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Telangana Assembly: तेलंगाना विधानसभा में DA एरियर मुद्दे पर भाजपा ने स्थगन प्रस्ताव दायर

तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र में सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते यानी DA एरियर का मुद्दा उठाया गया। भाजपा विधायकों ने इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। निर्मल से भाजपा विधायक अलेटी महेश्वर रेड्डी, पालवई हरीश बाबू और पायल शंकर समेत अन्य भाजपा विधायकों ने कर्मचारियों के लंबित बकाये को महत्वपूर्ण जनहित का मुद्दा बताते हुए सदन में चर्चा की मांग की। भाजपा का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े इस वित्तीय मुद्दे पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस प्रस्ताव के जरिए भाजपा ने विधानसभा की निर्धारित कार्यवाही रोककर DA एरियर पर तत्काल चर्चा कराने की मांग रखी।

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाये पर BJP का जोर
भाजपा विधायकों का कहना है कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का DA तथा उससे जुड़े एरियर लंबित हैं और इस वजह से कर्मचारियों के बीच असंतोष है। पार्टी ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाकर सरकार से बकाये की स्थिति और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग की है। भाजपा नेताओं ने इसे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से सीधे जुड़ा आर्थिक मुद्दा बताया है। स्थगन प्रस्ताव का उद्देश्य सामान्य कार्यवाही के बजाय इस विषय पर तत्काल सदन में चर्चा कराना है। हालांकि सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम रूप से क्या निर्णय लिया गया और DA एरियर के भुगतान को लेकर क्या समयसीमा बताई गई, इसकी तस्वीर आगे की सदन की कार्यवाही से स्पष्ट होगी। फिलहाल भाजपा की ओर से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।

महेश्वर रेड्डी, हरीश बाबू और पायल शंकर ने उठाई आवाज
DA एरियर को लेकर स्थगन प्रस्ताव भाजपा के प्रमुख विधायकों की ओर से सामने आया है। निर्मल विधायक अलेटी महेश्वर रेड्डी, सिरपुर विधायक पालवई हरीश बाबू और आदिलाबाद विधायक पायल शंकर भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित बकाये पर चर्चा की मांग की। तेलंगाना सरकार की आधिकारिक विधानसभा सदस्य सूची में तीनों विधायकों को भाजपा के विधायक के रूप में दर्ज किया गया है। इस प्रस्ताव के जरिए भाजपा ने सरकार पर कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को लेकर जवाब देने का दबाव बढ़ाया है। सदन में इस मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं और सरकार की ओर से क्या जवाब आता है, यह आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण रहेगा।