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Xiaomi 17T Gets Costlier: Xiaomi 17T की कीमत में 5 हजार रुपये की बढ़ोतरी

Xiaomi 17T हुआ महंगा
Xiaomi ने भारत में अपने Xiaomi 17T स्मार्टफोन की कीमत में एक बार फिर 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू नई कीमत के बाद 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत 69,999 रुपये हो गई है, जबकि 12GB RAM और 512GB स्टोरेज वेरिएंट अब 74,999 रुपये में उपलब्ध है। Xiaomi के भारतीय ऑनलाइन स्टोर पर 256GB मॉडल की नई कीमत 69,999 रुपये दिखाई दे रही है।

 

लॉन्च के मुकाबले 10 हजार रुपये महंगा
Xiaomi 17T को भारत में जून 2026 में 12GB+256GB वेरिएंट के लिए 59,999 रुपये और 12GB+512GB मॉडल के लिए 64,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। जुलाई में दोनों वेरिएंट की कीमत में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। अब अक्टूबर में हुई दूसरी 5,000 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दोनों मॉडल अपनी शुरुआती कीमत से कुल 10,000 रुपये महंगे हो गए हैं।

 

दोनों वेरिएंट की नई कीमत
नई कीमत के अनुसार Xiaomi 17T का 12GB+256GB मॉडल अब 69,999 रुपये का है, जबकि 12GB+512GB मॉडल की कीमत 74,999 रुपये हो गई है। Xiaomi के सितंबर के आधिकारिक बैंक-ऑफर दस्तावेजों में इन दोनों वेरिएंट की कीमत क्रमशः 59,999 रुपये और 64,999 रुपये दर्ज थी, जबकि 1 अक्टूबर से नई कीमतें लागू होने की रिपोर्ट सामने आई है।

 

फोन में मिलते हैं ये फीचर्स
Xiaomi 17T में 6.59 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। फोन में MediaTek Dimensity 8500 Ultra प्रोसेसर, 12GB RAM और 256GB या 512GB स्टोरेज का विकल्प मिलता है। इसमें 50MP मुख्य कैमरा, 50MP टेलीफोटो कैमरा और 12MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा वाला ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। फोन में 6,500mAh बैटरी और 67W फास्ट चार्जिंग भी मिलती है।

 

तीन कलर में उपलब्ध
Xiaomi 17T को ब्लैक, ब्लू और वायलेट कलर विकल्पों में पेश किया गया है। Xiaomi के आधिकारिक स्टोर पर 12GB+256GB मॉडल की कीमत 69,999 रुपये दिखाई दे रही है। उपलब्धता और स्टॉक स्थिति अलग-अलग समय पर बदल सकती है।

 

खरीदने से पहले कीमत जरूर देखें
नई कीमत लागू होने के बाद Xiaomi 17T खरीदने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी। इसलिए खरीदारी से पहले Xiaomi के आधिकारिक स्टोर और संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उस समय लागू कीमत और उपलब्ध ऑफर की जांच करना जरूरी है। 1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार यह 5,000 रुपये की नई बढ़ोतरी है।

Global Jobs Training: विदेशी नौकरी के लिए युवाओं को तैयार कर रहीं राज्य सरकारें

विदेशी नौकरी के लिए युवाओं की तैयारी
रोजगार की तलाश में युवाओं के लिए अब अवसर केवल देश के बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गए हैं। कई राज्य सरकारें युवाओं को विदेश में रोजगार के लिए तैयार करने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, विदेशी भाषा, भर्ती प्रक्रिया, पासपोर्ट सहायता और सुरक्षित प्रवासन से जुड़ी व्यवस्थाओं को एक साथ जोड़ रही हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान में अलग-अलग स्तर पर ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। भारत और जापान के बीच भी कौशलयुक्त मानव संसाधन के आदान-प्रदान को बढ़ाने की योजना में अगले पांच वर्षों में 50 हजार कुशल भारतीयों को जापान भेजने का लक्ष्य शामिल है।

 

उत्तर प्रदेश में इजरायल समेत कई देशों में अवसर
उत्तर प्रदेश में श्रम एवं सेवायोजन विभाग के माध्यम से युवाओं को इजरायल, जर्मनी, जापान और सऊदी अरब जैसे देशों में रोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य से छह हजार से अधिक श्रमिक इजरायल पहुंच चुके हैं, जबकि 1336 और श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर भेजने की प्रक्रिया चल रही है। नर्सिंग, केयरगिवर, फैब्रिकेशन और मैकेनिकल जैसे क्षेत्रों में भी विदेश रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। मई 2026 में सेवायोजन विभाग की एक भर्ती पहल में इन देशों में 6300 से अधिक पदों की जानकारी दी गई थी, जिसमें अलग-अलग पदों के लिए निर्धारित योग्यता और भाषा प्रशिक्षण की व्यवस्था भी शामिल थी।

 

हरियाणा में भाषा, पासपोर्ट और भर्ती सहायता
हरियाणा में युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार करने के लिए विदेशी भाषा और कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। जर्मन, जापानी, फ्रेंच और अंग्रेजी जैसी भाषाओं के प्रशिक्षण के साथ अंतिम वर्ष के उच्च शिक्षा छात्रों के लिए निशुल्क पासपोर्ट सुविधा भी उपलब्ध है। राज्य के विदेश सहयोग विभाग और हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से विदेश रोजगार और सुरक्षित भर्ती से जुड़ी व्यवस्था विकसित की गई है। हरियाणा सरकार के अनुसार राज्य में कौशल विकास और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार करने पर भी काम किया जा रहा है।

