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Girl Dances On Kaliyo Ka Chaman: ‘Kaliyo Ka Chaman’ पर लड़की का जबरदस्त डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

‘Kaliyo Ka Chaman’ पर डांस वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर एक लड़की का ‘Kaliyo Ka Chaman’ गाने पर डांस वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में लड़की पूरे आत्मविश्वास के साथ गाने की धुन पर डांस करती नजर आ रही है। उसके डांस मूव्स और चेहरे के एक्सप्रेशंस ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा है।

 

डांस स्टेप्स के साथ एक्सप्रेशंस ने जीता दिल
वीडियो में लड़की गाने की धुन के साथ एनर्जेटिक अंदाज में डांस करती दिखाई देती है। खास बात उसके डांस स्टेप्स के साथ एक्सप्रेशंस हैं, जो गाने के मूड के अनुसार बदलते नजर आते हैं। उसकी परफॉर्मेंस में कॉन्फिडेंस और एनर्जी साफ दिखाई देती है, जिसकी वजह से वीडियो देखने वाले यूजर्स इसे पसंद कर रहे हैं।

 

यूजर्स ने की डांस की तारीफ
‘Kaliyo Ka Chaman’ पर पहले भी कई डांस वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ चुके हैं, लेकिन इस वीडियो में लड़की की परफॉर्मेंस ने अलग से ध्यान खींचा है। कई यूजर्स कमेंट सेक्शन में उसके डांस और कॉन्फिडेंस की तारीफ कर रहे हैं। कुछ लोगों ने कहा कि उसके डांस स्टेप्स गाने की धुन के साथ अच्छी तरह मैच कर रहे हैं।

 

इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर हुआ वीडियो
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @dancewithhemlata नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। पोस्ट सामने आने के बाद इसे लगातार देखा और शेयर किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर डांस से जुड़े वीडियो अक्सर तेजी से वायरल होते हैं और यह वीडियो भी यूजर्स के बीच चर्चा में आ गया है।

रांची में चयन का रोमांच: वैभव की एंट्री पर निगाहें

रांची में टीम इंडिया के प्लेइंग-11 पर बड़ा सस्पेंस, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू की चर्चा तेज; संजू सैमसन की जगह पर सवाल IND vs WI T20 | लखनऊ की जीत के बाद अब दूसरे मुकाबले में भारत के पास सीरीज में 2-0 की बढ़त बनाने का मौका

 

भारत और वेस्टइंडीज के बीच जारी पांच मुकाबलों की T20 सीरीज अब रांची पहुंच चुकी है। लखनऊ में खेले गए पहले मैच में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वेस्टइंडीज को 8 विकेट से हराया था। इस जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में बढ़त बनाए हुए है और अब उसकी नजर लगातार दूसरी जीत पर होगी।

 

दूसरी ओर दूसरे मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय प्लेइंग-11 को लेकर है। कुछ खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम संयोजन को देखते हुए रांची में बदलाव की संभावना पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे ज्यादा नजर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन को लेकर है।

भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा T20 मुकाबला 9 अक्टूबर को रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाना है। मैच शाम 7 बजे शुरू होने की जानकारी है, जबकि टॉस करीब 6:30 बजे होगा।

भारत पहले मुकाबले में जीत दर्ज कर चुका है, इसलिए टीम मैनेजमेंट के पास कुछ खिलाड़ियों को आजमाने का विकल्प भी रहेगा। हालांकि जीत के बाद अंतिम एकादश में बदलाव करना हमेशा आसान फैसला नहीं होता।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट फैंस में खास उत्साह बना हुआ है। भारतीय जमीन पर उनके T20 इंटरनेशनल डेब्यू का इंतजार किया जा रहा है।

अगर रांची में उन्हें मौका मिलता है, तो यह युवा बल्लेबाज के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर होगा। खास बात यह है कि वैभव को मौका मिलने की स्थिति में टीम के टॉप ऑर्डर का संयोजन भी बदल सकता है।

इसी वजह से दूसरे T20 से पहले सोशल मीडिया और क्रिकेट चर्चा में वैभव का नाम लगातार प्रमुखता से सामने आ रहा है।

दूसरी तरफ संजू सैमसन को लेकर भी चर्चा तेज है। हाल के मुकाबलों में उनका बल्ला अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार मुकाबलों में उनके नाम केवल 29 रन रहे हैं।

