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India Bloc March: सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग तेज

चुनाव आयोग तक मार्च करेगा इंडिया ब्लॉक
विपक्षी सांसद मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग के मुख्यालय ‘निर्वाचन सदन’ तक मार्च करेंगे। दिए गए स्रोत के अनुसार यह प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, वोट चोरी के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर किया जा रहा है। इंडिया ब्लॉक की कई पार्टियों के नेता इस मार्च में शामिल होंगे और चुनाव आयोग के सामने मतदाता सूची तथा SIR प्रक्रिया से जुड़ी अपनी चिंताएं रखेंगे।

 

वोट चोरी और SIR को लेकर विरोध
यह मार्च विपक्ष के लगातार चल रहे अभियान का हिस्सा बताया गया है। विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित खामियों को लेकर चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने तीन सदस्यीय निकाय में मतभेद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

 

जयराम रमेश ने मार्च को लेकर क्या कहा
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 5 अक्टूबर को बताया था कि इंडिया गठबंधन के तय कार्यक्रम के तहत सभी विपक्षी दलों के सांसद मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे। उन्होंने कहा था कि मार्च कथित वोट चोरी के मुद्दे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर निकाला जाएगा।

 

सुबह 10:30 बजे जुटेंगे विपक्षी सांसद
जयराम रमेश के अनुसार विपक्षी सांसदों को मार्च से पहले सुबह 10:30 बजे संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्र होने के लिए कहा गया है। इसके बाद सुबह 11 बजे सभी विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर शांतिपूर्ण मार्च करेंगे। मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।

 

आगे भी जारी रहेगा विपक्ष का अभियान
स्रोत के अनुसार विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर आगे भी कई स्तरों पर कार्यक्रम तय किए हैं। 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर पदयात्राएं आयोजित करने की योजना है। इसके बाद 10 से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर बैठकें होंगी। 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक राज्य और जिला स्तर के साथ गांवों में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैलियां आयोजित करने की योजना बताई गई है। विपक्ष इस अभियान के दौरान उन 13.5 करोड़ मतदाताओं से जुड़े आंकड़ों की जानकारी जुटाने की बात कह रहा है, जिनके नाम वोटर लिस्ट में नहीं होने का दावा किया गया है।

 

निर्वाचन सदन के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई
अधिकारियों के मुताबिक चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास मंगलवार को सुरक्षा बढ़ा दी गई है। SIR प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग संगठनों के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद नई दिल्ली के महत्वपूर्ण स्थानों पर पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। यह विरोध प्रदर्शन 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की बैठक के बाद घोषित किए गए कार्यक्रमों के तहत किया जा रहा है।

 

चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज
SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की आलोचना की गई है। हालांकि आयोग ने अपने तीन सदस्यीय निकाय में मतभेद होने के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि प्रक्रिया से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ऐसे में मंगलवार का मार्च विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।

UP Supplementary Budget: चुनाव से पहले यूपी सरकार ला सकती है एक और बजट

चुनाव से पहले एक और अनुपूरक बजट की तैयारी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार एक और अनुपूरक बजट ला सकती है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव को देखते हुए अंतरिम बजट से पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट लाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार दिसंबर में प्रस्तावित शीतकालीन सत्र में इसे विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है और वित्त विभाग को इसकी तैयारियों के लिए संकेत दिए गए हैं।

 

महिलाओं और युवाओं की योजनाओं पर नजर
प्रस्तावित अनुपूरक बजट में नई योजनाओं के साथ मौजूदा योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं और युवाओं से जुड़ी घोषणाओं पर विशेष नजर है। महिलाओं को कारोबार शुरू करने के लिए 40 हजार रुपये की सहायता देने वाली योजना को बजट के जरिये अमलीजामा पहनाने की चर्चा है। इसके अलावा युवाओं के लिए नई योजनाओं और उनके लिए धन आवंटन की संभावना जताई गई है।