 

जापान के लिए बढ़ रही तैयारी
जापान में तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को देखते हुए भारत और जापान के बीच कौशलयुक्त मानव संसाधन के आदान-प्रदान को बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसमें जापानी भाषा शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, नौकरी मिलान, भर्ती की सुरक्षित प्रक्रिया और जापान पहुंचने के बाद सहायता जैसे पहलू शामिल हैं। केंद्र की कार्ययोजना में राज्यों को स्थानीय युवाओं के प्रशिक्षण और प्लेसमेंट में सहयोग देने तथा जापानी प्रीफेक्चर और भारतीय राज्यों के बीच कौशल आधारित साझेदारी को बढ़ाने की बात भी कही गई है।

 

मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान में भी प्रयास
मध्य प्रदेश में ग्लोबल स्किल पार्क के माध्यम से युवाओं को विदेश रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार 35 युवाओं को जापान, हंगरी और दुबई भेजा जा चुका है। उत्तराखंड में 2023 से अब तक 123 युवाओं को जापान, सऊदी अरब और जर्मनी में रोजगार मिलने की जानकारी दी गई है, जबकि राजस्थान में युवाओं को जापानी, कोरियन, जर्मन, फ्रेंच और स्पेनिश भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को केवल विदेश भेजना नहीं, बल्कि संबंधित देश की भाषा, काम की जरूरत और भर्ती प्रक्रिया के अनुरूप पहले से तैयार करना है।

 

सुरक्षित प्रवासन पर भी जोर
विदेशी रोजगार के साथ फर्जी एजेंटों और भर्ती संबंधी धोखाधड़ी से बचाव को भी इन पहलों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। सरकारी स्तर पर लाइसेंस प्राप्त भर्ती एजेंसियों, दूतावासों के साथ समन्वय, हेल्पलाइन और विदेश पहुंचने के बाद सहायता जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है। भारत-जापान कार्ययोजना में भी सुरक्षित और व्यवस्थित भर्ती, प्रस्थान से पहले भाषा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, तथा विदेश पहुंचने के बाद सहायता और शिकायत निवारण की व्यवस्था का उल्लेख है।

 

विदेशी रोजगार का बदलता मॉडल
राज्य सरकारों की इन पहलों से विदेश रोजगार की प्रक्रिया केवल नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं रह गई है। प्रशिक्षण, भाषा ज्ञान, पासपोर्ट, भर्ती, सुरक्षित प्रवासन और विदेश में सहायता को एक ही व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने के साथ भर्ती प्रक्रिया को समझने और विदेश में काम शुरू करने के लिए पहले से तैयारी करने का अवसर मिल रहा है। हालांकि अलग-अलग राज्यों की योजनाओं में पात्रता, प्रशिक्षण, चयन और सहायता की शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए युवाओं को आवेदन से पहले संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक जानकारी की जांच करनी चाहिए।

Arijit’s Purane Din: अरिजीत सिंह का ‘पुराने दिन’ गाना हुआ रिलीज

पुराने दिन’ गाना हुआ रिलीज
लव रंजन की आगामी फिल्म ‘पहला प्यार दूसरी बार’ का नया गाना ‘पुराने दिन’ रिलीज हो गया है। इस गाने को अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज दी है, जबकि इसका संगीत रोचक कोहली ने तैयार किया है और बोल कुमार ने लिखे हैं। गाने के जरिए दोस्ती, कॉलेज के दिनों की यादों और पहले प्यार की मासूम भावनाओं को सामने लाने की कोशिश की गई है। फिल्म से जुड़े इस नए गाने ने रिलीज के साथ ही दर्शकों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया है।

 

दोस्ती और पहले प्यार की कहानी
‘पुराने दिन’ में कॉलेज और जवानी के उस दौर को दिखाया गया है, जब दोस्ती के साथ पहला क्रश और छोटी-छोटी भावनाएं खास लगती थीं। गाने में क्लासरूम में एक-दूसरे को देखना, बिना बोले भावनाओं को समझना और किसी खास व्यक्ति को देखने की उत्सुकता जैसे पलों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है। इसकी थीम दोस्ती और पहले प्यार से जुड़ी पुरानी यादों को फिर से महसूस कराने पर केंद्रित है।

 

‘तेरा यार हूं मैं’ की टीम फिर साथ
‘पुराने दिन’ के लिए अरिजीत सिंह, रोचक कोहली, कुमार और लव रंजन की टीम एक बार फिर साथ आई है। इससे पहले इसी टीम से जुड़ा ‘तेरा यार हूं मैं’ दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुआ था। नए गाने में भी दोस्ती और पुराने दिनों की भावनाओं को केंद्र में रखा गया है, लेकिन इस बार कहानी में पहले प्यार और कॉलेज की यादों का पहलू भी जोड़ा गया है।

 

