हथियार का हार’ में पुरस्कारों पर सवाल
मुकेश भारद्वाज के कॉलम ‘बेबाक बोल’ में प्रकाशित लेख ‘हथियार का हार’ साहित्यिक पुरस्कारों, पुरस्कार वापसी और सत्ता के साथ साहित्य के संबंधों पर सवाल उठाता है। लेख में लेखक ने 2015 की पुरस्कार वापसी की बहस को मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य से जोड़ते हुए अपने विचार रखे हैं।
पुरस्कार वापसी की पुरानी बहस
लेख में सितंबर 2015 के दादरी कांड और एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद शुरू हुई पुरस्कार वापसी की मुहिम का उल्लेख किया गया है। लेखक के अनुसार, उस समय कई साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने पुरस्कारों को सार्वजनिक नैतिक प्रतिरोध के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया था।
अखलाक और कलबुर्गी का संदर्भ
मुकेश भारद्वाज ने लेख में मोहम्मद अखलाक और एमएम कलबुर्गी की याद को साहित्य और सार्वजनिक प्रतिरोध की बहस से जोड़ा है। लेख का तर्क है कि पुरस्कारों को लेकर बदले रुख को उसी दौर में स्थापित नैतिक और सार्वजनिक रुख के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
पुरस्कार और सत्ता का संबंध
लेख में साहित्यिक पुरस्कारों के स्रोत, सत्ता से उनके संबंध और पुरस्कार स्वीकार करने के फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। लेखक ने ज्यां पाल सार्त्र और नोबेल पुरस्कार समेत कई उदाहरणों का उल्लेख करते हुए पुरस्कार स्वीकार करने या ठुकराने की बहस को सामने रखा है।
मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा गणेश पंडाल के पास 24 सितंबर की रात एक दुखद घटना सामने आई। 68 वर्षीय विजय अनेकर अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और संबंधित कर्मचारियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। उन्हें इलाज के लिए परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, घटना की जानकारी के बाद मामले की जांच की जा रही है।
दर्शन के दौरान सामने आई घटना
विजय अनेकर लालबागचा राजा गणेशोत्सव क्षेत्र में मौजूद थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए। घटना लालबागचा राजा के पंडाल के पास हुई, जहां गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बना रहा।
मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं
अधिकारियों और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विजय अनेकर की मौत का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल यह पुष्टि नहीं की गई है कि उनकी मौत हार्ट अटैक, अत्यधिक भीड़, गर्मी या किसी अन्य वजह से हुई। पोस्टमार्टम या चिकित्सकीय जांच से मौत के कारण के बारे में अधिक जानकारी सामने आ सकती है। खबर को प्रकाशित करते समय मौत की वजह को लेकर किसी अपुष्ट दावे से बचना जरूरी है।
अमेरिका में 14 सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को G20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। यह पत्र 24 सितंबर को भेजा गया था और इसमें रिपब्लिकन तथा डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सांसद शामिल हैं। सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से इस निमंत्रण पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि पुतिन की G20 में भागीदारी को लेकर अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते हैं।
निमंत्रण वापस लेने की मांग
सीनेटरों ने केवल स्पष्टीकरण नहीं मांगा, बल्कि ट्रंप से पुतिन को दिया गया निमंत्रण वापस लेने का आग्रह भी किया है। पत्र की पहल रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर और डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन ने की। सांसदों ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन को अमेरिका में होने वाले G20 कार्यक्रम में शामिल करना उनके अनुसार रूस सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधता देने जैसा हो सकता है। ये बातें सीनेटरों के पत्र में दर्ज उनके राजनीतिक और नीतिगत तर्क हैं।
रूस पर प्रतिबंधों का भी दिया हवाला
अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पुतिन और रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव सहित कुछ रूसी अधिकारी अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में हैं। सीनेटरों ने सवाल उठाया कि प्रतिबंधित रूसी अधिकारियों को अमेरिका में आयोजित G20 से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति क्यों दी जा रही है। उन्होंने भविष्य के G20 कार्यक्रमों में प्रतिबंधित रूसी अधिकारियों की भागीदारी रोकने की भी मांग की है। यह मांग फिलहाल सांसदों के पत्र का हिस्सा है, कोई नया सरकारी आदेश नहीं।
UN में पेटल गहलोत का जवाब
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत की ओर से पेटल गहलोत ने जवाब दिया। वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन से जुड़ी भारतीय राजनयिक हैं। अपने जवाब में उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े दावों पर सवाल उठाए।
लादेन का किया जिक्र
पेटल गहलोत ने अपने बयान में ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान में एक सैन्य प्रतिष्ठान के पास रह रहा था। उन्होंने इस संदर्भ के जरिए पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल उठाया।
पाकिस्तान की सरकार पर टिप्पणी
गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर भी टिप्पणी की और 'फॉर्म 47 सरकार' का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों को लेकर किए जाने वाले दावों और वहां की वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अंतर दिखाई देता है।
आतंकवाद और अल्पसंख्यकों का मुद्दा
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान में आतंकवाद, धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सुरक्षा और मानवाधिकारों पर की गई टिप्पणियों को उसके अपने रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के यूनियनों के संगठन United Forum of Bank Unions यानी UFBU ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियनों और सरकार तथा बैंक प्रबंधन के बीच बातचीत से कोई अंतिम समाधान नहीं निकलने के बाद हड़ताल का फैसला बरकरार रखा गया है। इसका सबसे ज्यादा असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में ग्राहक सेवाओं पर पड़ सकता है।
पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था की प्रमुख मांग
यूनियनों की प्रमुख मांग सभी शनिवार को बैंक अवकाश घोषित कर पांच-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना है। वर्तमान व्यवस्था में दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं। यूनियनों का कहना है कि पांच-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग पहले के वेतन समझौते से जुड़ी हुई है और इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
PLI समेत दूसरे मुद्दे भी शामिल
हड़ताल की मांगों में Performance Linked Incentive यानी PLI से जुड़ा विवाद भी शामिल है। UFBU के अनुसार PLI व्यवस्था और उससे संबंधित बदलावों को लेकर भी आपत्ति है। इसके अलावा बैंक कर्मचारियों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों पर भी यूनियनों ने बातचीत और समाधान की मांग की है। सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों से हड़ताल टालने की अपील की गई है, लेकिन यूनियनों ने फिलहाल हड़ताल का कार्यक्रम वापस नहीं लिया है।
२८ सप्टेंबरला राज्यभर हल्लाबोल, प्रत्येक जिल्हाधिकारी कार्यालयावर शेतकऱ्यांची धडक!
बुलढाणा (प्रतिनिधी) : महाराष्ट्रातील २६५ तालुक्यांमध्ये म्हणजेच राज्यातील सुमारे ७५ टक्के तालुक्यांमध्ये कोरडा दुष्काळ जाहीर करण्याची घोषणा राज्य सरकारने २६ सप्टेंबर रोजी केली. मात्र, सरकारच्या या घोषणेनंतर शेतकरी नेते तथा क्रांतिकारी शेतकरी संघटनेचे संस्थापक अध्यक्ष रविकांत तुपकर यांनी संतप्त प्रतिक्रिया व्यक्त करत, केवळ दुष्काळ जाहीर करून शेतकऱ्यांचे प्रश्न सुटणार नाहीत, अशी ठाम भूमिका मांडली आहे.farmernews
“सरकारने दुष्काळ जाहीर केला म्हणजे काही मोठा पराक्रम केला, असा त्याचा अर्थ होत नाही. नुसत्या घोषणेने आणि तकलादू उपाययोजनांनी शेतकऱ्यांना दिलासा मिळणार नाही. शेतकऱ्यांना हेक्टरी एक लाख रुपये नुकसानभरपाई द्या, अन्यथा आंदोलनाला सामोरे जावे लागेल,” असा इशारा देत तुपकर यांनी २८ सप्टेंबर रोजी राज्यभर हल्लाबोल आंदोलनाची घोषणा केली आहे.cmomaharashtra
राज्यातील प्रत्येक जिल्हाधिकारी कार्यालयावर सकाळी ११ वाजता शेतकरी धडक देणार असून, शेतकऱ्यांनी मोठ्या संख्येने या आंदोलनात सहभागी व्हावे, असे आवाहन त्यांनी केले आहे.
“चार-पाचशे रुपयांची परीक्षा फी माफ करून शेतकऱ्यांना काय दिलासा मिळणार?”
सरकारने दुष्काळ जाहीर केल्यानंतर जाहीर होणाऱ्या उपाययोजनांवर टीका करताना तुपकर म्हणाले की, परीक्षा फी माफी, शेतसारा माफी, कर्जवसुलीला स्थगिती, कर्जाचे पुनर्गठन आणि वीजबिलाला स्थगिती अशा उपाययोजनांनी शेतकऱ्यांच्या हातात प्रत्यक्ष काहीच पडणार नाही. “मुलांची चारशे-पाचशे रुपये परीक्षा फी माफ करणार, शेतसारा माफ करणार म्हणजे दहा-वीस रुपयांची सवलत मिळणार.
कर्जाच्या वसुलीला स्थगिती आणि कर्जाचे पुनर्गठन करणार, पण आम्ही कर्जमाफीस पात्र आहोत, मग पुनर्गठनाचा प्रश्नच कुठे येतो? वीजबिलाच्या स्थगितीबाबतही आधीच निर्णय आहे. मग या तकलादू उपाययोजनांनी शेतकऱ्यांना नेमका काय दिलासा मिळणार?” असा सवाल त्यांनी उपस्थित केला. सरकारने केवळ दुष्काळाचा जीआर काढून जबाबदारी झटकू नये, तर शेतकऱ्यांच्या खात्यात प्रत्यक्ष आर्थिक मदत जमा करावी, अशी मागणी त्यांनी केली.
उत्पादन खर्चाचा हिशोबच मांडला..
यंदा कमी पावसामुळे सोयाबीनसह खरीप पिकांचे मोठ्या प्रमाणात नुकसान झाले असून, शेतकऱ्यांनी पेरणी, मशागत आणि इतर शेतीकामांसाठी केलेला खर्चही वसूल होण्याची शक्यता कमी असल्याचे तुपकर यांनी सांगितले. “यंदा सोयाबीनचा एकरी उत्पादन खर्च ४० हजार रुपये, म्हणजे हेक्टरी खर्च जवळपास एक लाख रुपये झाला आहे. शेतकऱ्यांनी पिकासाठी एवढा खर्च केला आणि आता पीक हातातून गेले आहे.
अशा परिस्थितीत सरकारने हेक्टरी एक लाख रुपये नुकसानभरपाई दिली पाहिजे. सरकारच्या मदतीला दोन हेक्टरची मर्यादा घालण्याची चर्चा आहे. पण शेतकऱ्याकडे दोन हेक्टरपेक्षा जास्त जमीन असेल, तर त्याने काय करायचे? दोन हेक्टरची मर्यादा न घालता शेतकऱ्याकडे जेवढी जमीन आहे, तेवढ्या संपूर्ण क्षेत्रासाठी हेक्टरी एक लाख रुपये मदत द्या,” अशी मागणी त्यांनी केली.ravikanttupkar
“पंचनाम्यांची गरज नाही, सरसकट नुकसान झाले आहे; दौरे, फोटोसेशन आणि रिल्स बंद करा!”
राज्यातील अनेक भागांत पावसाअभावी पिकांचे नुकसान झाले असून, आता पंचनाम्यांच्या प्रक्रियेत वेळ घालवण्याची गरज नसल्याचे तुपकर यांनी म्हटले आहे. “आता पंचनामे करण्याची अजिबात गरज नाही. सगळ्या शेतकऱ्यांचे नुकसान झाले आहे.
सरसकट नुकसान झालेले असताना पंचनाम्यांच्या नावाखाली शेतकऱ्यांना का अडकवता? शेतकऱ्यांच्या बांधावर जाऊन दौरे काढणे, व्हिडिओ काढणे, रिल्स बनवणे हे धंदे आता बंद करा. आमच्या दुःखाचा बाजार मांडू नका. शेतकऱ्यांच्या वेदनांचे प्रदर्शन करण्यापेक्षा त्यांच्या मागण्या मान्य करा आणि प्रत्यक्ष मदत द्या,” अशा शब्दांत त्यांनी सरकारवर घणाघात केला..
कर्जमाफी, प्रोत्साहन अनुदान, सिबिल आणि पीककर्जाचे प्रश्नही ऐरणीवर
दुष्काळी मदतीसोबतच शेतकऱ्यांच्या कर्जाचा प्रश्नही तुपकर यांनी उपस्थित केला आहे. नियमित कर्जाची परतफेड करणाऱ्या शेतकऱ्यांना दोन लाख रुपयांचे प्रोत्साहन अनुदान देण्यात यावे, तसेच २०१९ च्या कर्जमाफीपूर्वीच्या योजनेतून वंचित राहिलेल्या शेतकऱ्यांना सध्याच्या कर्जमाफी योजनेत सामावून घ्यावे, अशी मागणी त्यांनी केली.कर्जमाफी
कर्जमाफी योजनेतील त्रुटींमुळे शेतकऱ्यांचे सिबिल खराब होत असल्याने मुख्यमंत्र्यांनी रिझर्व्ह बँकेशी चर्चा करून त्यावर तोडगा काढावा, अशी मागणीही त्यांनी केली. बँकांकडून एकाच तारखेला कर्ज घेतलेल्या शेतकऱ्यांना वेगवेगळे व्याज आकारले जात असल्याच्या तक्रारींची चौकशी करून सर्व शेतकऱ्यांना नवीन पीककर्ज मिळावे, अशी भूमिका त्यांनी मांडली. दुष्काळाच्या काळात शेतमजूर आणि भूमिहीन कुटुंबांसाठी स्वतंत्र विशेष आर्थिक पॅकेज जाहीर करण्याची मागणीही आंदोलनातून करण्यात येणार आहे.eknathshinde
अन्नत्याग आंदोलन, विधानभवनासमोरील सोयाबीन उधळून आंदोलन; तुपकरांचा संघर्षाचा इतिहास पुन्हा चर्चेत
रविकांत तुपकर यांचा शेतकऱ्यांच्या प्रश्नांवरील संघर्ष यापूर्वीही राज्यभर चर्चेत राहिला आहे. संपूर्ण कर्जमुक्तीच्या मागणीसाठी त्यांनी जून महिन्यात अन्नत्याग आंदोलन केले होते. त्यानंतर मुंबईत विधानभवनासमोर सोयाबीन उधळून झाडावर चढून केलेल्या आंदोलनाने राज्याचे लक्ष वेधले होते. या आंदोलनानंतर तुपकर यांच्या शिष्टमंडळाची मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्यासोबत बैठक झाली होती. कर्जमाफी योजनेतील काही अटी शिथिल करण्याबाबत या आंदोलनातून यश मिळाल्याचा दावा संघटनेकडून करण्यात आला होता.ajitpawar
मात्र, शेतकऱ्यांच्या प्रश्नांवर तुपकरांचा संघर्ष थांबला नाही. मागील महिन्यात मुंबईतील मंत्र्यांचे बंगले आणि गाड्यांचा लिलाव करण्याच्या आंदोलनाची घोषणा करून त्यांनी पुन्हा एकदा सरकारचे लक्ष वेधले होते. आता दुष्काळाच्या पार्श्वभूमीवर त्यांनी पुन्हा आंदोलनाचे रणशिंग फुंकले आहे. यापूर्वीच्या आंदोलनांप्रमाणेच यावेळीही शेतकऱ्यांच्या मागण्यांसाठी रस्त्यावरची लढाई उभारण्याची भूमिका त्यांनी घेतली आहे.
२८ सप्टेंबरला राज्यभर हल्लाबोल; प्रत्येक जिल्हाधिकारी कार्यालयावर शेतकऱ्यांची धडक
सरकारने दुष्काळ जाहीर केला असला, तरी शेतकऱ्यांना प्रत्यक्ष आर्थिक मदत मिळावी, या मागणीसाठी क्रांतिकारी शेतकरी संघटनेने आंदोलनाची भूमिका कायम ठेवली आहे. सोमवार, २८ सप्टेंबर रोजी सकाळी ११ वाजता राज्यातील प्रत्येक जिल्हाधिकारी कार्यालयावर शेतकरी हल्लाबोल आंदोलन करणार आहेत. हेक्टरी एक लाख रुपये नुकसानभरपाई, दोन हेक्टरची मर्यादा रद्द करून संपूर्ण क्षेत्रासाठी मदत आणि शेतकऱ्यांना ठोस आर्थिक दिलासा या प्रमुख मागण्यांसाठी हा लढा उभारण्यात येणार आहे. “शेतकरी बांधवांनो, आता घरात बसण्याची वेळ नाही, मैदानात उतरून संघर्ष करण्याची वेळ आहे.
जात, धर्म, पक्ष आणि गट-तट बाजूला ठेवून आपल्या हक्कासाठी एकजुटीने रस्त्यावर उतरा. सरकारने दुष्काळ जाहीर केला, पण आता शेतकऱ्यांच्या हातात प्रत्यक्ष मदत मिळाली पाहिजे. हेक्टरी एक लाख रुपये नुकसानभरपाई मिळवण्यासाठी २८ सप्टेंबरला प्रत्येक जिल्हाधिकारी कार्यालयावर धडक द्या,” असे आवाहन रविकांत तुपकर यांनी केले आहे. Duskalnews
Farmernews/दुष्काळाच्या घोषणेनंतरही शेतकऱ्यांच्या मदतीचा प्रश्न ऐरणीवर आला असून, २८ सप्टेंबरच्या राज्यव्यापी हल्लाबोल आंदोलनातून सरकारवर किती दबाव निर्माण होतो, याकडे आता राज्यातील शेतकरी वर्गाचे लक्ष लागले आहे.
UN में फॉर्म 47 का जिक्र
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया। भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के लिए 'फॉर्म 47 सरकार' शब्द का इस्तेमाल किया।
क्या होता है फॉर्म 47
पाकिस्तान के चुनाव में फॉर्म 47 चुनाव नतीजों से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज है। इसे रिटर्निंग ऑफिसर तैयार करता है और इसमें निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों से मिले वोटों को जोड़कर शुरुआती यानी प्रोविजनल नतीजा तैयार किया जाता है। इसमें उम्मीदवारों को मिले वोट और खारिज वोटों का विवरण शामिल होता है।
फॉर्म 45 और 46 से जुड़ी प्रक्रिया
फॉर्म 47 तैयार करने से पहले मतदान केंद्रों से फॉर्म 45 और फॉर्म 46 के जरिए वोटों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जाती है। इसके बाद चुनाव परिणाम की प्रक्रिया में फॉर्म 48 और अंतिम आधिकारिक परिणाम के लिए फॉर्म 49 का इस्तेमाल किया जाता है।
शहबाज सरकार को क्यों कहा गया फॉर्म 47 सरकार
2024 के पाकिस्तान आम चुनाव के बाद PTI ने आरोप लगाया था कि उसके उम्मीदवारों को फॉर्म 45 में मिले वोटों और फॉर्म 47 में दर्ज आंकड़ों में अंतर था। पार्टी ने चुनावी जनादेश में बदलाव का आरोप लगाया और इसी आधार पर शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार को 'फॉर्म 47 सरकार' कहना शुरू किया।
2024 चुनाव में कितना मतदान हुआ
8 फरवरी 2024 को हुए पाकिस्तान के आम चुनाव में 12.86 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत थे। करीब 6.13 करोड़ वोट पड़े और कुल मतदान प्रतिशत 47.65 प्रतिशत रहा। चुनाव के लिए देशभर में 90 हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए थे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत 26 सितंबर 2026 को पटना में देश के पहले Victim Rights Centre का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण यानी BSLSA के परिसर में शुरू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अपराध के पीड़ितों को कानूनी अधिकारों और सहायता से जुड़ी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है। केंद्र को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है और इसके जरिए पीड़ितों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों और एजेंसियों के चक्कर लगाने की जरूरत कम करने का प्रयास किया जाएगा।
एक ही जगह मिलेगी कई तरह की सहायता
Victim Rights Centre को सिंगल विंडो व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है। यहां पीड़ित के मामले का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और उसे एक Victim Case Number दिया जाएगा। केंद्र पीड़ित की कानूनी, चिकित्सकीय, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक, सुरक्षा और पुनर्वास संबंधी जरूरतों का आकलन करेगा। इसके बाद संबंधित विभागों और संस्थाओं के साथ समन्वय कर सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह भी है कि पीड़ित को अपनी पूरी घटना अलग-अलग अधिकारियों के सामने बार-बार बताने की परेशानी न हो।
FIR से अपील तक कानूनी मदद का प्रावधान
केंद्र के माध्यम से पीड़ितों को FIR दर्ज कराने के चरण से लेकर जमानत, ट्रायल, सजा और अपील तक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मुआवजे से संबंधित आवेदन, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और गवाह सुरक्षा जैसी जरूरतों में भी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक सहायता और कोर्ट में साथ देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पीड़ितों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सहायता एक व्यवस्थित तरीके से मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2026 को दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग और युवा शामिल हुए। भक्ति संगीत को आधुनिक कॉन्सर्ट शैली में प्रस्तुत किया गया। पीएम मोदी ने कार्यक्रम में बैठकर कलाकारों की प्रस्तुतियां सुनीं और कई मौकों पर तालियां बजाते नजर आए।
‘हनुमान अंश’ का ‘पार्वती’ भजन बना आकर्षण
कार्यक्रम के दौरान फिल्म ‘हनुमान अंश’ से जुड़े गायक साधु एस. तिवारी ने चर्चित भक्ति गीत ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ प्रस्तुत किया। यह गीत भगवान शिव और माता पार्वती की कथा को सरल और देसी अंदाज में प्रस्तुत करता है। प्रस्तुति के दौरान प्रधानमंत्री मोदी गीत सुनते और उसके साथ ताल मिलाते नजर आए। इस दौरान उनके खंजरी बजाने के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं।
खंजरी बजाते और तालियां बजाते नजर आए PM मोदी
‘पार्वती’ भजन की प्रस्तुति के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने खंजरी बजाकर ताल मिलाई और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम से सामने आए वीडियो में वह भजन सुनते हुए और कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लेते दिखाई दिए। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने गीत के साथ गुनगुनाया भी। हालांकि इसे ‘भक्ति में लीन’ कहना एक वर्णनात्मक व्याख्या है; उपलब्ध वीडियो में उन्हें संगीत सुनते, तालियां बजाते और खंजरी बजाते देखा गया है।
भारत में FDI बढ़ा
भारत में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में FDI इक्विटी इनफ्लो 6 प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 18.62 अरब डॉलर था।
जापान बना सबसे बड़ा निवेशक
पहली तिमाही में जापान 5.71 अरब डॉलर के निवेश के साथ भारत में सबसे बड़ा FDI निवेशक रहा। इसके बाद सिंगापुर 5.22 अरब डॉलर, मॉरीशस 2.31 अरब डॉलर, नीदरलैंड 1.38 अरब डॉलर और अमेरिका 1.34 अरब डॉलर के साथ रहे।
अमेरिकी निवेश में 76 फीसदी गिरावट
अप्रैल-जून 2026-27 में अमेरिका से FDI 76 प्रतिशत से अधिक घटकर 1.34 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 5.61 अरब डॉलर था। संयुक्त अरब अमीरात से भी निवेश घटकर 86.8 करोड़ डॉलर रहा।
अप्रैल में FDI में तेज उछाल
अप्रैल 2026 में भारत में FDI करीब दोगुना बढ़कर 12.1 अरब डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 6.6 अरब डॉलर था। मई में FDI 2.8 अरब डॉलर और जून में 4.91 अरब डॉलर रहा।
सेवा क्षेत्र में सबसे ज्यादा निवेश
FDI आकर्षित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र 7.04 अरब डॉलर के साथ सबसे आगे रहा। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2.84 अरब डॉलर, व्यापार में 1.92 अरब डॉलर, गैर-पारंपरिक ऊर्जा में 1.24 अरब डॉलर और ऑटो क्षेत्र में 62.2 करोड़ डॉलर का निवेश आया।