अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर 2026 को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act 2026 को 262-159 वोट से पारित किया। इस कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ प्रमुख देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन समेत कुछ बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इसके दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, बिल के पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया है। प्रस्तावित प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को परिस्थितियों के अनुसार अधिकतम 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता बताया
भारत के विदेश मंत्रालय ने 17 सितंबर को अमेरिकी कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार भारत बदलती वैश्विक परिस्थितियों और बाजार की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा की खरीद जारी रखेगा। सरकार ने संकेत दिया है कि ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आयात संबंधी फैसले लिए जाएंगे। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके ऊर्जा हितों को किसी एक स्रोत या देश तक सीमित नहीं किया जाएगा।
अमेरिका के साथ उच्च स्तर पर चर्चा
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस मुद्दे पर पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अमेरिकी पक्ष के सामने इस कानून के संभावित प्रभावों को स्पष्ट रूप से रखा है। इनमें भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित असर भी शामिल हैं। भारत ने कहा है कि वह पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहा है और आगे होने वाले विकास के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया तय करेगा।