फिल्म में नजर आएंगे छह मुख्य कलाकार
‘पुराने दिन’ में फिल्म के छह प्रमुख किरदारों तुषार छिब्बर, सरगुन कौर लूथरा, कुणाल वैद, साक्षी वैद्या, स्पर्श वालिया और अलीशा चोपड़ा की कहानी की भावनात्मक झलक देखने को मिलती है। फिल्म का निर्देशन अनुज सैनी ने किया है, जबकि लव रंजन और अंकुर गर्ग इसके निर्माता हैं। ‘पहला प्यार दूसरी बार’ को लव फिल्म्स प्रस्तुत कर रही है और इसका संगीत टी-सीरीज म्यूजिक पर उपलब्ध है।

 

23 अक्टूबर को रिलीज होगी फिल्म
‘पहला प्यार दूसरी बार’ रोम-कॉम ड्रामा फिल्म है और इसे 23 अक्टूबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना है। ‘पुराने दिन’ के रिलीज होने के बाद फिल्म के संगीत और इसके युवा किरदारों से जुड़ी कहानी को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ी है।

Woman Rapido Driver Goes Viral: मुंबई की महिला Rapido ड्राइवर की सवारी का वीडियो वायरल

मुंबई की Rapido राइड बनी खास
मुंबई की सड़कों पर एक सामान्य Rapido राइड उस समय खास बन गई, जब कंटेंट क्रिएटर रुचिका राजपूत को लेने एक महिला ड्राइवर पहुंचीं। महिला ड्राइवर को देखकर रुचिका ने अपना अनुभव रिकॉर्ड करना शुरू किया और राइड पूरी होने के बाद इसे अपनी हाल की सबसे सुरक्षित और स्मूद राइड में से एक बताया। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद महिला ड्राइवर के काम और उनकी बातचीत की चर्चा होने लगी।

 

महिला ड्राइवर को देखकर खुश हुईं रुचिका
वायरल वीडियो में रुचिका मुंबई की सड़क पर अपनी राइड का इंतजार करती दिखाई देती हैं। कुछ देर बाद उन्हें अपनी Rapido ड्राइवर के रूप में एक महिला आती हुई नजर आती हैं। रुचिका ने इस बात पर खुशी जताई और पूरे सफर को कैमरे में रिकॉर्ड किया। उनके लिए यह केवल एक बाइक टैक्सी राइड नहीं थी, बल्कि सड़क पर महिला को बाइक टैक्सी चलाते देखकर उत्साह और खुशी का अनुभव भी था।

 

राइड खत्म होने के बाद की तारीफ
मंजिल पर पहुंचने के बाद रुचिका ने महिला ड्राइवर से बातचीत की और उनकी राइड की तारीफ की। उन्होंने बताया कि यह उनकी हाल की सबसे सेफ और स्मूद Rapido राइड में से एक रही। रुचिका ने महिला ड्राइवर से कहा कि उन्हें इस तरह काम करते देखकर दूसरी महिलाएं भी प्रेरित हो सकती हैं। ड्राइवर ने भी मुस्कुराकर उनकी बात का जवाब दिया और दोनों के बीच हुई यह छोटी-सी बातचीत वीडियो का प्रमुख हिस्सा बन गई।

 

‘आपको देखकर और महिलाएं आगे आएंगी’
रुचिका ने महिला ड्राइवर के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तरह सड़क पर काम करती महिलाओं को देखकर दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने का हौसला मिल सकता है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने भी महिला ड्राइवर के काम और रुचिका के सकारात्मक अनुभव की चर्चा की। हालांकि वीडियो में कही गई बातें रुचिका के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं और इससे सभी Rapido राइड की सुरक्षा के बारे में कोई सामान्य निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

 

ड्राइवर ने कमेंट में दी प्रतिक्रिया
वीडियो के कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने खुद को वही महिला ड्राइवर बताया और कहा कि उसे अंदाजा नहीं था कि पैसेंजर इस राइड को सोशल मीडिया पर शेयर करेंगी। उन्होंने रुचिका के अनुभव पर खुशी जताई। Rapido की ओर से भी वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए रुचिका के समर्थन और अच्छे अनुभव के लिए धन्यवाद दिया गया। इससे वीडियो की चर्चा और बढ़ गई।

 

महिला रोजगार की कहानी बनी चर्चा का विषय
रुचिका की यह राइड सोशल मीडिया पर इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि इसमें रोजमर्रा के काम के दौरान एक महिला ड्राइवर की मौजूदगी को सकारात्मक तरीके से दिखाया गया। मुंबई जैसे बड़े शहर में बाइक टैक्सी और अन्य ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के जरिए महिलाएं भी रोजगार के अवसरों से जुड़ रही हैं। यह वीडियो एक व्यक्तिगत अनुभव है, लेकिन इसकी चर्चा महिलाओं के काम करने और अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के अवसर अपनाने को लेकर भी हुई है।

SC Rejects TMC Plea: 804 करोड़ के बैंक खातों पर रोक, सुप्रीम कोर्ट से ममता गुट को राहत नहीं

804 करोड़ के चार खातों पर राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की चार बैंक खातों को संचालित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इन खातों में करीब 804 करोड़ रुपये होने बताए गए हैं और उन पर डेबिट लेन-देन की रोक लगी हुई है। जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें अंतरिम राहत देने से मना किया गया था।

 

