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Bhim Army Nationwide Protest: भीम आर्मी का देशभर में प्रदर्शन

24 सितंबर 2026 को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों की भागीदारी से जुड़ी मांगों को लेकर कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। यह गतिविधियां केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों और जिलों में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे जाने की खबरें सामने आई हैं। पूर्वी सिंहभूम में कार्यकर्ताओं ने सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में SC, ST, OBC, महिलाओं और अन्य वंचित समुदायों को उचित भागीदारी देने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की।

दिल्ली में जंतर-मंतर प्रदर्शन की अनुमति नहीं
भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी की ओर से 24 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'संपूर्ण भागीदारी आंदोलन' आयोजित करने की योजना थी। आंदोलन में महिला आरक्षण, आरक्षण व्यवस्था और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व समेत कई मुद्दे उठाए जाने थे। हालांकि दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के बजाय अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन और ज्ञापन देने का रास्ता अपनाया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी 24 सितंबर को लोक निवास के आसपास प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए कई मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की एडवाइजरी जारी की।

24 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन
भीम आर्मी एकता मिशन और आजाद समाज पार्टी से जुड़े संगठनों ने कई स्थानों पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे। सिरमौर में दिए गए 24 सूत्रीय ज्ञापन में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए कोटे के भीतर कोटा, सरकारी सेवाओं में आरक्षण के प्रावधानों का पालन और बैकलॉग पदों को भरने जैसी मांगें रखी गईं। संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति और प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। ये मांगें संबंधित संगठनों की ओर से रखी गई हैं और इन्हें सरकारी नीति या निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

 

CJP Gives 48-Hour Ultimatum: ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम, CJP ने दी देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

48 घंटे का अल्टीमेटम
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 48 घंटे का समय दिया है। उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर संगठन देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा और दिल्ली में ‘जंतर मंतर 2.0’ प्रदर्शन किया जाएगा।

 

SIR को लेकर विवाद
यह मांग द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद सामने आई है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली से जुड़े फैसलों पर कई मौकों पर सवाल उठाए थे। चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय और आंतरिक जांच-परख प्रक्रिया deliberations का सामान्य हिस्सा हैं और SIR समेत पिछले वर्ष के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

 

CJP की मांगें
CJP के सह संयोजक सौरव दास ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की। संगठन ने SIR को 2025 की मतदाता सूची की स्थिति में वापस करने, SIR से जुड़ी फाइलों को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली समिति के पास रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की मांग भी रखी है।

 

आरोपों पर EC का पक्ष
CJP ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों को लेकर कई आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों का बचाव किया है और कहा है कि आयोग के फैसले तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए।

 

Wangchuk Demands Shah Resignation: लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की

अमित शाह के इस्तीफे की मांग
लद्दाख में लेह पुलिस फायरिंग में चार नागरिकों की मौत की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। 20 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद सभा को संबोधित करते हुए वांगचुक ने पिछले साल हुई मौतों की जिम्मेदारी तय करने की मांग रखी।

 

लद्दाख में बंद
पिछले साल की पुलिस कार्रवाई में चार स्थानीय लोगों की मौत के विरोध में 24 सितंबर को पूरे लद्दाख में बंद रहा। वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोगों ने लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाईं और सवाल किया कि 2025 में हिंसा की स्थिति क्यों बनी।

 

छठी अनुसूची का मुद्दा
वांगचुक ने अपने भाषण में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने के कथित पुराने वादे का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र के साथ लंबे समय तक चली बातचीत के बावजूद इस मांग पर सहमति नहीं बनी। ये दावे वांगचुक के बयान के रूप में हैं।

 

Congress Plans Nationwide Protest: कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

देशव्यापी प्रदर्शन
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 25 सितंबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी ने अपने प्रदेश संगठनों को राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने के निर्देश दिए हैं।

 

इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। पार्टी ने उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग भी रखी है।

 

SIR को लेकर विवाद
यह विरोध मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच हो रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आयोग के भीतर आपत्तियां दर्ज की थीं।

 

EC का पक्ष
चुनाव आयोग ने इन घटनाक्रमों के बीच कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचारों पर चर्चा होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इस मामले को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक तथा संस्थागत बहस जारी है।

 

Supreme Court Hears Key Cases: चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की अलग रायq

तीन मामलों पर सुनवाई
23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था और छात्रा आकृति चौधरी से जुड़े NSA मामले पर अहम सुनवाई हुई। चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को लेकर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में अलग-अलग राय सामने आई, जबकि NSA मामले में 24 सितंबर को कोर्ट ने अपने आदेश को स्पष्ट किया।

 

चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून
मामला Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 से जुड़ा है। इस कानून के तहत CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री वाली तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है।

