Home सामाजिक ग्लेशियर से तबाही का दावा: नेपाल बाढ़ पर चीन का पलटवार

ग्लेशियर से तबाही का दावा: नेपाल बाढ़ पर चीन का पलटवार

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नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड और जलप्रलय के बाद अब समय पर चेतावनी को लेकर चीन और नेपाल के बीच विवाद सामने आया है। चीन का दावा है कि उसने भारी बारिश और अचानक बाढ़ के खतरे को लेकर नेपाल को पहले ही चेतावनी भेज दी थी। चीनी पक्ष के मुताबिक वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर के माध्यम से मौसम संबंधी पूर्वानुमान नेपाली अधिकारियों तक पहुंचाए गए थे। दूसरी ओर नेपाल की आपदा एजेंसियां सवाल उठा रही हैं कि उन्हें आपदा से ठीक पहले पर्याप्त रियल टाइम जानकारी क्यों नहीं मिली। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर सामने आया है।

चीन का दावा 12 दिन पहले भेजा था अलर्ट
चीनी दूतावास का कहना है कि वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने 12 दिन पहले ही नेपाल के अधिकारियों को भारी मानसूनी बारिश और फ्लैश फ्लड की संभावना को लेकर ईमेल भेजा था। चीन के अनुसार यह चेतावनी 14 से 19 अगस्त के मौसम पूर्वानुमान से संबंधित थी और इसमें अत्यधिक बारिश के खतरे का उल्लेख किया गया था। चीनी अधिकारियों का यह भी कहना है कि करीब एक महीने पहले से ही WeChat और ईमेल के जरिए नेपाल के साथ मौसम संबंधी जानकारी साझा की जा रही थी। चीन ने इसी आधार पर समय पर चेतावनी नहीं देने के आरोपों को खारिज किया है।

नेपाल ने रियल टाइम डेटा पर उठाए सवाल
नेपाल के जलविज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य मौसम पूर्वानुमान और आपदा से ठीक पहले मिलने वाले रियल टाइम अलर्ट में बड़ा अंतर है। नेपाली पक्ष के मुताबिक उन्हें सीमा पार पानी के बहाव और अचानक आई बाढ़ की ऐसी लाइव जानकारी नहीं मिली, जिससे प्रभावित इलाकों को समय रहते खाली कराया जा सके। नेपाल का कहना है कि 26 अगस्त की सुबह अचानक आई बाढ़ ने निगरानी व्यवस्था को भी प्रभावित किया और पानी तेजी से त्रिशूली नदी की ओर पहुंच गया। इसी वजह से नेपाल में यह सवाल उठ रहा है कि यदि सीमा पार से तत्काल डेटा साझा किया जाता तो नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था या नहीं।