खातों की रकम पर अधिकार का मुद्दा लंबित
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद के बीच इन बैंक खातों में मौजूद राशि पर किस गुट का अधिकार है, यह सवाल अभी न्यायिक निर्णय के लिए लंबित है। पीठ ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी करने से भी परहेज किया और संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया।

 

हाई कोर्ट से सुनवाई तेज करने का अनुरोध
शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया। ममता गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि खातों पर रोक से पार्टी के कामकाज पर असर पड़ रहा है और पार्टी को संचालन तथा खर्चों के लिए हर महीने करीब 12.15 करोड़ रुपये की जरूरत होती है।

 

सरकार ने गुटीय विवाद का हवाला दिया
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ममता गुट की मांग का विरोध करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस में गुटीय विवाद चल रहा है और दोनों पक्ष पार्टी पर अधिकार का दावा कर रहे हैं। उन्होंने अदालत के सामने एक शिकायत का भी उल्लेख किया, जिसमें ममता गुट से जुड़े एक निजी सहायक द्वारा इन खातों में कथित तौर पर 35 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने की बात कही गई। यह एक पक्ष की ओर से अदालत में रखी गई दलील है और इसकी जांच जारी होने की बात कही गई है।

 

कलकत्ता हाई कोर्ट पहले भी दे चुका है आदेश
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 27 अगस्त को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को करीब 804 करोड़ रुपये वाले चार डेबिट-फ्रोजन बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया था। इससे पहले हाई कोर्ट ने तीन अन्य खातों से पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों को विशेष अधिकारी की निगरानी में पूरा करने की व्यवस्था की थी। सितंबर में इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया था।

 

टीएमसी विवाद में चुनाव चिह्न भी अहम मुद्दा
बैंक खातों का विवाद तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर चल रहे बड़े गुटीय विवाद से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में चुनाव आयोग को दोनों गुटों के बीच नाम और चुनाव चिह्न के विवाद पर तय समयसीमा में फैसला करने का निर्देश दिया है। बैंक खातों पर अंतिम अधिकार का सवाल भी इसी व्यापक विवाद के नतीजे से जुड़ा हुआ है।

UP Police Under Court Scrutiny: यूपी पुलिस की जांच पर कोर्ट के लगातार सवाल

FIR से जांच तक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े कई मामलों में हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जांच, FIR, गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इन मामलों में अदालतों ने अलग-अलग परिस्थितियों में रिकॉर्ड की विसंगतियों, आरोपी की गिरफ्तारी के तरीके और कानूनी प्रक्रिया के पालन की जांच की है। 30 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बुलंदशहर से जुड़े एक मामले में इस बात पर सवाल उठाया कि मौके पर पकड़े जाने का दावा किए गए व्यक्ति का नाम FIR में शुरू में दर्ज क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने पुलिस की जांच की विश्वसनीयता पर चिंता जताई और मामले की जांच CBI को सौंपने की संभावना का भी उल्लेख किया।

 

खुर्जा मामले में FIR पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
बुलंदशहर के खुर्जा से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि घटना के दौरान एक व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया, लेकिन FIR में उसे अज्ञात बताया गया और बाद में उसका नाम जांच में जोड़ा गया। सुप्रीम कोर्ट ने FIR में इस अंतर और जांच के रिकॉर्ड को लेकर पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा। अदालत की चिंता यह थी कि यदि पुलिस को आरोपी की पहचान के बारे में जानकारी थी तो FIR में उसे अज्ञात दिखाने का आधार क्या था। इसी मामले में कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति जनता के पुलिस पर भरोसे को प्रभावित कर सकती है।

 

गिरफ्तारी और हिरासत में प्रक्रिया का मामला
इलाहाबाद हाई कोर्ट के 18 सितंबर 2026 के फैसले में कमलेश कुमार से जुड़े मामले में अदालत ने पाया कि उन्हें 15 अगस्त से पुलिस हिरासत में रखा गया और 19 अगस्त को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस ने उन्हें 19 अगस्त को गिरफ्तार दिखाया था, जबकि जांच और CCTV से संबंधित सामग्री से 15 अगस्त से ही पुलिस हिरासत में होने की बात सामने आई। हाई कोर्ट ने इसे गैरकानूनी हिरासत माना और तत्काल रिहाई का आदेश दिया। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई।

 

NSA मामलों में भी अदालतों ने उठाए सवाल
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हिरासत से जुड़े मामलों में भी अदालतों ने प्रक्रिया और उपलब्ध सामग्री की जांच की। 2 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करते हुए ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने हिरासत के आधार को पर्याप्त सामग्री के बिना बनाया गया माना और मुआवजे की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के कुछ हिस्सों पर विचार किया, लेकिन आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द किए जाने वाला हिस्सा बरकरार रहा।

 

संभल मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
29 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा से जुड़े मल्ला अफरोज की NSA के तहत की गई निवारक हिरासत रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि निवारक हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त और कानूनी रूप से टिकाऊ सामग्री जरूरी है। फैसले में अदालत ने हिरासत आदेश और उसकी पुष्टि को रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख की लागत भी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में संबंधित आपराधिक मामलों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी गई है।

 