ऐसे में टीम मैनेजमेंट के सामने सवाल यह है कि संजू को एक और अवसर दिया जाए या किसी युवा विकल्प को आजमाया जाए। हालांकि अंतिम फैसला टीम की रणनीति और मैच की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

 

गेंदबाजी संयोजन में भी बदलाव संभव

दूसरे मुकाबले में सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी विभाग में भी फेरबदल की संभावना पर नजर रहेगी।

पहले T20 में मयंक यादव का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक प्रभावी नहीं रहा। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के पास तेज गेंदबाजी संयोजन में बदलाव का विकल्प मौजूद है।

स्पिन विभाग में भी रवि बिश्नोई को मौका देने की चर्चा हो सकती है। वहीं प्रिंस यादव जैसे युवा तेज गेंदबाज भी टीम संयोजन में जगह बनाने के दावेदारों में शामिल हो सकते हैं।

 

 रांची में बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा

JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम की परिस्थितियां बल्लेबाजों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। ऐसे में दोनों टीमों की कोशिश तेज शुरुआत करने और स्कोरबोर्ड पर बड़ा स्कोर खड़ा करने की होगी।

 

भारतीय बल्लेबाज पहले मैच की लय को आगे बढ़ाना चाहेंगे, जबकि वेस्टइंडीज की टीम हार के बाद वापसी करते हुए सीरीज बराबर करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।

🇮🇳 संभावित भारतीय प्लेइंग-111️⃣ अभिषेक शर्मा2️⃣ वैभव सूर्यवंशी

3️⃣ ईशान किशन4️⃣ श्रेयस अय्यर (कप्तान)5️⃣ तिलक वर्मा

6️⃣ शिवम दुबे7️⃣ नीतीश कुमार रेड्डी8️⃣ अक्षर पटेल9️⃣ रवि बिश्नोई🔟 अर्शदीप सिंह1️⃣1️⃣ प्रिंस यादव

 

वैभव पर रहेंगी सबसे ज्यादा निगाहें

अगर वैभव सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में जगह मिलती है तो मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू हो सकता है। युवा बल्लेबाज के सामने खुद को साबित करने के साथ-साथ टीम में लंबे समय के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका रहेगा।

वहीं संजू सैमसन के लिए भी यह दौर महत्वपूर्ण है। यदि उन्हें अंतिम एकादश से बाहर रखा जाता है तो अगले मुकाबलों में वापसी के लिए उन्हें अपने प्रदर्शन के जरिए मजबूत दावा पेश करना होगा।

 

भारत के पास 2-0 की बढ़त का मौका

पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम अब रांची में भी जीत हासिल कर सीरीज पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहेगी। लगातार दो जीत भारत को 5 मैचों की सीरीज में मजबूत स्थिति में पहुंचा देंगी।

वेस्टइंडीज के लिए यह मुकाबला बेहद अहम होगा, क्योंकि हार की स्थिति में उसके सामने सीरीज में वापसी की राह मुश्किल हो जाएगी।

अब फैसला टीम मैनेजमेंट के हाथ में है—रांची में युवा वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका मिलेगा या संजू सैमसन पर भरोसा कायम रहेगा?

क्रिकेट फैंस की नजर अब टॉस से पहले घोषित होने वाली टीम इंडिया की अंतिम एकादश पर टिकी है। 

New Rule For Foreign Income: विदेशी कमाई पर नया नियम, फ्रीलांसर और यूट्यूबर की डॉलर इनकम पर क्या असर?

विदेशी कमाई पर लागू हुई नई व्यवस्था
भारत में बैठकर विदेशी क्लाइंट के लिए सर्विस देने वाले फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, डिजिटल एजेंसियों, सॉफ्टवेयर और आईटी प्रोफेशनल्स तथा डिजाइनर्स के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नई रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू हुई है। सर्विस एक्सपोर्ट के लिए एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म यानी EDF की जरूरत होगी। इसका मतलब यह है कि विदेशी करेंसी में मिलने वाले भुगतान के साथ यह रिकॉर्ड भी स्पष्ट होना चाहिए कि पैसा किस क्लाइंट से और किस सर्विस के बदले मिला है।

 

सर्विस एक्सपोर्ट को आसान उदाहरण से समझें
मान लीजिए दिल्ली में बैठा कोई फ्रीलांसर अमेरिका की एक कंपनी के लिए वेबसाइट डिजाइन करता है और उसे 2,000 डॉलर का भुगतान मिलता है। इस स्थिति में कोई सामान विदेश नहीं भेजा गया, लेकिन भारत से विदेशी क्लाइंट को सर्विस दी गई और उसके बदले विदेशी करेंसी मिली। वेबसाइट डिजाइन, कंसल्टिंग, डिजिटल मार्केटिंग, सॉफ्टवेयर और अन्य प्रोफेशनल सर्विस जैसे काम परिस्थितियों के अनुसार सर्विस एक्सपोर्ट के दायरे में आ सकते हैं।

