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया।
दंगों में पुलिस की भूमिका की जांच की मांग भी खारिज
बृंदा करात और जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली दंगों में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की मांग की थी। इसके अलावा CAA विरोधी प्रदर्शनों को लेकर कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश और विदेशी फंडिंग की जांच के लिए NIA जांच की मांग वाली याचिका भी दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने इन मांगों से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
जामिया मामले में SIT जांच की मांग भी खारिज
याचिकाओं के एक अन्य समूह में 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने इस मांग से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। इस तरह अदालत के फैसले में दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भाषणों, पुलिस की भूमिका और जामिया की पुलिस कार्रवाई से संबंधित विभिन्न जांच मांगों पर फैसला शामिल रहा।
हाई कोर्ट के फैसले से याचिकाओं पर विराम
दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और विभिन्न जांच एजेंसियों से जांच कराने की मांग करने वाली इन याचिकाओं पर फिलहाल हाई कोर्ट स्तर पर कार्यवाही समाप्त हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया है और मामले से जुड़े आरोपों पर कोई अलग से दोषसिद्धि का निष्कर्ष इस आदेश के आधार पर नहीं बताया गया है।