अदालतों की चिंता का केंद्र क्या है
इन अलग-अलग मामलों को एक साथ देखने पर अदालतों की मुख्य चिंता पुलिस की जांच में कानूनी प्रक्रिया, रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और हिरासत से जुड़े नियमों के पालन को लेकर दिखाई देती है। FIR में आरोपी की पहचान, पुलिस हिरासत और औपचारिक गिरफ्तारी के बीच अंतर, NSA के तहत हिरासत के पर्याप्त आधार और जांच के दौरान उपलब्ध सामग्री जैसे मुद्दे अदालतों के सामने आए हैं। हालांकि इन मामलों के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस की हर जांच या हर अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले में अदालत के आदेश और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।

 

कोर्ट की टिप्पणियों के बाद जवाबदेही पर जोर
हालिया न्यायिक आदेशों से यह स्पष्ट है कि पुलिस की जांच और हिरासत की कार्रवाई न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहती है। जहां अदालतों को प्रक्रिया में गंभीर कमी मिली, वहां रिहाई, मुआवजा या राज्य पर लागत जैसे आदेश दिए गए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित केस के रिकॉर्ड और परिस्थितियों पर आधारित हैं। इसलिए अदालत की टिप्पणियों को पूरे पुलिस बल के बारे में सामान्य आरोप के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित मामलों में सामने आई न्यायिक आपत्तियों के रूप में देखना अधिक उचित है।

Pawan Singh Song Hits 800M: पवन सिंह के गाने ने पार किए 800 मिलियन व्यूज

पवन सिंह का गाना फिर चर्चा में
भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह का 2016 में रिलीज हुआ गाना ‘छलकत हमरो जवानी’ लंबे समय बाद भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। यह गाना फिल्म ‘भोजपुरिया राजा’ का हिस्सा है और पवन सिंह तथा प्रियंका सिंह ने इसे गाया है। आधिकारिक Worldwide Records Bhojpuri वीडियो पर इसके करोड़ों व्यूज दर्ज हैं, जबकि 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में गाने के 800 मिलियन से अधिक व्यूज पार करने की जानकारी सामने आई थी। अलग-अलग प्लेटफॉर्म और वीडियो अपलोड के कारण व्यू काउंट बदल सकता है।

 

‘भोजपुरिया राजा’ का गाना बना हिट
‘छलकत हमरो जवानी’ फिल्म ‘भोजपुरिया राजा’ के म्यूजिक एल्बम का प्रमुख गाना है। आधिकारिक म्यूजिक क्रेडिट के अनुसार इसमें पवन सिंह और प्रियंका सिंह की आवाज है, जबकि म्यूजिक माधुकर आनंद और बोल आजाद सिंह के हैं। गाने के वीडियो में पवन सिंह और काजल राघवानी नजर आते हैं। यह फिल्म और गाना 2016 में रिलीज हुए थे और इसके बाद यह भोजपुरी म्यूजिक के लोकप्रिय गानों में शामिल हो गया।

 

यूट्यूब पर लगातार बना रिकॉर्ड
इस गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसके लंबे समय तक बने व्यूज से लगाया जा सकता है। जून 2026 की एक रिपोर्ट में इसे 800 मिलियन से ज्यादा व्यूज हासिल करने वाला पवन सिंह का चर्चित गाना बताया गया था। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक YouTube पेज पर दिखने वाला वर्तमान व्यू काउंट अलग हो सकता है और समय के साथ लगातार बदलता रहता है। इसलिए 848 मिलियन के आंकड़े को स्थायी संख्या के बजाय उस समय रिपोर्ट किए गए व्यूज के रूप में देखना बेहतर है।

 

शादी-पार्टी में लोकप्रियता की चर्चा
भोजपुरी संगीत के लोकप्रिय गानों में शामिल इस ट्रैक का इस्तेमाल लंबे समय से मनोरंजन और डांस कार्यक्रमों में किया जाता रहा है। गाने की तेज धुन और पवन सिंह की आवाज ने इसे भोजपुरी दर्शकों के बीच पहचान दिलाई। हालांकि शादी-पार्टियों में इसे ‘हर जगह’ बजाए जाने जैसे दावे लोकप्रियता को दर्शाते हैं, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक या स्वतंत्र व्यापक गणना उपलब्ध नहीं है।

 

पवन सिंह के लिए बड़ी डिजिटल उपलब्धि
दस साल पुराने इस गाने का लंबे समय तक दर्शकों के बीच बना रहना पवन सिंह के भोजपुरी संगीत करियर में इसकी लोकप्रियता को दिखाता है। आधिकारिक म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर भी ‘छलकत हमरो जवानी’ को पवन सिंह और प्रियंका सिंह के 2016 के प्रमुख गानों में सूचीबद्ध किया गया है।

Mahatma Gandhi Facts: महात्मा गांधी की 157वीं जयंती: मोहन से बापू तक का सफर

2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मनाई जाएगी। 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी का जीवन केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं था। उनका सफर एक संकोची बच्चे से लेकर वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, सत्याग्रह के प्रयोगकर्ता और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल होने तक पहुंचा। आज भी उनके जीवन से जुड़े कई छोटे-बड़े किस्से लोगों की दिलचस्पी का विषय बने रहते हैं।

 

