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Myanmar Airstrike: म्यांमार में हवाई हमले में 33 लोगों की मौत

क्यौकटाव में हवाई हमला
म्यांमार के युद्धग्रस्त रखाइन राज्य के क्यौकटाव शहर में बाजार के पास हुए हवाई हमले में कम से कम 33 लोगों की मौत और 36 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। रॉयटर्स के अनुसार यह आंकड़ा अराकान आर्मी और स्थानीय सहायता कर्मी की ओर से बताया गया है।

 

 

अराकान आर्मी का दावा
सेना से संघर्ष कर रहे अराकान आर्मी ने हमले के लिए म्यांमार सेना को जिम्मेदार बताया है। स्थानीय सहायता कर्मी वाई हुन आंग की टीम ने भी हताहतों की संख्या की पुष्टि की है।

 

 

रखाइन में जारी संघर्ष
रखाइन राज्य में अराकान आर्मी और म्यांमार सेना के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। क्यौकटाव सहित कई इलाकों में हाल के दिनों में हवाई हमलों की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं।

 

 

सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई
रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार सरकार के प्रवक्ता ने हमले पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया। सरकार पहले यह कहती रही है कि सेना नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए सावधानी बरतती है।

 

 

नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता
क्यौकटाव में बाजार के पास हुई घटना ने संघर्ष वाले क्षेत्रों में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हमले में मारे गए और घायल हुए लोगों की संख्या स्थानीय स्रोतों के आधार पर सामने आई है और स्वतंत्र रूप से सभी विवरणों की पुष्टि नहीं हुई है।

UPI Payment Charges: ₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर MDR का मामला

₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने नए MDR ढांचे पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से जवाब मांगा है।

 

चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले में केंद्र और संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि मामला काफी हद तक तकनीकी प्रकृति का है और MDR की कानूनी प्रकृति तथा इसके संचालन के आधार को हलफनामे के माध्यम से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

 

15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR फ्रेमवर्क
केंद्र सरकार द्वारा घोषित नए ढांचे के अनुसार, सामान्य श्रेणी के चुनिंदा P2M UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।

 

P2P UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं
सरकार के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांसफर पर राशि की कोई सीमा नहीं होगी और ऐसे लेनदेन पर MDR लागू नहीं किया जाएगा। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए निर्धारित जीरो-MDR श्रेणियों में आने वाले लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार का कहना है कि करीब 96% P2M लेनदेन नए बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

 

MDR ग्राहक से अलग से वसूलने का प्रावधान नहीं
केंद्र सरकार के मुताबिक MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लगाया जाने वाला चार्ज है और इसे ग्राहक से अलग शुल्क के रूप में वसूलने का प्रावधान नहीं है। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि मर्चेंट इस लागत को ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने से रोका गया है।

 

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR व्यवस्था
नए फ्रेमवर्क में कम मार्जिन वाले कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग दर निर्धारित की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR की व्यवस्था है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन है।

 

याचिका में क्या चुनौती दी गई है?
एडवोकेट अंजन दत्ता द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है। याचिका में Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत बनाए गए नए ढांचे की वैधानिकता, पारदर्शिता और इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए अलग-अलग शुल्क व्यवस्था को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

 

फिलहाल 15 अक्टूबर की समयसीमा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक से इनकार किए जाने के बाद फिलहाल 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित MDR व्यवस्था लागू होने की समयसीमा बरकरार है। हालांकि, अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई और केंद्र, RBI तथा NPCI की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाबों पर निर्भर करेगी। अदालत अब इस व्यवस्था के कानूनी आधार और MDR की प्रकृति से जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई करेगी।

India Reaches Semifinal: बारिश से मैच रद्द, सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

बारिश के कारण मैच रद्द
एशियन गेम्स 2026 में भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा क्वार्टर फाइनल बारिश के कारण रद्द हो गया। कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में मैदान गीला होने के कारण मैच शुरू नहीं हो सका।

 

भारत सेमीफाइनल में पहुंचा
मैच रद्द होने के बाद भारत ने सीधे सेमीफाइनल में जगह बना ली। एशियन गेम्स के नॉकआउट मुकाबलों में मैच रद्द होने की स्थिति में बेहतर अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग वाली टीम को अगले दौर में प्रवेश मिलता है।

 

रैंकिंग बनी भारत के लिए आधार
भारत टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग में अफगानिस्तान से ऊपर है। इसी नियम के तहत भारत को सेमीफाइनल का स्थान मिला, जबकि अफगानिस्तान का अभियान क्वार्टर फाइनल में समाप्त हो गया।

 

पाकिस्तान को भी मिला फायदा
भारत से पहले पाकिस्तान और हांगकांग के बीच पहला क्वार्टर फाइनल भी बारिश के कारण रद्द हुआ। बेहतर रैंकिंग होने के कारण पाकिस्तान को भी सेमीफाइनल में प्रवेश मिल गया।

 

अब सेमीफाइनल पर नजर
लगातार बारिश के कारण क्वार्टर फाइनल मुकाबलों के रद्द होने से नॉकआउट चरण का समीकरण प्रभावित हुआ है। अब भारत और पाकिस्तान दोनों सेमीफाइनल में अपने अगले मुकाबले का इंतजार करेंगे।

India Enters Semifinal: बारिश के कारण भारत-अफगानिस्तान मैच रद्द

बारिश के कारण मैच रद्द
एशियन गेम्स 2026 के क्वार्टर फाइनल में भारत और अफगानिस्तान के बीच मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया। मैदान गीला होने के कारण मैच शुरू नहीं हो सका और बिना एक भी गेंद फेंके मुकाबला समाप्त कर दिया गया।

 

भारत सेमीफाइनल में पहुंचा
मैच रद्द होने के बाद भारत ने सेमीफाइनल में जगह बना ली। एशियन गेम्स के नियमों के अनुसार बारिश के कारण नॉकआउट मुकाबला रद्द होने पर बेहतर रैंकिंग वाली टीम को अगले दौर में प्रवेश मिलता है।

 

रैंकिंग से मिला फायदा
भारत टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग में पहले स्थान पर है, जबकि अफगानिस्तान 10वें स्थान पर है। इसी वजह से भारत को सेमीफाइनल में प्रवेश मिला।

 

पाकिस्तान का मैच भी रद्द
भारत-अफगानिस्तान मुकाबले से पहले पाकिस्तान और हांगकांग के बीच क्वार्टर फाइनल भी बारिश के कारण रद्द हुआ था। बेहतर रैंकिंग के आधार पर पाकिस्तान को भी सेमीफाइनल में जगह मिली।

 

भारत का अभियान जारी
टीम इंडिया सीधे क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी और अफगानिस्तान के खिलाफ मैच रद्द होने के बाद अब सेमीफाइनल में पहुंच गई है। टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर कर रहे हैं।

Cornell Assault Case Reopened: कॉर्नेल यूनिवर्सिटी मामले की जांच फिर शुरू

2024 के मामले की जांच फिर शुरू
अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से जुड़े 2024 के कथित यौन उत्पीड़न मामले की आपराधिक जांच दोबारा शुरू की गई है। टॉम्पकिंस काउंटी के अभियोजक ने कहा है कि नए सिरे से उपलब्ध जानकारी की समीक्षा की जा रही है।

 

सात छात्रों पर आरोप
एक पूर्व छात्रा ने अपनी सिविल याचिका में कॉर्नेल के सात वर्तमान और पूर्व छात्रों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। मामले में छात्रा की पहचान अदालत के दस्तावेजों में Jane Doe के रूप में की गई है। आरोपों की पुष्टि अदालत के अंतिम फैसले से अभी नहीं हुई है।

 

यूनिवर्सिटी पर भी मुकदमा
पूर्व छात्रा ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और संबंधित फ्रेटरनिटी संगठनों के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया है। याचिका में यूनिवर्सिटी पर छात्रों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।

 

पहले नहीं मिला था पर्याप्त सबूत
टॉम्पकिंस काउंटी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के कार्यालय ने पहले कहा था कि पुलिस जांच की समीक्षा के बाद आपराधिक आरोप लगाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे। अब सिविल मुकदमे में सामने आई नई जानकारी के बाद मामले की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

 

कॉर्नेल ने जांच की जानकारी दी
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उसके संबंधित कार्यालयों ने विश्वविद्यालय की नीतियों के अनुसार मामले की जांच की थी। यूनिवर्सिटी ने छात्र गोपनीयता कानूनों का हवाला देते हुए व्यक्तिगत छात्रों पर हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया है।

 

आपराधिक कार्रवाई पर अभी फैसला नहीं
अभियोजक ने कहा है कि मामले की समीक्षा जारी है और फिलहाल यह तय नहीं किया गया है कि किसी आरोपी के खिलाफ आपराधिक आरोप लगाए जाएंगे या नहीं। मामले की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

Lata Mangeshkar Jayanti: लता मंगेशकर की 97वीं जयंती पर पीएम मोदी ने किया नमन

लता मंगेशकर की 97वीं जयंती
महान गायिका लता मंगेशकर की 97वीं जयंती 28 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इसकी पुष्टि की है।

 