 

पीठ में अलग-अलग राय
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने याचिकाओं को पांच सदस्यीय संविधान पीठ को भेजने की मांग स्वीकार नहीं की, जबकि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने माना कि कानून की संवैधानिक वैधता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल पहली बार सीधे सामने आए हैं और बड़ी पीठ से सुनवाई की जरूरत है। दोनों जजों ने मामले को CJI के समक्ष रखने पर सहमति जताई।

 

स्वतंत्रता पर जोर
जस्टिस दत्ता ने कहा कि चुनाव आयोग का केवल स्वतंत्र होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका स्वतंत्र दिखाई देना भी जरूरी है। उन्होंने नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री की भूमिका को लेकर स्वतंत्र संतुलन से जुड़े सवाल उठाए।

 

सरकार की दलील
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नियुक्ति व्यवस्था का बचाव किया। उन्होंने 2023 के Anoop Baranwal फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय संसद की ओर से कानून न होने के कारण कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था बनाई थी, जबकि बाद में संसद ने नियुक्ति प्रक्रिया के लिए कानून बनाया।

 

कॉलेजियम पर बहस
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की तुलना न्यायपालिका की कॉलेजियम व्यवस्था से की गई। इस पर जस्टिस दत्ता ने ‘जज ही जजों को नियुक्त करते हैं’ वाली सामान्य धारणा पर टिप्पणी करते हुए न्यायिक नियुक्तियों में सरकार, प्रशासनिक तंत्र, खुफिया रिपोर्ट और राष्ट्रपति की मंजूरी सहित कई स्तरों का उल्लेख किया।

 

सरकार की मंजूरी पर सवाल
जस्टिस दत्ता ने कॉलेजियम की सिफारिशों को कार्यपालिका द्वारा चुनिंदा तरीके से मंजूरी दिए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ नामों को मंजूरी और कुछ को रोकने की स्थिति न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया और न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े कर सकती है।

 

आकृति चौधरी का NSA मामला
दूसरा अहम मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी से जुड़ा है। अप्रैल 2026 में नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तारी के बाद उन पर National Security Act लगाया गया था। 2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी NSA हिरासत रद्द करते हुए गौतम बुद्ध नगर की DM मेधा रूपम के खिलाफ टिप्पणियां की थीं और 5 लाख रुपये के भुगतान का निर्देश दिया था।

 

No UPI Day: 2 अक्टूबर को व्यापारी मनाएंगे ‘नो UPI डे’

नो UPI डे
देशभर के कई व्यापारी संगठन 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन ‘नो UPI डे’ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। यह विरोध 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ है। प्रस्ताव के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर यह शुल्क लागू होना है।

 

व्यापारियों का विरोध

व्यापारी संगठन MDR शुल्क का विरोध करते हुए 2 अक्टूबर को UPI QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और डिजिटल पेमेंट से जुड़े अन्य उपकरणों को काले कपड़े से ढककर अपना विरोध दर्ज कराने की बात कह रहे हैं।
 

 

कई संगठन शामिल

इस अभियान में महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MCCIA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) और फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन समेत कई कारोबारी संगठनों के शामिल होने की बात कही गई है।

 

 

सरकार की बैठक

MDR शुल्क को लेकर सरकार जल्द ही खुदरा कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकती है। कारोबारियों की ओर से यह चिंता जताई गई है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर लगने वाला शुल्क ग्राहकों से वसूला जा सकता है। वहीं सरकारी सूत्रों के अनुसार इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी।

 

 

15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुल्क

सरकारी सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) समेत अन्य कारोबारी संगठनों के साथ बैठक कर सकते हैं। इसका उद्देश्य MDR को लेकर बनी आशंकाओं को दूर करना और कारोबारियों को ग्राहकों से शुल्क वसूलने से रोकना है।

 

 

बैंकों का जागरूकता अभियान

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) भी MDR को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य दुकानदारों और ग्राहकों के बीच शुल्क को लेकर भ्रम कम करना बताया गया है। कुछ क्षेत्रों में MDR के नाम पर दुकानदारों द्वारा UPI भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।

 

 

पेट्रोल पंपों का मामला

कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों द्वारा भी UPI भुगतान को लेकर आपत्ति जताई गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार पेट्रोल पंपों से जुड़ा मुद्दा मुख्य रूप से उनके मार्जिन और पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों के बीच का विषय है। इसे सीधे UPI MDR शुल्क से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

 

 

MDR की राशि का बंटवारा

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR में 40 प्रतिशत राशि बैंकों, 30 प्रतिशत मर्चेंट बैंक या पेमेंट गेटवे, 20 प्रतिशत UPI ऐप और 10 प्रतिशत UPI के स्पॉन्सर बैंक को मिलने की व्यवस्था बताई गई है। सरकार को इस शुल्क से कोई हिस्सा नहीं मिलने की बात कही गई है।

 

Farmernews/आत्महत्या करण्यास परवानगी द्यावी तरुण शेतकऱ्याने स्वतःच्या रक्ताने लिहिले मुख्यमंत्र्यांना पत्र.