 

स्कूटी वितरण के लिए भी मिल सकता है अतिरिक्त बजट
महिलाओं और युवाओं से जुड़ी संभावित घोषणाओं के अलावा स्कूटी वितरण जैसी योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त बजट का इंतजाम किए जाने की संभावना है। हालांकि इन योजनाओं को लेकर अंतिम निर्णय और बजट में वास्तविक प्रावधान की जानकारी अनुपूरक बजट पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल रिपोर्ट में इन्हें संभावित योजनाओं के तौर पर बताया गया है।

 

पहले ही आ चुका है 59 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट
वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार पहले ही एक अनुपूरक बजट पेश कर चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार 4 अगस्त को विधानसभा में 59,019.54 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट पेश किया गया था। यदि दिसंबर में दूसरा अनुपूरक बजट पेश होता है, तो यह मौजूदा वित्तीय वर्ष का दूसरा अनुपूरक बजट होगा।

 

मौजूदा कार्यकाल का 11वां अनुपूरक बजट हो सकता है
रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 तक राज्य सरकार के मौजूदा कार्यकाल में 10 अनुपूरक बजट पेश किए जा चुके हैं। इनमें 2018-19 में दो, 2021-22 में दो और 2024-25 में दो अनुपूरक बजट शामिल हैं। इसके अलावा 2019-20, 2022-23, 2025-26 और 2026-27 में एक-एक अनुपूरक बजट पेश किया गया। दिसंबर में दूसरा अनुपूरक बजट आता है तो यह मौजूदा कार्यकाल का 11वां और वित्तीय वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट होगा।

Garba Entry Row: आस्था नहीं तो गरबा पंडाल में न जाएं: विजय शर्मा

आस्था नहीं तो गरबा पंडाल में न जाएं
छत्तीसगढ़ में शारदीय नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों के बीच पंडालों में प्रवेश को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज की अपील पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि गरबा केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि मां की आराधना और धार्मिक आस्था से जुड़ा माध्यम है। उनके अनुसार जिन लोगों की गरबा और मां की आराधना में आस्था नहीं है, उन्हें गरबा पंडालों में जाने से बचना चाहिए।

 

सलीम राज के बयान से सौ प्रतिशत सहमत: शर्मा
विजय शर्मा ने कहा कि वह वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के बयान से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि गरबा को सामान्य मनोरंजन या इवेंट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका संबंध मां की आराधना से है। डिप्टी सीएम ने आयोजकों से भी धार्मिक भावना और आयोजन के उद्देश्य का सम्मान करने वाली व्यवस्था लागू करने की अपील की।

 

आयोजकों से व्यवस्था लागू करने की अपील
डिप्टी सीएम ने कहा कि गरबा पंडालों में आने वाले लोगों को आयोजन की धार्मिक भावना और आस्था का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना है कि जब किसी कार्यक्रम का उद्देश्य मां की आराधना हो, तो उसमें शामिल होने वालों की श्रद्धा भी महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर उन्होंने आयोजकों से इस व्यवस्था को लागू करने की अपील की है।

 

सुकमा में बाहरी लोगों की एंट्री पर भी बोले शर्मा
सुकमा जिले के ग्रामीण इलाकों में पंचायतों की ओर से गांवों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए जाने के सवाल पर भी विजय शर्मा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है।

 

ग्राम सभा को संस्कृति संरक्षण का अधिकार
विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि पंचायत क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आवाजाही पर सामान्य तौर पर प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्राम सभा निर्णय ले सकती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए ग्राम सभा को मिले अधिकारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

British Airways Emergency: 37 हजार फीट से 9 हजार फीट पर आया विमान

British Airways की फ्लाइट में इमरजेंसी
लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से शिकागो जा रही British Airways की फ्लाइट BA295 में उड़ान के दौरान इमरजेंसी की स्थिति सामने आई। दिए गए स्रोत के अनुसार, आयरलैंड के ऊपर उड़ रहे Boeing 777-200ER विमान ने अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी ट्रांसपोंडर कोड ‘Squawk 7700’ एक्टिव किया। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा में विमान की ऊंचाई में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद फ्लाइट ने अपनी दिशा बदलकर लंदन लौटने के संकेत दिए।

 

37 हजार फीट से 9 हजार फीट तक आई ऊंचाई
फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक BA295 करीब 37,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी। इसके बाद विमान तेजी से नीचे आया और लगभग 9,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। यानी ट्रैकिंग डेटा में करीब 28,000 फीट की गिरावट दर्ज हुई। इसके बाद विमान ने अपनी दिशा बदली और शिकागो जाने के बजाय लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट की ओर लौट गया।

 

आयरलैंड के ऊपर भेजा गया Squawk 7700
रिपोर्ट के अनुसार, BA295 ने आयरलैंड के ऊपर Squawk 7700 कोड प्रसारित किया। विमानन क्षेत्र में 7700 एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी ट्रांसपोंडर कोड है, जिसका इस्तेमाल पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान में सामान्य आपात स्थिति की सूचना देने के लिए करते हैं। इस सिग्नल के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल विमान को आवश्यक सहायता और प्राथमिकता देने की व्यवस्था कर सकता है।

 

क्यों वापस लौटी फ्लाइट?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विमान को इतनी तेजी से नीचे उतारने और वापस Heathrow लौटने की जरूरत क्यों पड़ी। उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष तकनीकी खराबी, मेडिकल इमरजेंसी, मौसम संबंधी समस्या या अन्य ऑपरेशनल कारण की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है। British Airways की ओर से भी घटना और विमान के रास्ता बदलने की वजह को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

 

हीथ्रो से शिकागो के लिए रवाना हुई थी BA295
दिए गए स्रोत के अनुसार, फ्लाइट BA295 ने लंदन हीथ्रो के टर्मिनल 5 से शिकागो ओ'हेयर के लिए उड़ान भरी थी। विमान ने स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 11:50 बजे उड़ान भरी और निर्धारित यात्रा के दौरान लगभग 37,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा। इसके बाद आयरलैंड के ऊपर इमरजेंसी सिग्नल प्रसारित होने और ऊंचाई में बड़ी गिरावट के बाद विमान के वापस लंदन लौटने की जानकारी सामने आई।

 

7700 इमरजेंसी कोड का क्या मतलब है?
Squawk 7700 का इस्तेमाल विमान में किसी सामान्य आपात स्थिति की जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोल को देने के लिए किया जाता है। यह कोड रडार स्क्रीन पर दिखाई देता है और ATC को संकेत देता है कि विमान सामान्य स्थिति में नहीं है तथा उसे सहायता या प्राथमिकता की जरूरत हो सकती है। हालांकि, केवल 7700 कोड से यह पता नहीं चलता कि इमरजेंसी की वास्तविक वजह क्या थी। यह मेडिकल समस्या, तकनीकी परेशानी, मौसम या केबिन से जुड़ी किसी स्थिति सहित कई कारणों से इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

7700 का मतलब विमान दुर्घटना का खतरा नहीं
Squawk 7700 का सक्रिय होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि विमान दुर्घटना के खतरे में था। यह मुख्य रूप से एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान में सामान्य आपात स्थिति की सूचना देने वाला सिग्नल है। BA295 के मामले में विमान के Heathrow लौटने की जानकारी सामने आई है, लेकिन इमरजेंसी की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोत में नहीं दी गई है। एयरलाइन की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

Asian Games Medal Dip: 800 करोड़ के बावजूद एशियन गेम्स में घटे भारत के पदक

800 करोड़ के निवेश के बावजूद घटे भारत के पदक
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 21 स्वर्ण समेत कुल 85 पदक जीते और पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। हालांकि, यह प्रदर्शन 2023 के हांगझू एशियन गेम्स के मुकाबले कमजोर रहा, जहां भारत ने 28 स्वर्ण सहित 107 पदक जीते थे। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले संस्करण की तुलना में खेलों की तैयारी और वित्तीय सहायता पर खर्च करीब चार गुना बढ़ाकर लगभग 800 करोड़ रुपये किया गया, लेकिन कुल पदकों में करीब 20.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

 

निशानेबाजी में 7 पदकों की गिरावट
भारत के प्रदर्शन में सबसे बड़ी चिंता निशानेबाजी और एथलेटिक्स जैसे प्रमुख खेलों में दिखाई दी। निशानेबाजी में हांगझू के 22 पदकों के मुकाबले इस बार भारत को 15 पदक मिले। स्वर्ण पदकों की संख्या भी सात से घटकर तीन रह गई। एथलेटिक्स में भी पिछले संस्करण के 29 पदकों के मुकाबले इस बार 24 पदक मिले। हालांकि एथलेटिक्स में कांस्य पदक नौ से बढ़कर 14 हुए, लेकिन स्वर्ण और रजत पदकों में कमी का असर कुल प्रदर्शन पर पड़ा।

 

बैडमिंटन और टेनिस में भी निराशा
बैडमिंटन में भारत ने हांगझू एशियन गेम्स में एक स्वर्ण सहित तीन पदक जीते थे, लेकिन आइची-नागोया में टीम केवल एक पदक तक सीमित रही। टेनिस में पिछली बार भारत ने दो पदक जीते थे, जबकि इस बार खाता नहीं खुल सका। तीरंदाजी में भारत ने कुल पदकों के मामले में पिछला प्रदर्शन दोहराया, लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या पांच से घटकर तीन रह गई। इससे पता चलता है कि पदकों में कमी किसी एक खेल तक सीमित नहीं रही।

 

जापान ने 81 पदक बढ़ाए, चीन शीर्ष पर
एशियन गेम्स 2026 की पदक तालिका में चीन 341 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा। जापान और दक्षिण कोरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जबकि भारत चौथे स्थान पर बना रहा। मेजबान जापान के प्रदर्शन में बड़ी बढ़ोतरी हुई। हांगझू में 188 पदक जीतने वाला जापान इस बार 269 पदक तक पहुंचा। उसके स्वर्ण पदक भी 52 से बढ़कर 83 हो गए, यानी कुल पदकों में 81 की बढ़ोतरी हुई।

 

ईरान के प्रदर्शन से मिला अहम संकेत
ईरान ने भी इस एशियन गेम्स में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और 19 स्वर्ण पदकों के साथ छठा स्थान हासिल किया। रिपोर्ट में उसके सामने मौजूद क्षेत्रीय तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और सीमित परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि खेलों में सफलता केवल बजट पर निर्भर नहीं करती। प्रतिभा विकास, तैयारी, प्रशिक्षण व्यवस्था और खेल तंत्र की निरंतरता भी पदक प्रदर्शन को प्रभावित करती है।

 

बड़ा बजट, लेकिन जमीनी तैयारी पर सवाल
भारत के प्रदर्शन से यह सवाल सामने आया है कि बढ़ा हुआ बजट किस तरह पदकों में बदल रहा है। 800 करोड़ रुपये के निवेश के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, विदेशी एक्सपोजर और आधुनिक सुविधाएं देने पर जोर दिया गया था, लेकिन प्रमुख खेलों में पदकों की संख्या घट गई। रिपोर्ट के अनुसार, जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान, चयन प्रक्रिया, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और खिलाड़ियों की सहायता व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

 

310 से ज्यादा नए खिलाड़ियों पर अब नजर
आइची-नागोया एशियन गेम्स में 310 से अधिक नए खिलाड़ियों को मौका मिलना भारतीय खेलों की अगली पीढ़ी के लिए सकारात्मक संकेत बताया गया है। अब चुनौती इन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार करने की है। मौजूदा पदक विजेताओं के बाद अगली पीढ़ी तैयार करना और कमजोर पड़े खेलों में प्रदर्शन सुधारना भारत के लिए अगले बड़े खेल आयोजनों से पहले अहम लक्ष्य हो सकता है।

SC Questions Form 6: SIR घोषणा जोड़ने पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब

फॉर्म 6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल
मतदाता पंजीकरण के ऑनलाइन फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अदालत ने फॉर्म 6 में किए गए किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। पीठ ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद यह देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किए थे और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी।

 

फॉर्म 6 में जोड़ा गया था नया हिस्सा
सुनवाई के दौरान बताया गया कि पहली बार चुनाव आयोग के ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण फॉर्म 6 में एक नया हिस्सा जोड़ा गया था। इसमें नए मतदाता से उसके माता-पिता की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी कि क्या वे मतदाता सूची के आखिरी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में शामिल थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार फॉर्म के मूल कानूनी प्रारूप में बदलाव नहीं किया गया था।

 

SIR प्रक्रिया वाले राज्यों में घोषणा हटाई गई
जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां चुनाव आयोग ने अपने ECINET पोर्टल से फॉर्म 6 में जोड़ी गई SIR से संबंधित घोषणा को हटा दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान इसी बदलाव और इसके कानूनी आधार को लेकर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म में इस तरह की नई शर्तें जोड़ने का अधिकार नहीं था।

 

कोर्ट ने कहा- किसने किया बदलाव, यह देखेंगे
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि फॉर्म 6 में नई शर्तें जोड़कर इसे इस्तेमाल किया गया और इससे नए मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में किए गए किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की रिपोर्ट आने के बाद अदालत यह देखना चाहेगी कि किसने क्या बदलाव किया।

 

याचिका में बदलाव को बताया गया अनधिकृत
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2026 में ECINET पोर्टल पर फॉर्म 6 में डिजिटल तरीके से बदलाव किया गया। याचिका के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को आयुक्त संधू ने इस बदलाव को कथित तौर पर अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे हटाने का आदेश दिया था। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कानूनी अधिकार या मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन के बिना फॉर्म में बदलाव किया गया। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इस पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

 

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने भी SIR से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाताओं के अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। फिलहाल फॉर्म 6 में बदलाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

PM Surya Ghar Camp: भोपाल में 6 अक्टूबर को पीएम सूर्य घर योजना का शिविर

भोपाल में 6 अक्टूबर को लगेगा शिविर
भोपाल के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत 6 अक्टूबर 2026 को विशेष शिविर लगाया जाएगा। सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत आयोजित इस शिविर में उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर, सब्सिडी, आवेदन प्रक्रिया, ऋण सुविधा और सोलर संयंत्र की स्थापना से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन दिया जाएगा।

 

रविन्द्र भवन के हंसध्वनि हॉल में आयोजन
शिविर का आयोजन भोपाल के रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि हॉल में किया जाएगा। उपभोक्ता सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यहां पहुंचकर पीएम सूर्य घर योजना और घर की छत पर सोलर संयंत्र लगाने से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। शिविर में प्रवेश गेट नंबर 1 से होगा।

 

रूफटॉप सोलर और सब्सिडी की मिलेगी जानकारी
शिविर में उपभोक्ताओं को घर की छत पर सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया के साथ योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा ऋण सुविधा और सोलर संयंत्र की स्थापना से जुड़े विषयों पर भी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का लाभ लेने या आवेदन प्रक्रिया को समझने वाले उपभोक्ता शिविर में संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों से जानकारी ले सकेंगे।

 

शिविर का समय और स्थान
पीएम सूर्य घर योजना का यह शिविर 6 अक्टूबर 2026 को रविन्द्र भवन के हंसध्वनि हॉल, भोपाल में आयोजित होगा। शिविर का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है और उपभोक्ताओं के लिए प्रवेश गेट नंबर 1 से रहेगा।