 

अब इनवॉइस और पेमेंट का रिकॉर्ड जरूरी
नई व्यवस्था के तहत सर्विस एक्सपोर्ट करने वाले व्यक्ति या कारोबार को अपनी सर्विस और उसकी वैल्यू की डिक्लेरेशन करनी होगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी विदेशी क्लाइंट को 2,000 डॉलर का इनवॉइस जारी किया गया है और बैंक खाते में भी 2,000 डॉलर आए हैं, तो रिकॉर्ड में क्लाइंट, सर्विस, इनवॉइस की रकम और प्राप्त भुगतान की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। दी गई जानकारी के मुताबिक, EDF डिक्लेरेशन इनवॉइस जारी होने वाले महीने के खत्म होने के 30 दिन के भीतर करनी होगी। अक्टूबर 2026 के इनवॉइस के लिए पहली डिक्लेरेशन की डेडलाइन 30 नवंबर 2026 होगी।

 

फ्रीलांसर और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स पर असर
विदेशी ग्राहकों के लिए काम करने वाले फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, आईटी और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल, डिजिटल एजेंसियां और डिजाइनर अब अपनी विदेशी कमाई का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित तरीके से रखें। इनवॉइस, कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट, दी गई सर्विस की जानकारी, पेमेंट रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर यह स्पष्ट किया जा सके कि विदेशी करेंसी किस काम के बदले प्राप्त हुई है।

 

यूट्यूबर और इंफ्लुएंसर पर हर मामले में लागू नहीं होगा नियम
विदेश से पैसा मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर यूट्यूबर या इंफ्लुएंसर की आय अपने आप सर्विस एक्सपोर्ट मानी जाएगी। यदि किसी विदेशी ब्रांड या कंपनी को कोई सर्विस दी गई है और उसके बदले भुगतान मिला है, तो वह सर्विस एक्सपोर्ट के दायरे में आ सकती है। वहीं YouTube की एड रेवेन्यू, एफिलिएट इनकम या अन्य डिजिटल आय की प्रकृति अलग हो सकती है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आय किस वजह से हुई और भुगतान किस उद्देश्य से प्राप्त हुआ।

 

यह नया टैक्स नहीं, FEMA कंप्लायंस से जुड़ा बदलाव है
EDF की यह व्यवस्था कोई नया इनकम टैक्स नहीं है। यह फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी FEMA के तहत एक्सपोर्ट और विदेशी करेंसी की रिपोर्टिंग से जुड़ी आवश्यकता है। इसलिए विदेशी क्लाइंट से कमाई करने वालों के लिए सिर्फ इनकम टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड रखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लागू फॉरेन एक्सचेंज नियमों के अनुसार सर्विस एक्सपोर्ट और पेमेंट का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखना होगा।

 

बैंक और एक्सपोर्ट रिपोर्टिंग सिस्टम की भूमिका
EDF की जानकारी ऑथराइज्ड डीलर यानी बैंक के माध्यम से रिपोर्ट की जाती है और एक्सपोर्ट से जुड़ी जानकारी संबंधित एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम में दर्ज होती है। ऐसे में बैंकिंग रिकॉर्ड में विदेशी भुगतान का स्रोत और उसके पीछे मौजूद सर्विस या एक्सपोर्ट की जानकारी स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। विदेशी कमाई करने वालों को इसलिए अपने इनवॉइस और पेमेंट रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी से बचना होगा।

Why Garuda Puran Is Read for 13 Days: मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण के पाठ की है परंपरा

गरुड़ पुराण का पाठ 13 दिनों तक क्यों किया जाता है?