पोरबंदर से लंदन और फिर दक्षिण अफ्रीका तक पहुंचा सफर
मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ। उनके पिता करमचंद गांधी रियासत में दीवान थे, जबकि उनकी मां पुतलीबाई धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। गांधी के शुरुआती जीवन पर परिवार के संस्कारों का गहरा प्रभाव पड़ा।
1888 में वह कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए और 1891 में बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। इसके बाद 1893 में वह एक कानूनी मामले के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। वहीं उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा और आने वाले वर्षों में उनके सामाजिक तथा राजनीतिक विचारों में महत्वपूर्ण बदलाव आया।

 

दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह का प्रयोग
दक्षिण अफ्रीका में गांधी ने अन्याय और भेदभाव के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का रास्ता विकसित किया। उन्होंने सत्य और अहिंसा को आंदोलन की रणनीति से जोड़ा और इसी दौर में सत्याग्रह की अवधारणा को व्यवहार में उतारा। वह लगभग 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका में रहे और 1915 में भारत लौटे। बाद में भारत में उनके आंदोलनों की रणनीति का आधार भी सत्याग्रह और अहिंसक जनभागीदारी बनी।

 

भारत लौटने के बाद आंदोलन की नई शुरुआत
भारत आने के बाद गांधी का प्रभाव धीरे-धीरे व्यापक होता गया। 1917 का चंपारण सत्याग्रह उनके भारतीय सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े आंदोलनों में उनकी प्रमुख भूमिका रही। गांधी के आंदोलनों में आम लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण थी। किसान, मजदूर, महिलाएं और विद्यार्थी भी अलग-अलग चरणों में राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े।

 

तारीखों में समझें गांधी जी की ऐतिहासिक यात्रा
1917:
चंपारण सत्याग्रह के जरिए किसानों के मुद्दे को प्रमुखता मिली। गांधी हेरिटेज पोर्टल की कालक्रम सामग्री में चंपारण आंदोलन की घटनाओं का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध है।
1920: असहयोग आंदोलन का दौर शुरू हुआ।
1930: गांधी ने नमक कानून के विरोध में दांडी मार्च किया। इसी वर्ष TIME ने उन्हें अपने ‘Man of the Year’ के रूप में चुना; TIME के रिकॉर्ड में 1930 के लिए मोहनदास गांधी का नाम दर्ज है।
1942: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक आंदोलन का आह्वान किया।
1947: भारत स्वतंत्र हुआ। गांधी इस दौर में सांप्रदायिक हिंसा रोकने और शांति स्थापित करने के प्रयासों में सक्रिय रहे।
1948: 30 जनवरी को नई दिल्ली में गांधी की हत्या कर दी गई।

 

शर्मीले बच्चे से बने जननेता
गांधी के शुरुआती जीवन से जुड़ी कई आत्मकथात्मक घटनाएं बताती हैं कि वह युवावस्था में काफी संकोची थे। सार्वजनिक जीवन में उनकी बाद की भूमिका को देखते हुए यह बदलाव खास तौर पर दिलचस्प लगता है। एक ऐसे व्यक्ति ने आगे चलकर लाखों लोगों को आंदोलनों से जोड़ने की क्षमता विकसित की, जो युवावस्था में सार्वजनिक रूप से बोलने को लेकर सहज नहीं थे।

 

गांधी नाम के साथ कैसे जुड़े ‘महात्मा’, ‘बापू’ और ‘राष्ट्रपिता’?
गांधी को अलग-अलग समय और संदर्भों में मोहन, गांधी, बापू और महात्मा जैसे संबोधनों से पुकारा गया। ‘महात्मा’ का अर्थ सामान्यतः ‘महान आत्मा’ बताया जाता है। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा गांधी को ‘महात्मा’ कहकर संबोधित किए जाने का उल्लेख व्यापक रूप से मिलता है, हालांकि इस उपाधि के शुरुआती प्रयोग को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक विवरण भी मौजूद हैं।
‘राष्ट्रपिता’ गांधी के लिए लोकप्रिय रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला संबोधन है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा 1944 में रेडियो संदेश में गांधी को इस संबोधन से पुकारे जाने का उल्लेख ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है। हालांकि इसे भारत के संविधान या किसी औपचारिक सरकारी पदवी के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

 

गांधी सिर्फ नेता नहीं, लेखक और संपादक भी थे
गांधी पत्रकारिता और लेखन से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने ‘इंडियन ओपिनियन’, ‘यंग इंडिया’, ‘नवजीवन’ और ‘हरिजन’ जैसे प्रकाशनों के जरिए अपने विचार लोगों तक पहुंचाए। उनकी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ मूल रूप से गुजराती में लिखी गई थी। गांधी हेरिटेज पोर्टल पर उनके लेखन और ‘Collected Works of Mahatma Gandhi’ का विस्तृत अभिलेख उपलब्ध है।

 

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पांच बार नामांकन
महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पांच बार नामांकित किया गया था—1937, 1938, 1939, 1947 और 1948 में। हालांकि उन्हें पुरस्कार नहीं मिला। नोबेल पुरस्कार की आधिकारिक वेबसाइट भी उनके पांच नामांकन का उल्लेख करती है।
यह तथ्य गांधी के जीवन से जुड़े उन पहलुओं में शामिल है जिनकी चर्चा अक्सर उनके स्वतंत्रता आंदोलन के योगदान के साथ नहीं हो पाती।

