Home राजनीति BJP Expansion Under Modi: भाजपा का नया एजेंडा: हिंदुत्व, राष्ट्रीयता और तकनीकी...

BJP Expansion Under Modi: भाजपा का नया एजेंडा: हिंदुत्व, राष्ट्रीयता और तकनीकी विकास पर तेज़ धक्का

नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2025 को अपने जीवन के 75 वर्ष पूरे किए। गुजरात से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर संगठन के एक कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। 1987 में अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में संगठन की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण दौर शुरू हुआ।

 

 

2014 के बाद भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति

2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख चेहरा बने। इसके बाद पार्टी की चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और राजनीतिक मुद्दों में कई बदलाव देखने को मिले।

 

 

जातीय समीकरणों से आगे बढ़ने की रणनीति

भाजपा लंबे समय तक मुख्य रूप से सवर्ण मतदाताओं से जुड़ी पार्टी के रूप में देखी जाती रही। मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के बीच अपना आधार बढ़ाने पर जोर दिया। नरेंद्र मोदी स्वयं गुजरात के ओबीसी समुदाय से आते हैं।

 

 

अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच

विकास और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े लाभार्थी वर्ग को राजनीतिक आधार बनाने के साथ भाजपा ने अलग-अलग सामाजिक समूहों को संगठन में जोड़ने की रणनीति अपनाई। पार्टी की ओर से पसमांदा और बोहरा मुस्लिम समुदायों तक पहुंच बनाने की कोशिश भी की गई।

 

 

सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति

इस बदलाव को भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति का हिस्सा माना गया, जिसमें अलग-अलग जातीय समूहों को पार्टी और सरकार के स्तर पर प्रतिनिधित्व देने पर जोर रहा।

 

 

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर जोर

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रमुख हुए। अनुच्छेद 370 में बदलाव, जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन, तीन तलाक पर कानून और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण जैसे मुद्दे भाजपा के प्रमुख वैचारिक एजेंडे में रहे।

 

 

राम मंदिर और राष्ट्रीय सुरक्षा

राम मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही। इसी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी भाजपा की राजनीति में प्रमुख स्थान मिला। उरी और पुलवामा के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे सैन्य अभियानों को सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया।

 

 

सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी परियोजनाएं

राष्ट्रवाद को सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने वाली कई परियोजनाएं भी इस दौर में सामने आईं। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना, नौसेना के ध्वज में बदलाव और छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा को शामिल करना इसके उदाहरण हैं। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ क्षेत्र के विकास पर भी सरकार ने जोर दिया।