सनातन हिंदू परंपरा में किसी व्यक्ति के निधन के बाद कुछ परिवारों में कई दिनों तक धार्मिक पाठ, प्रार्थना और श्रद्धांजलि की परंपरा निभाई जाती है। इनमें गरुड़ पुराण के पाठ का विशेष उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, कर्मों के फल और सद्गति से जुड़े विषयों को समझाने के लिए गरुड़ पुराण का पाठ किया जाता है। हालांकि आत्मा के 13 दिनों तक घर में रहने जैसी बातें धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।

 

 

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की यात्रा का वर्णन

गरुड़ पुराण में मृत्यु, आत्मा, कर्म, यमलोक, स्वर्ग, नरक और सद्गति जैसे विषयों का विस्तृत धार्मिक वर्णन मिलता है। मान्यता है कि व्यक्ति के कर्म उसकी आगे की गति को प्रभावित करते हैं। इसी कारण मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण का पाठ मृतक और उसके परिजनों को जीवन, कर्म और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़ी शिक्षाएं प्रदान करने वाला माना जाता है।

 

 

13 दिनों तक पाठ कराने के पीछे क्या मान्यता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की आगे की यात्रा को लेकर अलग-अलग धारणाएं मिलती हैं। कुछ परंपराओं में 13 दिनों की अवधि को विशेष माना गया है। इसी दौरान गरुड़ पुराण का पाठ कर मृतक की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए प्रार्थना की जाती है। परिवार के लोग भी इस दौरान धार्मिक चिंतन और कर्मों के महत्व को समझने का प्रयास करते हैं।

 

 

क्या हर आत्मा को दूसरा जन्म लेने में 13 दिन लगते हैं?

धार्मिक ग्रंथों की व्याख्याओं और लोकमान्यताओं में मृत्यु के बाद पुनर्जन्म को लेकर अलग-अलग अवधारणाएं मिलती हैं। कुछ मान्यताओं में तत्काल पुनर्जन्म, कुछ में कुछ दिनों या महीनों और कुछ विशेष परिस्थितियों में अधिक समय लगने की बात कही जाती है। इसलिए इसे एक निश्चित समय-सीमा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये बातें धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के संदर्भ में समझी जाती हैं।

 

 

गरुड़ पुराण में सिर्फ मृत्यु की बातें नहीं

गरुड़ पुराण को केवल मृत्यु और परलोक से जोड़कर देखना अधूरा होगा। इसमें धर्म, नीति, सदाचार, दान, तप, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और कर्म जैसे विषयों पर भी चर्चा मिलती है। इसका उद्देश्य मनुष्य को अच्छे कर्म, संयम और धार्मिक आचरण की ओर प्रेरित करना भी माना जाता है।

 

 

गरुड़ पुराण की कथा कैसे शुरू होती है?

धार्मिक परंपरा के अनुसार गरुड़ ने भगवान विष्णु से जीव की मृत्यु, मृत्यु के बाद की यात्रा, कर्मों के परिणाम और सद्गति से जुड़े कई प्रश्न पूछे थे। भगवान विष्णु द्वारा दिए गए उत्तरों की इसी परंपरा को गरुड़ पुराण के रूप में वर्णित किया जाता है। इसमें जीवन और मृत्यु दोनों से जुड़े आध्यात्मिक प्रश्नों पर विचार मिलता है।

 

 

मृत्यु के बाद पाठ से परिवार को भी मिलता है मानसिक संबल

किसी प्रियजन की मृत्यु परिवार के लिए बेहद कठिन समय होता है। ऐसे समय में धार्मिक पाठ और प्रार्थना परिवार को मानसिक एवं आध्यात्मिक संबल दे सकते हैं। गरुड़ पुराण में आत्मा की नश्वर शरीर से अलग अवधारणा, कर्मों और सदाचार पर दिए गए संदेश शोकाकुल परिजनों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

 

 

गरुड़ पुराण का मुख्य संदेश क्या माना जाता है?

गरुड़ पुराण से जुड़ी धार्मिक व्याख्याओं में अच्छे कर्म, धर्म, दान, संयम, सदाचार और ईश्वर भक्ति को विशेष महत्व दिया गया है। मृत्यु और परलोक के वर्णन के माध्यम से व्यक्ति को यह संदेश देने का प्रयास किया जाता है कि जीवन में किए गए कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए और मानव जीवन का उपयोग अच्छे कार्यों में करना चाहिए।

 

 

धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक तथ्य में अंतर समझना जरूरी

गरुड़ पुराण में आत्मा, पुनर्जन्म और मृत्यु के बाद की यात्रा से जुड़े वर्णन धार्मिक आस्था और शास्त्रीय परंपरा का हिस्सा हैं। आत्मा के 13 दिनों तक किसी घर में रहने या पाठ सुनने मात्र से मोक्ष मिलने जैसी मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में समझना उचित है। इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालु इन्हें अपनी आस्था और धार्मिक परंपरा के अनुसार मानते हैं।

 

 

गरुड़ पुराण क्यों पढ़ना चाहिए?

धार्मिक दृष्टि से गरुड़ पुराण को जीवन और मृत्यु के रहस्यों पर चिंतन कराने वाला ग्रंथ माना जाता है। इसमें व्यक्ति को अपने कर्मों, आचरण और जीवन के उद्देश्य पर विचार करने की प्रेरणा मिलती है। यही कारण है कि इसे केवल मृत्यु के बाद पढ़े जाने वाले ग्रंथ के बजाय जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण ग्रंथ के रूप में भी देखा जाता है।

Kavita Mahato Runs 1600m Barefoot: Home Guard बनने के सपने ने जीता लोगों का दिल

नंगे पांव साड़ी में 1600 मीटर दौड़ीं कविता महतो

झारखंड के रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड की 27 वर्षीय कविता महतो इन दिनों अपने संघर्ष और हिम्मत की कहानी को लेकर चर्चा में हैं। पति के निधन के बाद दो बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी संभाल रहीं कविता ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद Home Guard बनने का अपना सपना नहीं छोड़ा। हाल ही में Home Guard बहाली के ट्रायल में उन्होंने बिना स्पोर्ट्स ड्रेस और रनिंग शूज़ के 1600 मीटर की दौड़ पूरी कर अपनी मेहनत और जज़्बे का परिचय दिया।

 

 

न ट्रैक सूट था, न रनिंग शूज़, फिर भी मैदान में उतरीं

कविता के मुताबिक, ट्रायल के दिन कई अभ्यर्थी स्पोर्ट्स गियर, ट्रैक सूट और रनिंग शूज़ के साथ पहुंचे थे। वहीं उनके पास दौड़ने के लिए उचित जूते तक नहीं थे। आर्थिक तंगी के कारण वह साड़ी पहनकर और खाली पेट ही दौड़ में शामिल हुईं। हालात मुश्किल थे, लेकिन Home Guard बनने की उम्मीद ने उन्हें पीछे हटने नहीं दिया।

 

 

1600 मीटर की दौड़ करीब 6 मिनट 40 सेकंड में पूरी

कविता ने 1600 मीटर की दौड़ लगभग 6 मिनट 40 सेकंड में पूरी की। बताया जा रहा है कि निर्धारित समय 10 मिनट था और इस प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने उत्कृष्ट श्रेणी में जगह बनाई। उनके लिए यह सिर्फ एक शारीरिक परीक्षा नहीं थी, बल्कि अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश भी थी।

 

 

पति के निधन के बाद बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी

कविता के पति दीपक महतो का करीब तीन साल पहले गुजरात में मजदूरी के दौरान बीमारी के चलते निधन हो गया था। परिवार के मुताबिक, इलाज के दौरान काफी खर्च हुआ और करीब 5 से 6 लाख रुपये का कर्ज भी परिवार पर हो गया। पति के निधन के बाद कविता के सामने दो बच्चों के साथ बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी भी आ गई।

 

 

ईंट-भट्ठे से खेतों तक करती हैं मेहनत

परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण कविता अलग-अलग तरह के काम करके घर चलाने में मदद करती हैं। गर्मी के मौसम में ईंट-भट्ठे पर मजदूरी, धान के मौसम में रोपाई और कटाई तथा अन्य घरेलू मजदूरी जैसे कामों में वह परिवार का सहारा बनती हैं। परिवार के पास खेती से जुड़ी जिम्मेदारियां भी हैं, जिनमें वह अपने ससुर का हाथ बंटाती हैं।

 

 

सुबह 4 बजे उठकर बच्चों के साथ करती थीं दौड़ की तैयारी

Home Guard की दौड़ की तैयारी के लिए कविता रोज सुबह करीब 4 बजे उठती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद वह गांव के मैदान में दौड़ का अभ्यास करती थीं। कई बार उनके दोनों बच्चे भी उनके साथ रहते थे। न महंगे उपकरण थे और न ही किसी बड़े प्रशिक्षण संस्थान की सुविधा, लेकिन लक्ष्य को लेकर उनका संकल्प लगातार बना रहा।

 

 

कविता के लिए Home Guard की नौकरी सिर्फ नौकरी नहीं

कविता का कहना है कि वह परिवार को छोड़कर किसी दूर स्थान पर नौकरी करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। ऐसे में उनकी कोशिश है कि यदि उन्हें Home Guard में चयन मिलता है तो घर या आसपास के क्षेत्र में ड्यूटी मिल सके, जिससे परिवार को नियमित आमदनी का सहारा मिल पाए।

 

 

सोशल मीडिया पर कहानी चर्चा में आने के बाद मिली मदद

कविता की संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद उनकी तस्वीर और कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में आई। इसके बाद अंकित रनर एकेडमी से जुड़े अजय करमाली सहित कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात कर उन्हें ट्रैक सूट और रनिंग शूज़ उपलब्ध कराए। इससे अब उन्हें आगे की दौड़ और तैयारी में कुछ सुविधा मिलने की उम्मीद है।

 

 

बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर दौड़ीं कविता

कविता महतो की कहानी उन लोगों के संघर्ष की याद दिलाती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने परिवार और भविष्य के लिए लगातार मेहनत करते हैं। उनके लिए 1600 मीटर की वह दौड़ केवल भर्ती परीक्षा का हिस्सा नहीं थी, बल्कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और परिवार को आर्थिक मजबूती देने की उम्मीद भी थी। अब सभी की नजर उनके आगे के चयन और Home Guard बनने के सपने पर है।

Trump Predicts Iran War End: ट्रंप का दावा- बहुत जल्द खत्म होगा ईरान युद्ध, तेजी से गिरेंगी तेल की कीमतें

ट्रंप ने ईरान युद्ध जल्द खत्म होने का दावा किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। वॉशिंगटन से सैन एंटोनियो में रिपब्लिकन कैंपेन रैली के लिए रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की परमाणु ताकत खत्म कर दी गई है।

 

तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट की भविष्यवाणी
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद तेल की कीमतें भी तेजी से नीचे आएंगी। उनका दावा है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष जल्द समाप्त हो जाएगा और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, तेल की कीमतों में वास्तविक बदलाव युद्ध की स्थिति, आपूर्ति और वैश्विक बाजार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

 

ईरान ने ट्रंप के दावे को बताया झूठा
ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातमेह मोहाजेरानी ने ट्रंप के बयानों को खारिज करते हुए उन्हें झूठा बताया। ट्रंप ने ईरान के तेल मंत्री के अमेरिकी युद्ध के डर से इस्तीफा देने का दावा किया था, जिस पर ईरानी प्रवक्ता ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मंत्री का इस्तीफा कमजोरी की निशानी नहीं बल्कि राजनीतिक व्यवस्था के लचीलेपन का उदाहरण है।

 

ईरान बातचीत से समाधान के लिए तैयार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि उनका देश अपनी रक्षा के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत के जरिए तनाव कम करने का रास्ता भी चाहता है। ईरान ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की बैठक के दौरान अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें तनाव कम करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए सात दिनों की शांति योजना की पेशकश की गई थी।

 

युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में ट्रंप के युद्ध जल्द खत्म होने के दावे और ईरान की बातचीत की पेशकश के बीच आगे होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

PPF NSC SCSS FD Rates: PPF, NSC, SCSS या बैंक FD, कहां मिल रहा सबसे ज्यादा ब्याज?

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें स्थिर
अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोगों के लिए PPF, NSC, SCSS और बैंक FD के बीच तुलना करना जरूरी हो जाता है। मौजूदा दरों के मुताबिक SCSS और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.20 फीसदी, NSC पर 7.70 फीसदी और PPF पर 7.10 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है।

 

SCSS और सुकन्या में 8.20 फीसदी ब्याज
छोटी बचत योजनाओं में फिलहाल सबसे ज्यादा 8.20 फीसदी सालाना ब्याज SCSS और सुकन्या समृद्धि योजना पर मिल रहा है। SCSS वरिष्ठ नागरिकों के लिए है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना पात्र बेटियों के भविष्य के लिए शुरू की जा सकती है। इसके अलावा पोस्ट ऑफिस की 5 साल की टाइम डिपॉजिट पर 7.50 फीसदी और मंथली इनकम स्कीम पर 7.40 फीसदी ब्याज दिया जा रहा है।

 

PPF में 7.10 फीसदी ब्याज और 15 साल की अवधि
PPF में फिलहाल 7.10 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है। इसकी मैच्योरिटी अवधि 15 साल है, इसलिए इसे छोटी अवधि की बैंक FD के साथ सीधे तुलना करना उचित नहीं है। लंबे समय के निवेश की योजना बनाने वालों के लिए PPF एक विकल्प हो सकता है। इसमें निवेश के साथ टैक्स से जुड़े फायदे भी मिलते हैं, लेकिन निवेश से पहले लंबी लॉक-इन अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

 

NSC पर 7.70 फीसदी ब्याज
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी NSC पर वर्तमान में 7.70 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है और इसकी अवधि 5 साल है। यह उन निवेशकों के लिए विकल्प हो सकता है जो एक निश्चित अवधि के लिए सुरक्षित निवेश चाहते हैं। PPF की तुलना में इसकी अवधि कम है, इसलिए दोनों में चुनाव करते समय निवेश का लक्ष्य और पैसे की जरूरत का समय देखना जरूरी है।

 

बैंक FD से छोटी बचत योजनाओं की तुलना
बड़े सरकारी बैंकों में 1 से 2 साल की FD पर ब्याज दरें करीब 6.45 से 6.60 फीसदी के आसपास बताई गई हैं। कुछ बड़े निजी बैंक भी इसी दायरे में ब्याज दे रहे हैं। ऐसे में कई मामलों में पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाएं बड़े बैंकों की FD से ज्यादा ब्याज दे रही हैं। हालांकि, कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक इससे अधिक FD ब्याज दे सकते हैं, इसलिए निवेश से पहले अलग-अलग बैंकों की मौजूदा दरों की तुलना करना जरूरी है।

 

किस निवेशक के लिए कौन-सा विकल्प?
वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8.20 फीसदी वाली SCSS आकर्षक विकल्प हो सकती है, जबकि पात्र परिवार बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना पर विचार कर सकते हैं। लंबी अवधि के निवेश के लिए PPF और 5 साल की निश्चित अवधि के लिए NSC पर विचार किया जा सकता है। FD चुनते समय केवल ब्याज दर नहीं, बल्कि अवधि, टैक्स, समय से पहले निकासी के नियम और जमा सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी देखना चाहिए। छोटी बचत योजनाओं की दरें लगातार 11 तिमाहियों से स्थिर हैं, इसलिए निवेश का फैसला अपनी जरूरत, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के हिसाब से करना बेहतर होगा।

SP Candidate Praises Modi: अखिलेश के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज नथवानी ने पीएम मोदी की तारीफ की

धनराज नथवानी ने पीएम मोदी की तारीफ की
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन की सराहना की है। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरुआत से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को शानदार बताया।

 

'सेवा के संकल्प' और राष्ट्र निर्माण का किया जिक्र
धनराज नथवानी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 25 साल, समर्पण के 25 साल और 'सेवा के संकल्प' के 25 साल पूरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय और नई चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी का विश्वास, दृढ़ता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण बना रहा। उन्होंने पीएम मोदी को राष्ट्र सेवा में निरंतर शक्ति और सफलता की शुभकामनाएं भी दीं।

 

AIMIM ने धनराज नथवानी के बयान पर जताई आपत्ति
धनराज नथवानी की पोस्ट पर AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने आपत्ति जताई। उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को टैग करते हुए सवाल किया कि क्या पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार भी मोदी सरकार की नीतियों और कानूनों का समर्थन करते हैं। शादाब चौहान ने अपनी पोस्ट में वक्फ, UCC और CAA जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव से इस पर जवाब मांगा।

 

2027 चुनाव को लेकर भी AIMIM का निशाना
शादाब चौहान ने अपनी प्रतिक्रिया में उत्तर प्रदेश की राजनीति और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन से सत्ता की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि उनके सवालों का जवाब नहीं मिला तो 2027 में जनता इसका जवाब देगी। ये बयान AIMIM नेता की ओर से दिए गए राजनीतिक आरोप हैं।

 

राज्यसभा चुनाव से पहले बयान ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
धनराज नथवानी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ ऐसे समय में सामने आई है, जब वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं। उनके बयान के बाद सपा और AIMIM के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के साथ सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

Nana Patekar Dies At 75: नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, गोवा में आया कार्डियक अरेस्ट

नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, वह गोवा स्थित अपने घर में बेहोश मिले थे, जिसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल के डॉक्टर शेखर सालकर के अनुसार, नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था।

 

45 मिनट तक CPR के बाद भी नहीं बच सके
अस्पताल में मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जानी है।

 

नाना पाटेकर का फिल्मी सफर
नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में लंबे समय तक अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन और थिएटर में भी काम किया। ‘परिंदा’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर, ‘क्रांतिवीर’ के लिए बेस्ट एक्टर और ‘अग्नि साक्षी’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। 2013 में उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।

 

सेना के साथ भी जुड़े थे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर अपने अभिनय के अलावा सेना के साथ जुड़े अनुभवों के लिए भी जाने जाते थे। 1999 में उन्होंने सेना की क्विक रिस्पॉन्स टीम के साथ एलओसी क्षेत्र में समय बिताया था। उन्होंने अपने कई सार्वजनिक बयानों में सेना के अनुशासन और वहां बिताए समय का उल्लेख किया था। उनके निधन की खबर के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।

Tu Hai Meri Kiran Trailer: जहीर इकबाल के सनकी किरदार पर ‘डर’ जैसी कल्ट फिल्म से तुलना का दबाव

सोनाक्षी और जहीर की फिल्म का ट्रेलर रिलीज
सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल शादी के बाद पहली बार बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाले हैं। दोनों की फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ का ट्रेलर 6 अक्टूबर को रिलीज किया गया। करण रावल के निर्देशन में बनी यह फिल्म सामान्य रोमांटिक कहानी से अलग मनोवैज्ञानिक थ्रिलर के तौर पर सामने आ रही है। फिल्म में प्यार, पीछा करने की सनक, डर और मानसिक दबाव जैसे पहलुओं को दिखाया गया है। फिल्म 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

 

जहीर इकबाल के किरदार में दिखा खतरनाक जुनून
ट्रेलर की शुरुआत जहीर इकबाल के किरदार के प्यार भरे अंदाज से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही प्यार जुनून और डरावने ऑब्सेशन में बदलता दिखाई देता है। उनका किरदार किरण को अपने प्यार को स्वीकार करने के लिए मजबूर करता नजर आता है। ट्रेलर में उनका व्यवहार एक ऐसे व्यक्ति की तस्वीर पेश करता है जो सामने वाले की निजी जिंदगी और भावनाओं पर अपना नियंत्रण चाहता है।

 

‘डर’ से तुलना बढ़ा रही है किरदार का दबाव
फिल्म के ट्रेलर में जहीर के किरदार और 1993 की शाहरुख खान स्टारर फिल्म ‘डर’ के बीच तुलना की गुंजाइश नजर आती है। ‘डर’ में राहुल मेहरा का जुनूनी प्रेमी वाला किरदार हिंदी सिनेमा के यादगार नेगेटिव किरदारों में शामिल रहा है। ‘तू है मेरी किरण’ में भी ‘किरण’ नाम और सनकी प्रेमी का एंगल होने के कारण दर्शकों को उस फिल्म की याद आना स्वाभाविक है। ऐसे में जहीर के सामने उस स्थापित किरदार से अलग अपनी पहचान बनाने की चुनौती है।

 

‘ऑब्सेशन’ जैसी साइकोलॉजिकल थ्रिलर की झलक
ट्रेलर की कहानी और विजुअल ट्रीटमेंट में हॉलीवुड की साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्मों जैसी झलक भी दिखाई देती है। जहीर का किरदार किरण की जिंदगी में लगातार दखल देता और उसे फॉलो करता नजर आता है, जबकि सोनाक्षी का किरदार उसका विरोध करते हुए अपनी भावनाओं और फैसलों पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश करता है। चोट के निशान और घटनाओं के बदलते संकेत कहानी में रहस्य और मानसिक खेल का माहौल तैयार करते हैं।

 

सोनाक्षी और जहीर की एक्टिंग पर टिकी उम्मीदें
सोनाक्षी सिन्हा ट्रेलर में एक ऐसी महिला के किरदार में नजर आती हैं जो डर और दबाव के बावजूद अपनी बात मजबूती से रखती है। वहीं जहीर इकबाल ने अपनी सामान्य लवर-बॉय छवि से अलग एक नकारात्मक और अनप्रिडिक्टेबल किरदार निभाने की कोशिश की है। ऐसे किरदार में संतुलित अभिनय बड़ी चुनौती होता है, क्योंकि जरा सी अतिशयोक्ति कहानी के प्रभाव को कमजोर कर सकती है।

 

23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आएगी फिल्म
‘तू है मेरी किरण’ का ट्रेलर रिलीज होने के बाद फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जहीर इकबाल अपने किरदार के जरिए ‘डर’ जैसी पुरानी तुलना से आगे निकल पाएंगे और क्या फिल्म साइकोलॉजिकल थ्रिलर के तौर पर अपनी अलग पहचान बना पाएगी। फिल्म 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।