 

उपभोक्ताओं से पहुंचने की अपील
मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल की ओर से विद्युत उपभोक्ताओं से शिविर में पहुंचकर योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है। शिविर का उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग और रूफटॉप सोलर से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार योजना की प्रक्रिया को समझ सकें।

 

इन विषयों पर मिलेगी मदद
शिविर में रूफटॉप सोलर लगाने की प्रक्रिया, पीएम सूर्य घर योजना, सब्सिडी, आवेदन करने की प्रक्रिया, ऋण सुविधा और सोलर संयंत्र की स्थापना से जुड़े विषयों पर जानकारी दी जाएगी। उपभोक्ता निर्धारित समय में शिविर में पहुंचकर योजना से संबंधित जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

Russia Plague Fear: रूस में प्लेग का खौफ, लैब कर्मचारी की मौत से हड़कंप

लैब कर्मचारी की मौत के बाद बढ़ी चिंता
रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद रहस्यमयी संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। इरकुत्स्क के शेलेखोव स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला दर्या शिपिलोवा की मौत के बाद करीब 200 लोगों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। हालांकि, रूस के अधिकारियों ने उनकी मौत की वजह प्लेग होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और फिलहाल इसे अज्ञात कारण से हुई निमोनिया के तौर पर देखा जा रहा है।

 

लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने का दावा
मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि शिपिलोवा ऐसे संस्थान में काम करती थीं, जहां प्लेग समेत गंभीर संक्रामक रोगों के रोगजनकों पर शोध किया जाता है। स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लैब में सैंपल संभालने के दौरान एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने और गंभीर निमोनिया जैसे लक्षण सामने आने की बात कही गई। हालांकि, टेस्ट ट्यूब में मौजूद सामग्री और उनकी बीमारी के बीच सीधा संबंध अभी तक साबित नहीं हुआ है।

 

200 लोग निगरानी में रखे गए
शिपिलोवा की मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू की। करीब 200 लोगों को एहतियात के तौर पर निगरानी में रखा गया है। शुरुआती जांच में इन लोगों में संक्रमण के स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आए हैं। अधिकारियों की ओर से संपर्क में आए लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी संभावित संक्रमण का समय रहते पता लगाया जा सके।

 

न्यूमोनिक प्लेग को लेकर सवाल
इस घटना के बीच न्यूमोनिक प्लेग का नाम सामने आने से चिंता बढ़ी है। यह प्लेग का एक गंभीर रूप है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। हालांकि, मौजूदा मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शिपिलोवा की बीमारी किस संक्रमण की वजह से हुई थी। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बीमारी का उनके लैब में काम करने से कोई सीधा संबंध था या नहीं।

 

रूस ने प्लेग फैलने से किया इनकार
रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी ने फिलहाल देश में प्लेग फैलने जैसी स्थिति से इनकार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच में अब तक शिपिलोवा के नमूनों से उनके पेशे से जुड़े किसी खास सूक्ष्मजीव की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस घटना को फिलहाल प्लेग का प्रकोप कहना जल्दबाजी होगी और बीमारी की वास्तविक वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

 

अमेरिकी अधिकारी भी रख रहे नजर
मामले पर अमेरिकी अधिकारी भी नजर रख रहे हैं और रूस से स्थिति की स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह तय नहीं है कि महिला की मौत किसी अज्ञात संक्रमण के कारण हुई या लैब में काम करने के दौरान किसी रोगजनक के संपर्क में आने से उनकी हालत बिगड़ी। स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

Delhi Riots Pleas Rejected: दिल्ली दंगों पर नेताओं के खिलाफ FIR की याचिकाएं खारिज

नेताओं के खिलाफ FIR की याचिकाएं खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में कई नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ ने याचिकाओं के एक समूह पर यह फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों को दिल्ली दंगों से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।

 

अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा समेत नेताओं के नाम
शेख मुजतबा फारूक की ओर से दायर याचिकाओं में बीजेपी नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों की वजह से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के। इन दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत होने का उल्लेख याचिका से जुड़ी रिपोर्ट में किया गया है।

 

सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं का भी जिक्र
लॉयर्स वॉइस की ओर से दायर एक अन्य याचिका में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया और असदुद्दीन ओवैसी सहित कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई थी। इस याचिका में एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीश के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई थी। अदालत ने संबंधित याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया।

 

दंगों में पुलिस की भूमिका की जांच की मांग भी खारिज
बृंदा करात और जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली दंगों में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की मांग की थी। इसके अलावा CAA विरोधी प्रदर्शनों को लेकर कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश और विदेशी फंडिंग की जांच के लिए NIA जांच की मांग वाली याचिका भी दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने इन मांगों से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

 

जामिया मामले में SIT जांच की मांग भी खारिज
याचिकाओं के एक अन्य समूह में 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने इस मांग से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। इस तरह अदालत के फैसले में दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भाषणों, पुलिस की भूमिका और जामिया की पुलिस कार्रवाई से संबंधित विभिन्न जांच मांगों पर फैसला शामिल रहा।

 

हाई कोर्ट के फैसले से याचिकाओं पर विराम
दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और विभिन्न जांच एजेंसियों से जांच कराने की मांग करने वाली इन याचिकाओं पर फिलहाल हाई कोर्ट स्तर पर कार्यवाही समाप्त हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया है और मामले से जुड़े आरोपों पर कोई अलग से दोषसिद्धि का निष्कर्ष इस आदेश के आधार पर नहीं बताया गया है।

Protesters Detained: यौन उत्पीड़न के आरोपों पर प्रदर्शनकारी हिरासत में

महिला पत्रकारों समेत 17 प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संसद मार्ग थाने के सामने रातभर धरने पर बैठे तीन महिला पत्रकारों समेत कुल 17 लोगों को सोमवार सुबह पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी आरोपों की जांच और संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR की मांग कर रहे थे।

 

प्रदर्शनकारियों को दिल्ली कैंट थाने ले गई पुलिस
संसद मार्ग थाने के सामने प्रदर्शन करने वालों में फ्रीलांस पत्रकार, यूट्यूबर और एक कथित पीड़ित भी शामिल थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को एक-एक करके बस में बैठाया और दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन ले गई। एक महिला प्रदर्शनकारी ने मीडिया को बताया कि वे पुलिस अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत की स्थिति जानना चाहते थे।

 

नई दिल्ली जिले में धारा 163 का हवाला
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू है और संसद मार्ग पर बिना अनुमति लोगों के इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को मौके से हटने के लिए कहा गया था, लेकिन उनके नहीं हटने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। अधिकारी ने कहा कि उन्हें जल्द रिहा किया जाना था।

 

महिला पत्रकारों ने भी दर्ज कराई शिकायत
DCP नेहा यादव के अनुसार, शनिवार को तीन महिला पत्रकारों ने हिरासत के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित बदसलूकी के आरोप लगाते हुए अलग-अलग शिकायतें दी थीं। पुलिस के अनुसार, शिकायतें दर्ज करने के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और सभी शिकायतों को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया।

 

क्राइम ब्रांच कर रही आरोपों की जांच
पुलिस के मुताबिक, महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन को कवर करने के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया। इन आरोपों के बाद मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों की जांच की जा रही है। प्रदर्शनकारी हालांकि संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखे हुए थे।

 

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से हटने को कहा था
DCP नेहा यादव के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को धारा 163 के प्रावधानों के बारे में पहले ही जानकारी दी गई थी। पुलिस का कहना है कि बिना लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना और प्रदर्शन करना प्रतिबंधित था। इसी आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अपनी शिकायत की स्थिति जानने और FIR की मांग को लेकर वहां मौजूद थे।