सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की NCERT सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े विवादित अध्याय पर स्वतः संज्ञान की कार्यवाही बंद कर दी है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायपालिका आलोचना से परहेज नहीं करती और निष्पक्ष, तथ्यपरक तथा रचनात्मक आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था में जरूरी है। हालांकि ऐसी गंभीर बातें, जिनकी पुष्टि न हुई हो, उन्हें बिना सत्यापन के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना उचित नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब विवादित अध्याय को विशेषज्ञ पैनल की सिफारिशों के आधार पर बदले जाने की जानकारी दी गई।
क्या था NCERT की किताब का विवाद
विवाद NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक Exploring Society: India and Beyond, Part II के अध्याय 4 ‘The Role of the Judiciary in our Society’ में शामिल ‘Corruption in the Judiciary’ शीर्षक वाले हिस्से को लेकर शुरू हुआ था। फरवरी 2026 में मामला सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और विवादित सामग्री के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण तथा डिजिटल प्रसार पर रोक लगा दी थी। अदालत ने उस समय सामग्री को न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बताते हुए गंभीर आपत्ति जताई थी।
आलोचना जरूरी, लेकिन तथ्यपरक हो
मामले को बंद करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आलोचना और बिना पुष्टि किए गए दावों के बीच स्पष्ट अंतर बताया। पीठ के मुताबिक न्यायपालिका की निष्पक्ष, सूचनापरक और रचनात्मक समीक्षा संस्थागत जवाबदेही तथा आत्म-सुधार के लिए जरूरी है। लेकिन ऐसी आलोचना उचित मंच और तार्किक तरीके से होनी चाहिए तथा बिना सत्यापन के उसे ऐसे स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए, जो बच्चों के लिए तैयार किया गया हो। कोर्ट ने इसे ‘जिम्मेदार विमर्श’ और ‘बिना पुष्टि के दावे’ के बीच का अंतर बताया।