पीएम मोदी ने किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लता मंगेशकर को उनकी जयंती पर नमन किया। उन्होंने कहा कि लता दीदी ने अपनी गायन प्रतिभा से दुनियाभर में भारत का नाम रोशन किया और भारतीय संगीत जगत में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

 

संगीत जगत में योगदान
लता मंगेशकर ने भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में कई दशकों तक अपनी आवाज का योगदान दिया। उनके गाए गीतों ने उन्हें भारतीय संगीत की प्रमुख हस्तियों में स्थान दिलाया।

 

जयंती पर याद कर रहे प्रशंसक
लता मंगेशकर की जयंती के अवसर पर उनके प्रशंसक और संगीत प्रेमी उन्हें याद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके संगीत और करियर से जुड़ी यादें साझा की जा रही हैं।

 

पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लता मंगेशकर के योगदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मरणीय बताया। आधिकारिक पीएम इंडिया वेबसाइट पर भी 28 सितंबर 2026 को उनकी जयंती पर प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि प्रकाशित की गई है।

TMC Election Symbol: सुप्रीम कोर्ट का TMC नाम-सिंबल विवाद पर बड़ा निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर दो विरोधी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर अहम निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग को मामले का अंतिम फैसला तय समयसीमा में करने का निर्देश दिया है।

 

चुनाव आयोग को तीन महीने में करना होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, दोनों पक्षों को पहले चार सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें, जवाब और आवश्यक साक्ष्य पूरे करने होंगे। इसके बाद चुनाव आयोग को विवाद पर तीन महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना होगा। अदालत ने इस मामले को अनिश्चित समय तक लंबित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से निपटाने की दिशा तय की है।

 

ममता बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत TMC के मूल नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। चुनाव आयोग ने यह अंतरिम व्यवस्था पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद के चलते की थी।

 

दोनों गुटों को दिए गए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों के मद्देनजर दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

 

6 अक्टूबर के उपचुनावों पर भी विवाद का असर
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत इन चुनावों में दोनों गुट अपने-अपने आवंटित नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करेंगे, जबकि मूल पार्टी नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न को लेकर अंतिम फैसला बाद की प्रक्रिया में होगा।

 

अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के निर्देश के बाद विवाद के निपटारे के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो गई है। पहले दोनों गुटों को अपनी दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद चुनाव आयोग को निर्धारित तीन महीने की अवधि में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना फैसला करना होगा।

Vrindavan Suicide Case: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। शुक्रवार सुबह आश्रम से जुड़ी एक चार मंजिला इमारत की छत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना था, लेकिन घटनास्थल से मिले कुछ साक्ष्यों और परिस्थितियों के चलते पुलिस अब मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है।

 

चौथी मंजिल से गिरने का CCTV फुटेज सामने आया
पुलिस ने उस अपार्टमेंट में लगे CCTV कैमरों की DVR को कब्जे में लिया है, जहां रसिक दुलारी शरण रहते थे। जांच में सामने आया है कि CCTV फुटेज में वह इमारत की चौथी मंजिल की छत से नीचे गिरते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, घटना से पहले छत या कमरे में उनके साथ कौन-कौन मौजूद था और घटनाक्रम किस तरह हुआ, इसे लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।

 

कमरे से ग्राइंडर मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस के अनुसार, मृतक के कमरे से टाइल्स काटने वाला ग्राइंडर मिला है, जिस पर खून के निशान बताए गए हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह उपकरण कमरे में कब से था और वहां इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। घटनास्थल से मिले सामान को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है।

 

शरीर पर चोटों और अत्यधिक रक्तश्राव की जांच
पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मृतक के शरीर पर कई चोटें पाई गईं और अत्यधिक रक्तश्राव को मृत्यु का प्रमुख कारण बताया गया है। सिर, हाथ, पैर और कंधे सहित शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर चोटों की बात सामने आई है। पुलिस इन चोटों को घटनाक्रम से जोड़कर जांच कर रही है।

 

प्राइवेट पार्ट पर चोट को लेकर पुलिस तलाश रही जवाब
मामले में सबसे अहम सवाल मृतक के प्राइवेट पार्ट पर चोट और खून के निशान को लेकर सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह चोट किस परिस्थिति में लगी। इसी कारण जांच केवल छत से गिरने की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे पहले कमरे में क्या हुआ, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

 

मृतक के साथ रहने वाले व्यक्ति से भी पूछताछ
पुलिस के अनुसार, रसिक दुलारी शरण जिस फ्लैट में रहते थे, वहां उनके साथ एक अन्य व्यक्ति भी रहता था। पुलिस ने उससे पूछताछ की है। इसके अलावा अपार्टमेंट में रहने वाले अन्य साधकों से भी अलग-अलग जानकारी ली जा रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझा जा सके।

 

मोबाइल और खून के नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेजे
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन और खून के नमूने भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल से मिलने वाले डेटा, चैट, फोटो या अन्य डिजिटल जानकारी से घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या घटना से पहले फोन से कोई डेटा डिलीट किया गया था।

 

सुसाइड नोट नहीं मिला, पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच
पुलिस के अनुसार मौके से अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में आत्महत्या के कारणों को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मृतक ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया और घटना से पहले उनकी स्थिति क्या थी।

 

ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई आश्रम और आसपास की स्थिति
घटना के बाद न्यूज18 इंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में उस चार मंजिला इमारत को भी दिखाया गया, जहां से रसिक दुलारी शरण नीचे गिरे थे। आसपास रहने वाले लोगों से भी बातचीत की गई। हालांकि, आश्रम और आसपास रहने वाले कई लोगों ने घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी होने से इनकार किया और जांच पर टिप्पणी करने से बचते नजर आए।

 

पुलिस अधिकारी बोले- सभी पहलुओं की जांच जारी
जांच कर रहे CO संदीप कुमार सिंह के अनुसार, पुलिस को सर्वोदय अस्पताल में एक व्यक्ति के घायल अवस्था में पहुंचने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि रसिक दुलारी शरण आश्रम से जुड़े स्थान पर रहते थे और चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनकी मौत हुई। अधिकारी के मुताबिक शुरुआत में मामला आत्महत्या जैसा प्रतीत हुआ था, लेकिन फोरेंसिक टीम को बुलाकर घटनास्थल से मिले सभी साक्ष्यों को कब्जे में लिया गया है और जांच जारी है।

 

फिलहाल मौत की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं
रसिक दुलारी शरण की मौत को लेकर फिलहाल पुलिस की जांच पूरी नहीं हुई है। CCTV फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम निष्कर्ष, मोबाइल डेटा और प्रत्यक्ष अथवा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस घटना की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मौत केवल आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति भी थी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

Bhopal Electric Shock: भोपाल में करंट से भाजपा युवा मोर्चा नेता की मौत

भोपाल के एमपी नगर इलाके में रविवार रात एक दर्दनाक हादसे में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री और अधिवक्ता दिव्यऋषि तिवारी की करंट लगने से मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह परिवार के साथ डीबी मॉल में खरीदारी करने पहुंचे थे। खरीदारी के बाद परिवार सड़क पार कर रहा था, इसी दौरान उन्होंने सहारे के लिए डिवाइडर के पास लगे स्ट्रीट लाइट के पोल को हाथ लगाया। पोल में करंट प्रवाहित होने की बात सामने आई है।

 

पोल के संपर्क में आते ही लगा करंट
जानकारी के मुताबिक, दिव्यऋषि तिवारी ने जैसे ही पोल को पकड़ा, उन्हें तेज बिजली का झटका लगा और वह मौके पर गिर पड़े। कुछ रिपोर्ट्स में पोल से तार निकला होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पोल में करंट आने की वास्तविक वजह क्या थी, यह पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

पत्नी भी आईं करंट की चपेट में
हादसे के समय दिव्यऋषि तिवारी की पत्नी भी उनके साथ थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह भी करंट की चपेट में आईं, लेकिन समय रहते खुद को पोल के संपर्क से अलग करने में सफल रहीं। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने बचाव का प्रयास शुरू किया।

 

ट्रैफिक पुलिस ने दिया CPR, AIIMS में मृत घोषित
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी मदद के लिए पहुंचे। ट्रैफिक हेड कांस्टेबल जगदीश दांगी समेत पुलिसकर्मियों ने दिव्यऋषि को CPR देकर बचाने का प्रयास किया। उन्हें पहले अस्पताल ले जाया गया और बाद में AIIMS भोपाल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

पोल से निकले तार को कराया गया अलग
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, पोल से निकले तार को अलग करवाया गया ताकि वहां मौजूद लोगों के लिए तत्काल खतरा कम किया जा सके। शुरुआती जानकारी में इस पोल के किसी निर्माण या सार्वजनिक परियोजना से जुड़े होने की बात भी सामने आई है, लेकिन संबंधित विभाग या एजेंसी की जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

पहले शिकायतों के दावे की भी होगी जांच
हादसे के बाद स्ट्रीट लाइट पोल और विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि पोल में करंट की समस्या को लेकर पहले शिकायतें की गई थीं। हालांकि, शिकायतों की तारीख, शिकायत संख्या, संबंधित विभाग और उन पर हुई कार्रवाई की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि वास्तव में पहले कोई शिकायत दर्ज हुई थी या नहीं।

 

पोल में करंट कैसे आया, जांच में सामने आएगी वजह
एमपी नगर पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पोल में करंट आने की वजह और विद्युत व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच में पोल की वायरिंग, खुले तार, बिजली कनेक्शन, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी जैसे बिंदु महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल किसी व्यक्ति या विभाग को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया नहीं गया है।

 

व्यस्त इलाके में हादसे ने सार्वजनिक विद्युत सुरक्षा पर उठाए सवाल
डीबी मॉल और एमपी नगर का क्षेत्र लगातार लोगों की आवाजाही वाला इलाका है। ऐसे स्थान पर सार्वजनिक स्ट्रीट लाइट पोल में करंट आने की घटना ने विद्युत सुरक्षा और नियमित रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि पोल में करंट आने की वास्तविक वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।

Ujjain Shahi Masjid: उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर विवाद

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर शाही मस्जिद से जुड़ा विवाद सामने आया है। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना के तहत शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा प्रभावित हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, पूरी मस्जिद को नहीं हटाया जाना है, बल्कि सड़क के तय अलाइनमेंट में आने वाले हिस्से को हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित है।

 

रविवार रात बड़ी संख्या में जुटे लोग
मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाए जाने की सूचना के बाद रविवार रात बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौके पर पहुंच गए। विरोध को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समाज के लोगों और धर्मगुरुओं से बातचीत शुरू की।

 

प्रशासन और शहर काजी के बीच बनी सहमति
रविवार रात प्रशासन और शहर काजी खलिकुर्ररेहमान के बीच बातचीत के बाद प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रशासन की मशीनों से सीधे कार्रवाई करने के बजाय मस्जिद से जुड़े लोगों द्वारा सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले हिस्से को हटाने पर सहमति बनी।

 

सुबह फिर बढ़ा विरोध और पथराव की स्थिति
सोमवार सुबह प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के दौरान विरोध करने वाला दूसरा समूह भी मौके पर पहुंच गया। इसके बाद भीड़ बढ़ने लगी और पुलिस बैरिकेडिंग के पास तनाव की स्थिति बनी। पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने का प्रयास किया, जिसके बाद पथराव की स्थिति बनी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और स्थिति संभालने की कोशिश की।

 

कार्रवाई सिर्फ प्रभावित हिस्से तक सीमित
इस पूरे विवाद में प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए पूरी शाही मस्जिद को हटाने की कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रस्तावित कार्रवाई केवल उस हिस्से से जुड़ी है, जो 15 मीटर सड़क के निर्धारित अलाइनमेंट में आ रहा है। इसमें नमाज पढ़ने की जगह का एक हिस्सा और अन्य संरचनाओं के प्रभावित हिस्से शामिल बताए गए हैं।

 

सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का हवाला
प्रशासन की ओर से सड़क चौड़ीकरण को सिंहस्थ 2028 के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और यातायात व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसी मार्ग पर अन्य धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्सों को भी हटाया गया है। करीब 900 मीटर लंबे मार्ग पर कई धार्मिक स्थल सड़क चौड़ीकरण की जद में आने की बात सामने आई है।

 

मस्जिद से जुड़े लोगों ने उठाए वैकल्पिक विकल्पों के सवाल
मस्जिद से जुड़े लोगों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि आसपास के दुकानों और अन्य हिस्सों को पहले ही सड़क चौड़ीकरण के लिए दिया जा चुका है। उनका कहना है कि मस्जिद के हिस्से को हटाने के बजाय सड़क के अलाइनमेंट में बदलाव जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि निर्धारित सड़क चौड़ाई और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए प्रभावित निर्माण हटाना आवश्यक है।

 

ओवैसी ने भी दी प्रतिक्रिया
विवाद के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उन्होंने विरोध कर रहे लोगों के तरीके का उल्लेख करते हुए कहा कि मस्जिदों को इस तरह नहीं हटाया जा सकता। उनका बयान इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक चर्चा का भी हिस्सा बना।

 

बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात
स्थिति को देखते हुए उज्जैन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन की कोशिश स्थिति को नियंत्रित रखने और सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी कार्रवाई को आगे बढ़ाने की है।

 

हाईकोर्ट में भी मामला पहुंचा
शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के खिलाफ याचिकाएं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी दायर की गई थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 9 सितंबर को हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद सड़क चौड़ीकरण से संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता आगे बढ़ा।
उज्जैन में फिलहाल विवाद का केंद्र सड़क चौड़ीकरण, शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई और इस मुद्दे पर सामने आए अलग-अलग पक्ष हैं। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था जारी रखी गई है।