 

पैदल चलना गांधी की जीवनशैली का हिस्सा था
गांधी नियमित रूप से पैदल चलते थे और लंबी यात्राएं भी उनके जीवन का हिस्सा रहीं। 1930 का दांडी मार्च इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। साबरमती से दांडी तक की यह यात्रा नमक कानून के खिलाफ उनके आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी और दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी। TIME ने भी 1930 के अपने लेख में उनके समुद्र तक मार्च करने का उल्लेख किया था।

 

गांधी और सादगी से जुड़े कई किस्से
गांधी के जीवन से जुड़े लोकप्रिय किस्सों में चरखा चलाना, खादी पहनना, सीमित जरूरतों के साथ जीवन जीना, पत्र लिखना और समय की पाबंदी जैसे प्रसंग शामिल हैं। इन छोटी आदतों ने उनकी सार्वजनिक छवि को भी प्रभावित किया। उनके लिए स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और सामाजिक सुधार भी स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक विचारों का हिस्सा थे।

 

गांधी के जीवन से जुड़े 5 प्रमुख रोचक तथ्य
1. जन्म:
गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था।
2. कानून की पढ़ाई: उन्होंने इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई की और बैरिस्टर बने।
3. दक्षिण अफ्रीका: 1893 में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे और वहां लंबे समय तक रहे।
4. TIME सम्मान: 1930 में TIME ने उन्हें ‘Man of the Year’ चुना था।
5. नोबेल नामांकन: उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पांच बार नामांकित किया गया, लेकिन पुरस्कार नहीं मिला।

 

गांधी की सीख को दुनिया ने भी अपनाया
गांधी के अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के विचार भारत से बाहर भी प्रभावशाली रहे। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गांधी का जीवन और अहिंसा का दर्शन दुनिया भर में नागरिक अधिकारों और सामाजिक बदलाव के आंदोलनों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।
2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ घोषित किया। इस दिन का उद्देश्य अहिंसा के संदेश को शिक्षा और जन-जागरूकता के माध्यम से आगे बढ़ाना है।

 

157वीं जयंती पर गांधी को कैसे याद करें?
गांधी जयंती पर केवल भाषण या कार्यक्रम तक सीमित रहने के बजाय उनके जीवन और विचारों को समझने की कोशिश की जा सकती है। बच्चे उनकी आत्मकथा के सरल अंश पढ़ सकते हैं, गांधी स्मारक या संग्रहालय जा सकते हैं और अपने आसपास स्वच्छता या सामाजिक सेवा से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं।

 

आज के दौर में गांधी के विचारों की चर्चा क्यों होती है?
आज भी सत्य, अहिंसा, संवाद, सादगी, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव जैसे विषय सार्वजनिक जीवन में चर्चा का हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र भी 2 अक्टूबर को गांधी की जयंती के अवसर पर अहिंसा, शांति, समझ और संवाद के संदेश को रेखांकित करता है। 2026 के अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी गांधी की विरासत और अहिंसा के महत्व को रेखांकित किया है।

 

157वीं जयंती पर मोहन से बापू तक की कहानी
महात्मा गांधी का जीवन एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा है—पोरबंदर के मोहनदास से लेकर दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह प्रयोगों तक और फिर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक जनभागीदारी तक। उनके जीवन को केवल कुछ प्रसिद्ध नारों या तारीखों में समेटना मुश्किल है।
2 अक्टूबर 2026 को उनकी 157वीं जयंती के अवसर पर गांधी को याद करने का एक तरीका यह भी है कि उनके जीवन के उन पहलुओं को समझा जाए, जिनमें सत्य, अहिंसा, सादगी, जनभागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विचार लगातार दिखाई देते हैं। यही कारण है कि उनके जन्मदिन को भारत में गांधी जयंती और विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में याद किया जाता है।

Bengaluru School Admission Row: बेंगलुरु के स्कूलों में मां की नौकरी पर सवाल

बेंगलुरु के स्कूलों पर उठे सवाल

बेंगलुरु में स्कूल एडमिशन से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने कामकाजी माताओं को लेकर कथित प्रवेश मानदंड पर बहस छेड़ दी है। Reddit पर 24 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक पोस्ट में एक अभिभावक ने दावा किया कि बनशंकरी इलाके के कुछ स्कूलों में ऐसे परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है जिनकी मां गृहिणी हैं। पोस्ट के अनुसार, कामकाजी मां होने की स्थिति में बच्चे का आवेदन आगे नहीं बढ़ने या अस्वीकार होने की आशंका बताई गई। हालांकि, यह दावा सोशल मीडिया पोस्ट और अभिभावक के अनुभवों पर आधारित है और संबंधित स्कूलों की ओर से इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

 

अभिभावक ने क्या दावा किया

पोस्ट लिखने वाले अभिभावक ने बताया कि उनकी ढाई साल की बेटी के लिए स्कूल तलाशते समय उन्हें इस कथित अनौपचारिक व्यवस्था के बारे में जानकारी मिली। उनका दावा है कि उन्होंने संबंधित स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के कुछ माता-पिता से बात की, जिन्होंने इसे एक तरह का 'ओपन सीक्रेट' बताया। पोस्ट के अनुसार, कुछ लोगों ने उन्हें आवेदन में मां की नौकरी की जानकारी छिपाने या गलत जानकारी देने की सलाह भी दी, लेकिन अभिभावक ने ऐसा करने से इनकार किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ स्कूल हर साल मां की नौकरी की स्थिति के बारे में जानकारी लेते हैं।

