PM मोदी के संवाद का अलग अंदाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। 2026 में वे 76 वर्ष के हो गए हैं। 2024 में उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उनका संवाद करने का तरीका भी चर्चा में रहा है—युवाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिएटर इकोसिस्टम से लेकर छात्रों के साथ संवाद तथा रेडियो कार्यक्रमों तक।
युवाओं तक डिजिटल माध्यम से पहुंच
Gen-Z के साथ संवाद में सोशल मीडिया और डिजिटल विषयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप और डिजिटल क्रिएटर्स जैसे विषयों पर युवाओं से बातचीत करते रहे हैं। 2024 में नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड की शुरुआत भी डिजिटल क्रिएटर समुदाय को पहचान देने की पहल के रूप में हुई। इसमें स्टोरीटेलिंग, सामाजिक बदलाव, शिक्षा, गेमिंग और पर्यावरण समेत 20 से ज्यादा श्रेणियों में डिजिटल क्रिएटर्स को सम्मानित करने का प्रावधान था।
‘परीक्षा पे चर्चा’ से छात्रों से संवाद
छात्रों से सीधे संवाद के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’ एक प्रमुख कार्यक्रम बन चुका है। इसमें प्रधानमंत्री छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों से भी परीक्षा, तनाव, आत्मविश्वास और पढ़ाई से जुड़े विषयों पर बातचीत करते हैं। 2026 के संस्करण में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल 4,50,13,379 प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया था। इनमें 4.19 करोड़ से अधिक छात्र, 24.84 लाख से ज्यादा शिक्षक और करीब 6.15 लाख अभिभावक शामिल थे। कार्यक्रम में छात्रों के सवाल लिए जाते हैं और पढ़ाई के साथ खेल, आराम, कौशल तथा रुचियों के संतुलन जैसे विषयों पर भी चर्चा होती है।
महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर फोकस
महिलाओं से जुड़ी योजनाएं और मुद्दे भी प्रधानमंत्री के सार्वजनिक संवाद का हिस्सा रहे हैं। स्वच्छता, घरों में शौचालय, उज्ज्वला योजना, महिला स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी पहलों का उल्लेख उनके भाषणों और सरकारी कार्यक्रमों में होता रहा है। इन पहलों के जरिए महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं, घरेलू जीवन, आय और आर्थिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में जगह मिली है।