 

[संग्रामपूर तहसील कार्यालयात खळबळ.]

संग्रामपूर (सूर्या मराठी न्यूज)ः- कोरडा दुष्काळ जाहीर करा, तातडीने आर्थिक मदत द्या.. पिकं हातातून गेल्याने बावणबीरच्या तरुण शेतकऱ्याने रक्ताने लिहिलेले व्यथा पत्र मुख्यमंत्री यांचे नावे लिहून तहसील कार्यालयात ना.त.वसावे साहेब यांना आज दि.२२३/सप्टेंबर रोजी दिले आहे.त्यामुळे तहसिल कार्यालयात एकच खवबळ उडाली असल्याचे चित्र दिसून आले,

 

तालुक्यातील बावनबीर येथील विशाल मुरुख ह्या तरुण शेतकऱ्याने स्वतःचे रक्ताने लिहिलेल्या दिलेल्या नि वेदनात नमुद केले आहे की,बुलढाणा जिल्ह्यातील दुष्काळसदृश परिस्थितीमुळे शेतकरी अक्षरशः मेटाकुटीला आला असून, त्याच्या संतापाचा आणि हतबलतेचा टोकाचा प्रकार संग्रामपूर तालुक्यात समोर आला आहे..sangrampurnews

 

बावनबीर येथील तरुण शेतकरी विशाल मुरुख यांनी स्वतःच्या रक्ताने मुख्यमंत्री यांना उद्देशून पत्र लिहिले असून ‘मला आत्महत्या करू द्या’ असा मजकूर या पत्रात लिहिला आहे.. कोरडा दुष्काळ जाहीर करून शेतकऱ्यांना तातडीने आर्थिक मदत द्यावी.

 

अशी मागणी केली आहे. हे पत्र त्यांनी संग्रामपूर तहसील कार्यालयात तहसिल कार्यालयात ना.तह.वसावे साहेब सादर केले आहे.. खरीप हंगामासाठी उसने आणि व्याजाने पैसे उभे करून शेतीची पेरणी केली.. मात्र पावसाने दडी मारल्याने हाताशी आलेली पिके करपून गेलीत.cmomaharashtra

शेतातून सोयाबीनचा एक दाणाही हातात येण्याची परिस्थिती नसल्याचे शेतकऱ्यांचे म्हणणे आहे.. त्यामुळे कर्जाचा डोंगर, उत्पादनाची चिंता आणि पुढील हंगामाची अनिश्चितता यामुळे शेतकरी मोठ्या आर्थिक संकटात सापडला आहे.

Farmernews/याच नैराश्यातून विशाल मुरुख यांनी स्वतःच्या रक्ताने मुख्यमंत्र्यांना पत्र लिहित प्रशासनाचे लक्ष वेधण्याचा प्रयत्न केला आहे.आतातरी सरकारने दुष्काळ जाहीर करीन आर्थिक दृष्टीने गरीब शेतकऱ्यांना तरी आर्थिक सहाय्य अनुदान म्हणून जाहीर करुन मदत देणौयाची विनंती केली आहे.

Supreme Court On Cancer Drug Prices: SC ने कैंसर दवाओं के मूल्य अंतर को किया कड़ा सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने आवश्यक कैंसर दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर को लेकर 22 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान गंभीर चिंता जताई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने बताया गया कि एक आवश्यक कैंसर दवा का प्राइस टू रिटेलर यानी PTR करीब 2,700 रुपये है, जबकि पैकेट पर उसका अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP 27,000 रुपये दर्ज है। यानी रिटेलर कीमत और MRP के बीच करीब दस गुना का अंतर है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं में इतना बड़ा अंतर कैसे स्वीकार किया जा सकता है।

₹2700 से ₹27000 तक कैसे पहुंची कीमत
सुप्रीम कोर्ट के सामने दवा की PTR और MRP के बीच अंतर का यह उदाहरण रखा गया। कोर्ट ने इस पर सवाल करते हुए कहा कि मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ पहले से ही बहुत ज्यादा है और आवश्यक दवाओं की कीमतों में इतनी बड़ी असमानता गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, PTR और MRP का एक समान होना जरूरी नहीं है, क्योंकि वितरण श्रृंखला में स्टॉकिस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर के मार्जिन समेत अन्य लागतें भी शामिल होती हैं। कोर्ट की चिंता खास तौर पर इस उदाहरण में सामने आए दस गुना अंतर के स्तर को लेकर थी।

कीमतों पर नियंत्रण को लेकर सवाल
यह सुनवाई दवाओं की कीमतों, जेनेरिक दवाओं और मेडिकल डिवाइस की कीमतों से जुड़े मामलों में हो रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई है कि मौजूदा दवा मूल्य नियंत्रण व्यवस्था में कई गैर-सूचीबद्ध दवाओं की शुरुआती कीमत तय करने को लेकर अलग व्यवस्था है। याचिकाओं में दवाओं की कीमतों पर ज्यादा प्रभावी नियंत्रण और मरीजों को किफायती उपचार उपलब्ध कराने की मांग की गई है। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि सरकार मामले को टकराव के रूप में नहीं देख रही है और मौजूदा व्यवस्था तथा संभावित सुधारों पर अपनी बात रखेगी।
 

8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग पर तीव्र चर्चा, फिटमेंट फैक्टर अभी अनिर्णीत

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज है। केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया था और आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग के दायरे में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन और अन्य सेवा शर्तों की समीक्षा शामिल है। फिलहाल आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव और मांगें लेकर आगे बढ़ रहा है।

फिटमेंट फैक्टर पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं
कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है, क्योंकि इसी के आधार पर नए वेतन ढांचे में बेसिक पे तय करने का असर पड़ सकता है। हालांकि, 23 सितंबर 2026 तक आयोग ने किसी अंतिम फिटमेंट फैक्टर की घोषणा नहीं की है। अलग-अलग कर्मचारी संगठन अपनी मांगों के अनुसार अलग-अलग आंकड़े सुझा रहे हैं, लेकिन इन्हें आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता। अंतिम आंकड़ा आयोग की सिफारिश और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय से ही तय होगा।

बेसिक सैलरी और भत्तों पर क्या होगा
8वें वेतन आयोग के तहत मौजूदा वेतन संरचना की समीक्षा के साथ भत्तों और अन्य सेवा लाभों पर भी विचार किया जा रहा है। केंद्रीय कर्मचारियों के बीच HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं हैं, लेकिन अभी किसी नए भत्ते या संशोधित दर की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसी तरह न्यूनतम बेसिक पे में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह भी फिलहाल तय नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया या रिपोर्टों में चल रहे संभावित आंकड़ों को आधिकारिक वेतन बढ़ोतरी समझना सही नहीं होगा।

 

No UPI Day In Madhya Pradesh: MP में No UPI Day: व्यापारी संगठनों ने डिजिटल शुल्क के खिलाफ किया विरोध

मध्य प्रदेश में 23 सितंबर 2026 को व्यापारिक संगठनों की ओर से No UPI Day मनाया जा रहा है। यह अभियान UPI के जरिए होने वाले कुछ बड़े मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate यानी MDR के विरोध में बुलाया गया है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त लागत बढ़ने से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कई शहरों के व्यापारियों से एक दिन के लिए UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने और सांकेतिक विरोध दर्ज कराने की अपील की गई है। इस अभियान के तहत QR कोड और डिजिटल पेमेंट डिवाइस पर काला कपड़ा बांधकर भी विरोध जताने की योजना बनाई गई है।

₹2000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर विवाद क्यों
व्यापारियों के विरोध का मुख्य मुद्दा ₹2000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित MDR को लेकर है। रिपोर्टों में प्रस्तावित शुल्क 0.4 प्रतिशत बताया गया है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अगर बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन पर व्यापारी पक्ष से शुल्क बढ़ता है तो कम मार्जिन वाले कारोबार में इसका सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि विवाद मुख्य रूप से व्यापारी यानी मर्चेंट की लागत को लेकर है, सामान्य ग्राहक द्वारा UPI से भुगतान करने पर सीधे शुल्क लगाए जाने की बात नहीं है। इसलिए No UPI Day को ग्राहकों पर UPI चार्ज लगने के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

इंदौर से लेकर भोपाल तक विरोध की तैयारी
No UPI Day के अभियान को मध्य प्रदेश के कई व्यापारिक संगठनों का समर्थन मिलने की बात सामने आई है। इंदौर में बड़ी संख्या में व्यापारियों और संगठनों ने अभियान में शामिल होने की तैयारी की है। व्यापारियों की ओर से QR स्कैनर और पेमेंट डिवाइस पर काला कपड़ा बांधने का फैसला सांकेतिक विरोध के तौर पर बताया गया है। भोपाल समेत प्रदेश के दूसरे शहरों में भी व्यापारिक संगठनों ने इस मुद्दे पर अपने सदस्यों से समर्थन की अपील की है। संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को खत्म करना नहीं, बल्कि व्यापारियों पर संभावित अतिरिक्त लागत के खिलाफ अपनी चिंता दर्ज कराना है।