 

 

सोशल मीडिया पर मिले-जुले दावे

इस मामले में सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। कुछ यूजर्स ने आरोपों का समर्थन करते हुए अपने अनुभव साझा किए और संबंधित स्कूलों के खिलाफ शिकायत करने की बात कही। वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने ऐसे किसी नियम के अस्तित्व पर सवाल उठाया। एक टिप्पणी में एक व्यक्ति ने कहा कि उनके परिचितों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं और वहां मां के गृहिणी होने जैसी कोई शर्त नहीं है। एक अन्य यूजर ने दावा किया कि उनके परिवार में कई कामकाजी महिलाएं हैं और फिर भी उनकी अगली पीढ़ियां उसी स्कूल में पढ़ती रही हैं। इससे स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध अनुभव परस्पर विरोधी हैं।

 

स्कूल की आधिकारिक नीति की पुष्टि जरूरी

उपलब्ध रिपोर्टों में इस कथित नियम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बेंगलुरु के सभी स्कूल या किसी विशेष स्कूल की आधिकारिक प्रवेश नीति कामकाजी माताओं के बच्चों को दाखिले से रोकती है। मामले में संबंधित स्कूलों की आधिकारिक प्रवेश नीति और उनका पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। शिक्षा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष के लिए केवल सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय स्कूल के लिखित नियम और आधिकारिक जवाब को आधार बनाना जरूरी होगा।

 

मां की नौकरी को लेकर क्यों छिड़ी बहस

इस विवाद ने यह सवाल भी उठाया है कि बच्चे के स्कूल एडमिशन में माता-पिता की रोजगार स्थिति को किस हद तक महत्व दिया जाना चाहिए। सोशल मीडिया चर्चा में कुछ अभिभावकों ने कहा कि बच्चे की शिक्षा और देखभाल से जुड़े सवालों का आकलन परिवार की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए। दूसरी ओर, कुछ टिप्पणियों में ऐसे दावों को ही अपुष्ट बताया गया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामला एक अभिभावक के आरोप, सोशल मीडिया पर हुई चर्चा और उसके जवाब में सामने आए अलग-अलग अनुभवों तक सीमित है।

Indian Pilot Saves Flight: भारतीय पायलट ने बचाई 174 यात्रियों की जान

फ्लाईदुबई फ्लाइट में बड़ा हादसा टला
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर 2026 को उड़ान के दौरान गंभीर घटना सामने आई। विमान में 174 यात्री सवार थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट में पायलट और को-पायलट के बीच संघर्ष हुआ, जिसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक की ओर मोड़ना पड़ा। फ्लाईदुबई ने पुष्टि की कि विमान तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गया और सभी यात्री सुरक्षित थे।

 

भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार चर्चा में
इस घटना के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का नाम सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, उड़ान के दौरान ओमानी को-पायलट ने उन पर हमला किया और उन्हें चाकू से घायल कर दिया। इसके बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिससे यात्रियों और क्रू के अन्य सदस्यों को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का मौका मिला। उनकी इस कार्रवाई को विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

विमान ने भेजे 7700 और 7500 कोड
घटना के दौरान फ्लाइट ने पहले 7700 स्क्वॉक कोड भेजा, जो सामान्य विमानन आपात स्थिति का संकेत है। इसके बाद 7500 कोड प्रसारित हुआ, जिसका इस्तेमाल हाईजैकिंग या गैरकानूनी हस्तक्षेप की स्थिति में किया जाता है। विमान तेजी से नीचे आया और बाद में उसका रुख सऊदी अरब की ओर कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद विमान को तबूक एयरपोर्ट पर उतारा गया।

 

दो अन्य पायलटों ने संभाला विमान
कॉकपिट में हुई घटना के बाद विमान में यात्रा कर रहे फ्लाईदुबई के दो अन्य पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की। रिपोर्टों के मुताबिक, घायल कैप्टन के कॉकपिट का दरवाजा खोलने के बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू करने में सहायता की और इसके बाद विमान को तबूक में सुरक्षित लैंड कराया गया। घायल कैप्टन और को-पायलट दोनों को चिकित्सा सहायता दी गई।

 

स्मित मच्छार को मिली सराहना
भारतीय पायलट स्मित मच्छार की कार्रवाई की भारत और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व ने भी सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनके साहस और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों की प्रशंसा की। मच्छार मुंबई से हैं और इससे पहले स्पाइसजेट में भी पायलट के तौर पर काम कर चुके हैं।

 

जांच के बाद सामने आएगी पूरी वजह
फ्लाईदुबई ने कहा है कि घटना की जांच संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर की जा रही है और आगे की जानकारी पुष्टि होने के बाद साझा की जाएगी। घटना के पीछे की वजह और को-पायलट के कथित हमले का उद्देश्य अभी जांच का विषय है। इसलिए शुरुआती रिपोर्टों में सामने आए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए