Home Blog Page 36

GST 2.0 Reform Plan: 5 करोड़ तक की टैक्स चोरी पर नहीं चलेगा आपराधिक केस?

5 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पर आपराधिक केस का प्रस्ताव
जीएसटी व्यवस्था में अगले चरण के सुधारों को लेकर कई बड़े बदलावों पर विचार किया जा रहा है। जीएसटी परिषद की सात अक्टूबर की बैठक में आपराधिक मुकदमे की मौजूदा एक करोड़ रुपये की सीमा बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं होगा कि पांच करोड़ रुपये तक की टैक्स चोरी माफ हो जाएगी। ऐसे मामलों में सरकार टैक्स की वसूली के साथ ब्याज और जुर्माना लगा सकती है, जबकि गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में आपराधिक कार्रवाई का रास्ता खुला रह सकता है।

 

गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने पर विचार
केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 में भी बदलाव का प्रस्ताव सामने आया है। मौजूदा व्यवस्था में निर्धारित शर्तों के तहत आयुक्त किसी अधिकारी को गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है। प्रस्ताव के अनुसार यह शक्ति कर अधिकारियों से वापस लेकर गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी की जा सकती है। हालांकि, जीएसटी परिषद की मंजूरी और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही कोई बदलाव लागू होगा।

 

सामान्य टैक्स विवादों में मिल सकती है राहत
प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य सामान्य कर विवादों और गंभीर टैक्स धोखाधड़ी के मामलों के बीच अंतर करना बताया जा रहा है। वस्तुओं के वर्गीकरण, कीमत या इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे मामलों में कारोबारी और कर अधिकारियों के बीच मतभेद होने पर हर विवाद को आपराधिक कार्रवाई तक ले जाने के बजाय टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने पर जोर दिया जा सकता है। देर से रिटर्न दाखिल करने या भुगतान में देरी जैसे मामलों में भी छोटे करदाताओं को राहत देने पर विचार हो रहा है।

 

24 अपराधों के प्रावधान नरम हो सकते हैं
जीएसटी कानून में आपराधिक कार्रवाई से जुड़े 24 अपराधों के प्रावधानों को नरम करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा नौ अपराधों को पूरी तरह हटाने और 11 अपराधों को मौजूदा रूप में बनाए रखने पर विचार किया जा सकता है। न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव भी है, ताकि अदालत परिस्थितियों के अनुसार फैसला कर सके। एक श्रेणी में अधिकतम सजा तीन साल से घटाकर दो साल करने और हर मामले में जुर्माने का विकल्प उपलब्ध कराने पर भी विचार हो सकता है।

 

टैक्स वसूली और तकनीक पर बढ़ेगा जोर
जीएसटी लागू होने के शुरुआती दौर में फर्जी बिल और टैक्स चोरी का पता लगाना चुनौतीपूर्ण था। अब जीएसटी नेटवर्क के जरिए विक्रेता की ओर से दर्ज जानकारी और खरीदार के इनपुट टैक्स क्रेडिट दावे का मिलान किया जा सकता है। इससे फर्जी क्रेडिट और संदिग्ध लेनदेन का पता शुरुआती स्तर पर लगाने में मदद मिलती है। इसी वजह से सरकार आपराधिक कार्रवाई के बजाय तकनीकी जांच, टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने के जरिए कार्रवाई को मजबूत करने पर जोर दे सकती है।

 

सोना-चांदी आयात की जीएसटी छूट भी खत्म हो सकती है
जीएसटी परिषद की बैठक में सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों और सरकार से मान्यता प्राप्त एजेंसियों को मिलने वाली एकीकृत जीएसटी छूट खत्म करने के प्रस्ताव पर भी विचार हो सकता है। फिलहाल इन कीमती धातुओं के आयात पर तीन प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि 2017 से बैंकों और नामित एजेंसियों को छूट मिली हुई है। छूट खत्म होने पर इन एजेंसियों और सर्राफा एक्सचेंजों के लिए कर व्यवस्था अधिक समान हो सकती है।

 

जीएसटी 2.0 में छोटे कारोबारियों पर भी फोकस
प्रस्तावित बदलावों को जीएसटी सुधारों के अगले चरण यानी जीएसटी 2.0 से जोड़कर देखा जा रहा है। सितंबर 2025 में दरों में बड़े बदलाव के बाद अब पंजीकरण को आसान बनाने, रिफंड प्रक्रिया तेज करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट को सरल करने और कारण बताओ नोटिस व जुर्माने से जुड़े नियमों को तर्कसंगत बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। छोटे करदाताओं के लिए देर से रिटर्न दाखिल करने पर शुल्क में राहत देने और अनुपालन की लागत घटाने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, ये सभी बदलाव फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर हैं और अंतिम निर्णय जीएसटी परिषद की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।

SIR Row Over Voter Lists: SIR पर 13 करोड़ नामों को लेकर सियासी घमासान

SIR को लेकर विपक्ष के सवाल जारी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। स्रोत के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग के अधिकार और प्रक्रिया पर विस्तृत विचार किया था। इसके बावजूद विपक्ष मतदाता सूचियों से जुड़े नामों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है और बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर किए जाने का मुद्दा उठा रहा है।

 

13 करोड़ नामों का आंकड़ा चर्चा में क्यों
SIR के दौरान करीब 13.3 करोड़ ऐसे नामों का आंकड़ा सामने आया, जिन्हें लेकर अलग-अलग कारणों से सत्यापन या पुनरीक्षण की जरूरत बताई गई। स्रोत के अनुसार इनमें करीब 2.8 करोड़ ऐसे लोग शामिल थे जिनकी पिछले दो दशकों में मृत्यु हो चुकी थी। इसके अलावा एक करोड़ से अधिक नाम डुप्लीकेट बताए गए, जबकि करीब 6.5 करोड़ लोग स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर जा चुके थे।

 

करीब तीन करोड़ लोगों की स्थिति पर सवाल
चुनाव आयोग के अनुसार करीब तीन करोड़ लोग SIR के दौरान अपने दर्ज पते पर मौजूद नहीं थे। इसके अलावा ऐसे लोगों को भी नोटिस दिए गए जिन्हें विभिन्न कारणों से आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में कठिनाई हुई। स्रोत के मुताबिक, इसी वर्ग को लेकर आगे की जांच और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस अधिक केंद्रित है, जबकि बाकी नामों के संबंध में स्थिति काफी हद तक स्पष्ट बताई गई है।

 

20 राज्यों में दोबारा जांच की तैयारी
स्रोत के अनुसार चुनाव आयोग ने 20 राज्यों में उन मतदाताओं की दोबारा जांच की बात कही है जिन्हें नोटिस दिया गया था या अंतिम सूची में बाहर किया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट करना और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना बताया गया है। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को अपनी पात्रता और दस्तावेजों से जुड़े पक्ष स्पष्ट करने का अवसर मिल सकता है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर क्या कहा
मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़े कई संवैधानिक और कानूनी सवालों पर विचार किया था। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को SIR कराने का अधिकार है और प्रक्रिया को निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक दायित्व से जोड़ा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने या बनाए रखने के संदर्भ में नागरिकता की सीमित जांच की जा सकती है।

 

आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता और पहचान के बीच अंतर पर भी जोर दिया। स्रोत के अनुसार अदालत ने स्पष्ट किया कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। मतदाता सूची में शामिल होने के लिए नागरिकता से जुड़ी पात्रता महत्वपूर्ण है और चुनाव आयोग को कानून के तहत इसकी सीमित जांच करने का अधिकार है।

 

बिहार से शुरू हुआ था मामला
SIR का मामला 24 जून 2025 को बिहार में चुनाव आयोग की अधिसूचना के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। विभिन्न याचिकाओं में प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने लंबी सुनवाई के दौरान प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई, हालांकि पारदर्शिता और मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने से जुड़े कुछ निर्देश दिए। बाद में पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

 

SIR की वैधानिकता और आगे की सुनवाई
स्रोत के अनुसार 27 मई के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह देखा कि क्या चुनाव आयोग के पास SIR कराने की शक्ति है, क्या इसका उद्देश्य वैध है और क्या अपनाई गई प्रक्रिया उस उद्देश्य के अनुपात में है। अदालत ने यह भी विचार किया कि प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व कानून और मतदाता पंजीकरण नियमों के अनुरूप है या नहीं। SIR से जुड़ी कुछ याचिकाओं पर आगे सुनवाई जारी रह सकती है, लेकिन स्रोत के मुताबिक मौजूदा सुनवाई प्रक्रिया की प्रणालीगत व्यवस्थाओं से संबंधित है।

Vivo T5 New Variants: Vivo T5 Lite और T5 Pro के नए वेरिएंट लॉन्च

Vivo ने T5 सीरीज के नए वेरिएंट उतारे
Vivo ने भारत में अपनी T5 सीरीज के T5 Lite और T5 Pro स्मार्टफोन के नए स्टोरेज वेरिएंट पेश किए हैं। कंपनी ने दोनों मॉडल को Flipkart पर लिस्ट किया है। नए वेरिएंट पुराने मॉडल की तुलना में कम RAM और स्टोरेज के साथ आते हैं, जिसकी वजह से इन्हें सीरीज के अपेक्षाकृत सस्ते विकल्प के तौर पर पेश किया गया है। फिलहाल दोनों फोन Flipkart पर Coming Soon के तौर पर दिखाई दे रहे हैं और इनकी बिक्री आगामी Big Billion Days Sale के दौरान शुरू होने की जानकारी दी गई है।

 

Vivo T5 Lite की कीमत और फीचर्स
Vivo T5 Lite का नया 4GB RAM और 64GB स्टोरेज वेरिएंट 30,999 रुपये में लिस्ट किया गया है। इससे पहले यह फोन 4GB + 128GB, 6GB + 128GB और 6GB + 256GB वेरिएंट में उपलब्ध था। फोन में 6.74 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। इसमें MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट मिलता है। फोन में 6,500mAh बैटरी के साथ 44W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है और इसे IP65 रेटिंग मिली है।

 

कैमरे में 50MP सेंसर
Vivo T5 Lite के कैमरा सेटअप में 50MP का मुख्य रियर कैमरा और एक सेकेंडरी कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 5MP का फ्रंट कैमरा मिलता है। नए वेरिएंट में कम स्टोरेज और RAM होने के बावजूद कंपनी ने फोन के मुख्य हार्डवेयर और फीचर्स को T5 Lite सीरीज के मौजूदा मॉडल के अनुरूप रखा है।

 

Vivo T5 Pro का नया वेरिएंट
Vivo T5 Pro का नया 6GB RAM और 128GB स्टोरेज मॉडल 49,999 रुपये में लिस्ट किया गया है। इससे पहले यह फोन 8GB + 128GB, 8GB + 256GB और 12GB + 256GB वेरिएंट में उपलब्ध था। फोन में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। प्रोसेसिंग के लिए इसमें Qualcomm Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट दिया गया है।

 

9020mAh बैटरी और 90W चार्जिंग
Vivo T5 Pro की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9,020mAh बैटरी है। फोन में 90W वायर्ड फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट दिया गया है। इसके अलावा फोन को IP68 और IP69 रेटिंग मिली है। कैमरा सेटअप में 50MP का मुख्य कैमरा और 2MP का बोकेह कैमरा मिलता है, जबकि सेल्फी के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

 

Android 16 के साथ आएंगे दोनों फोन
Vivo T5 Lite और Vivo T5 Pro दोनों फोन Android 16 पर आधारित OriginOS 6 पर चलते हैं। नए वेरिएंट की बिक्री Flipkart Big Billion Days Sale के दौरान शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल दोनों मॉडल को Flipkart पर Coming Soon के तौर पर दिखाया गया है, इसलिए बिक्री की सटीक तारीख और उपलब्धता के बारे में आगे की जानकारी का इंतजार है।

FSSAI Food Safety Action: एवरेस्ट जीरा पाउडर की एक बैच मार्केट से हटाने का आदेश

एवरेस्ट जीरा पाउडर की बैच वापस लेने का आदेश
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन को लेकर बड़ा एक्शन लिया है। जांच में एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्री-पैक्ड जीरा पाउडर की एक बैच को खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं पाया गया। इसके बाद FSSAI ने संबंधित पूरी बैच को बाजार से तुरंत वापस लेने का आदेश दिया है। इस बैच का नंबर E080668761 बताया गया है और कंपनी को रिकॉल का पूरा रिकॉर्ड रखने तथा तय समय में स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।

 

जीरा पाउडर में तय सीमा से ज्यादा पेस्टिसाइड
FSSAI के अनुसार संबंधित जीरा पाउडर का सैंपल गोवा स्थित रिवरसाइड रिसॉर्ट्स एंड हॉलिडे होम्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर से लिया गया था। फूड एनालिस्ट की जांच में इसमें एजोक्सीस्ट्रोबिन और थायमेथोक्साम नाम के पेस्टिसाइड के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। इसके बाद सैंपल को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत अनसेफ घोषित किया गया और संबंधित उत्पाद की पूरी बैच को बाजार से हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।

 

दोबारा जांच में भी सैंपल अनसेफ मिला
फूड एनालिस्ट की रिपोर्ट के खिलाफ कंपनी को अपील का अवसर दिया गया था। इसके बाद संबंधित सैंपल को रेफरल फूड लैबोरेटरी भेजा गया। दोबारा हुई जांच में भी एजोक्सीस्ट्रोबिन और थायमेथोक्साम की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। रेफरल लैबोरेटरी ने भी सैंपल को अनसेफ घोषित किया, जिसके बाद FSSAI की ओर से बाजार से उत्पाद वापस लेने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।

 

क्रिएटिव बेकर्स का लाइसेंस सस्पेंड
FSSAI ने क्रिएटिव बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान बेकरी के फूड प्रोडक्शन और हैंडलिंग एरिया में गंदगी, ग्रीस, धूल, मकड़ी के जाले और मक्खियां मिलीं। जल्दी खराब होने वाले कच्चे सामान को खुले में रखा गया था और कच्चे तथा आधे तैयार उत्पादों के लिए जंग लगे और ठीक से साफ नहीं किए गए कंटेनरों का इस्तेमाल पाया गया। इन गंभीर हाइजीन कमियों के चलते कंपनी का फूड लाइसेंस तत्काल सस्पेंड कर दिया गया।

 

बेकरी में कीड़ों और कचरे से जुड़ी कमियां मिलीं
जांच में बेकरी परिसर में कीड़ों की समस्या और पर्याप्त पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था की कमी भी सामने आई। मक्खियों को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और चूहों से बचाव की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। खिड़कियों और अन्य स्थानों पर कीड़ों को रोकने वाली जालियां भी नहीं लगी थीं। फूड हैंडलिंग एरिया में कचरा, पुराना स्टॉक, रिजेक्टेड सामान और स्क्रैप मिला, जबकि कुछ मशीनों पर जंग, दीवारों पर उखड़ा हुआ पेंट, सीलन और टूटी फर्श की टाइलें भी पाई गईं।

 

लाइसेंस सस्पेंड रहने तक कारोबार रोकने का निर्देश
FSSAI ने क्रिएटिव बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स को लाइसेंस सस्पेंशन की अवधि के दौरान सभी फूड बिजनेस गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया है। जांच में पानी और तैयार उत्पादों की टेस्टिंग, समय और तापमान की निगरानी, मशीनों की जांच, मेंटेनेंस, मॉक रिकॉल, ग्राहक शिकायतों, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और ऑडिट से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड भी ठीक से मेंटेन नहीं पाए गए। FSSAI ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स को भी भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

Saurabh Bhardwaj Detained: हिरासत में सौरभ भारद्वाज बोले, फुटबॉल की तरह फेंक रहे

CEC के खिलाफ प्रदर्शन में हिरासत
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार को अलग-अलग राजनीतिक और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन और मार्च निकाला। इंडिया गेट से जंतर-मंतर और संसद की ओर बढ़ रहे इन प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।

 

हिरासत में सौरभ भारद्वाज का बयान
हिरासत में लिए जाने के दौरान सौरभ भारद्वाज ने मीडिया से बात करते हुए दिल्ली पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रही थी जैसे वह कोई फुटबॉल हों। भारद्वाज ने दावा किया कि उन्हें पैर ऊपर और सिर नीचे की स्थिति में पुलिस ले जा रही थी और उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को बदसलूकी बताया।

 

पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल लोगों के साथ भी पुलिस ने कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। उन्होंने पुलिस बल की बड़ी संख्या का जिक्र करते हुए एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने और गिरफ्तारी नहीं होने का भी आरोप लगाया। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

 

CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च
प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। विरोध प्रदर्शन का संबंध वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR में कथित गड़बड़ियों के आरोपों से बताया गया है। AISA की अगुवाई में सिटिजन्स मार्च दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुआ, जबकि इंडियन यूथ कांग्रेस का मार्च शाम करीब 5 बजे उसी मार्ग पर निकाला गया।

 

दिल्ली में 5000 पुलिसकर्मी तैनात
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक के मार्ग पर दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स और अन्य पैरामिलिट्री बलों की तैनाती की गई। रिपोर्ट के अनुसार करीब 5000 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए। इसके अलावा ड्रोन निगरानी और बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी की गई।

 

सौरभ भारद्वाज ने लोगों से की अपील
हिरासत में लिए जाने के दौरान सौरभ भारद्वाज ने लोगों से प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर अपनी आवाज दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नेताओं और पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है तो आम जनता के साथ पुलिस का व्यवहार कैसा होगा। वहीं प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

Delhi Chennai Expressway: दिल्ली से चेन्नई तक 2200 KM का एक्सप्रेसवे

दिल्ली से चेन्नई तक 2200 किलोमीटर का रूट
देश में एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली से चेन्नई तक करीब 2,200 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को जोड़ने की योजना चर्चा में है। यह रूट दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर चेन्नई तक पहुंचेगा। प्रस्तावित कनेक्टिविटी में यमुना एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी और दक्षिण भारत की ओर जाने वाले एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को जोड़ने की बात कही गई है।

 

7 राज्यों से होकर गुजरेगा सफर
इस रूट से दिल्ली से चेन्नई तक जाने के दौरान कुल सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली से होकर गुजरने की बात कही गई है। इसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं। इस कनेक्टिविटी का उद्देश्य उत्तर भारत को दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों से तेज सड़क नेटवर्क के जरिए जोड़ना है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुंदेलखंड के रास्ते जाने वाला यह विकल्प दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे वाले रूट की तुलना में दूरी कम करने में मदद कर सकता है।

 

यमुना एक्सप्रेसवे से शुरू होगा सफर
दिल्ली से आगे जाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे प्रमुख कड़ी के रूप में काम करेगा। करीब 165 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और नोएडा को आगरा से जोड़ता है तथा जेवर, अलीगढ़ और मथुरा के रास्ते आगरा तक पहुंचता है। इसके बाद आगरा-ग्वालियर क्षेत्र की कनेक्टिविटी से होते हुए मध्य प्रदेश की ओर बढ़ा जा सकेगा। आगे बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी इस लंबे कॉरिडोर को दक्षिण की ओर ले जाने में मदद करेगी।

 

बुंदेलखंड से नागपुर तक कनेक्टिविटी
आगरा और ग्वालियर के बाद रूट बुंदेलखंड क्षेत्र से होकर आगे बढ़ेगा। रिपोर्ट में झांसी, बबीना, सागर, लखनादौन और सिवनी जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। यह नेटवर्क आगे नागपुर से जुड़ने के बाद महाराष्ट्र में प्रवेश करेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़ी सड़कें भी इस कनेक्टिविटी को मजबूत करती हैं और उत्तर भारत से मध्य भारत होते हुए दक्षिण भारत की ओर जाने वाले सड़क नेटवर्क में अहम भूमिका निभाती हैं।

 

नागपुर से हैदराबाद और फिर चेन्नई की ओर
नागपुर के बाद रूट महाराष्ट्र से तेलंगाना की ओर बढ़ेगा और आदिलाबाद तथा निजामाबाद के रास्ते हैदराबाद तक पहुंचने की कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके बाद हैदराबाद से अमरावती और आंध्र प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के रास्ते तमिलनाडु की ओर बढ़ने की योजना बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार यह कॉरिडोर नलगोंडा, गुंटूर, अमरावती, ओंगोल और नेल्लोर जैसे क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ सकता है और अंत में नेशनल हाईवे-16 से जुड़कर चेन्नई तक पहुंचता है।

 

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भी है वैकल्पिक रूट
दिल्ली से चेन्नई जाने के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे वाला एक वैकल्पिक मार्ग भी मौजूद है। इस रूट में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और फिर पुणे-बेंगलुरु तथा चेन्नई की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह विकल्प बुंदेलखंड वाले प्रस्तावित कॉरिडोर की तुलना में करीब 250 किलोमीटर ज्यादा लंबा पड़ सकता है। ऐसे में नया कनेक्टिविटी नेटवर्क दूरी, समय और ईंधन की खपत कम करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Three Filter Test: चाणक्य की तीन छन्नी, हर बात पर जरूर करें लागू

चाणक्य की तीन छन्नी का संदेश
एक बार चाणक्य का एक परिचित उनसे मिलने आया और उनके मित्र के बारे में कुछ बताने लगा। चाणक्य ने उसकी बात बीच में रोकते हुए कहा कि किसी के बारे में कुछ भी बताने से पहले उस बात को तीन छन्नियों से परखना चाहिए। उनका उद्देश्य था कि बिना सत्यापन, बिना भलाई और बिना उपयोगिता वाली बातों को आगे बढ़ाने से बचा जाए।

 

पहली छन्नी है सत्य
चाणक्य ने परिचित से पूछा कि क्या वह पूरे विश्वास के साथ कह सकता है कि उसके द्वारा बताई जाने वाली बात पूरी तरह सत्य है। व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसने वह बात अभी-अभी किसी से सुनी है और उसे इसकी सच्चाई की पूरी जानकारी नहीं है। चाणक्य ने समझाया कि जब किसी बात की सत्यता ही निश्चित नहीं है, तो उसे आगे बताना उचित नहीं होना चाहिए।

 

दूसरी छन्नी है भलाई
इसके बाद चाणक्य ने पूछा कि क्या वह उनके मित्र के बारे में कोई अच्छी बात बताने जा रहा है। व्यक्ति ने नकारात्मक बात बताने की बात स्वीकार की। चाणक्य ने संकेत दिया कि अगर कोई बात अच्छी नहीं है और उसकी सच्चाई भी निश्चित नहीं है, तो उसे किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने से केवल गलतफहमी या नुकसान पैदा हो सकता है।

 

तीसरी छन्नी है उपयोगिता
चाणक्य ने तीसरा सवाल किया कि क्या वह बात उनके लिए किसी तरह उपयोगी है। व्यक्ति ने जवाब दिया कि शायद वह बात उनके किसी काम की नहीं है। तब चाणक्य ने कहा कि जो बात न सत्य है, न अच्छी है और न ही उपयोगी है, उसे बताने का कोई लाभ नहीं है।

 

सुनी-सुनाई बात को आगे बढ़ाने से बचें
इस प्रसंग की सीख यही है कि किसी परिचित, मित्र या रिश्तेदार के बारे में कोई बात सुनने पर उसे तुरंत आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। पहले यह देखना जरूरी है कि बात सच है या नहीं, उससे किसी की भलाई होती है या नहीं और क्या उसका जानना वास्तव में जरूरी या उपयोगी है। ऐसा करने से अफवाहों और गलतफहमियों को फैलने से रोका जा सकता है।

 

जीवन में अपनाएं तीन परीक्षण
सत्य, भलाई और उपयोगिता की ये तीन छन्नियां रोजमर्रा की बातचीत में भी अपनाई जा सकती हैं। किसी भी बात को साझा करने से पहले कुछ पल रुककर इन तीन सवालों पर विचार करना रिश्तों में विश्वास बनाए रखने और अनावश्यक विवाद से बचने में मदद कर सकता है। इस प्रेरक प्रसंग का संदेश है कि हर सुनी हुई बात दूसरों तक पहुंचाना जरूरी नहीं होता।

Urea Subsidy Explained: यूरिया की हर बोरी पर ₹2700 सब्सिडी दे रही सरकार

यूरिया की हर बोरी पर ₹2700 सब्सिडी का दावा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्र सरकार किसानों को सस्ती दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए बड़ी सब्सिडी दे रही है। उनके अनुसार, एक बोरी यूरिया पर सरकार की ओर से करीब 2,700 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान आयात लागत बढ़ने के बावजूद सरकार ने इसका पूरा बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया।

 

वैश्विक कीमत बढ़ी, किसानों को सस्ती खाद
वित्त मंत्री के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में यूरिया की आयात लागत करीब 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई थी, लेकिन किसानों को सस्ती दर पर यूरिया उपलब्ध कराया गया। सरकार यूरिया की वास्तविक लागत और किसानों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच के अंतर को सब्सिडी के जरिए पूरा करती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 45 किलोग्राम यूरिया बैग का निर्धारित MRP 242 रुपये है, जबकि वित्त मंत्री ने कार्यक्रम में किसानों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत को लगभग 300 रुपये बताते हुए सरकार के सब्सिडी खर्च का उल्लेख किया।

 

किसानों को कैसे मिलती है यूरिया सब्सिडी
यूरिया सब्सिडी का लाभ किसानों को बाजार में सीधे नकद भुगतान के रूप में नहीं मिलता। सरकार यूरिया की लागत और नियंत्रित कीमत के बीच के अंतर की भरपाई उर्वरक कंपनियों और आयातकों को सब्सिडी के रूप में करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आने के बावजूद किसानों को खेती के लिए जरूरी यूरिया अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध रहे।

 

PM किसान और KCC पर भी सरकार का जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों को केवल सस्ती खाद उपलब्ध कराना ही सरकार की प्राथमिकता नहीं है, बल्कि खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत DBT के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के माध्यम से किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

 

कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने की योजना
मदनपल्ले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश में कृषि और बागवानी क्षेत्र के विकास से जुड़ी पहलों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।

 

सरकार का लक्ष्य किसानों की लागत कम करना
यूरिया सब्सिडी के जरिए सरकार वैश्विक बाजार की कीमतों का सीधा असर किसानों पर पड़ने से रोकने की कोशिश कर रही है। वित्त मंत्री के मुताबिक, आवश्यक कृषि सब्सिडी में कमी न हो और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होती रहे, इसके लिए केंद्र लगातार कदम उठा रहा है। इसके साथ PM किसान और KCC जैसी योजनाओं के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

Kainat Retires: मैच रेफरी बनने के लिए कायनात इम्तियाज ने लिया संन्यास

मैच रेफरी बनने के लिए लिया संन्यास
पाकिस्तान की तेज गेंदबाज कायनात इम्तियाज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने यह फैसला क्रिकेट से पूरी तरह दूर होने के बजाय मैच रेफरी के रूप में नई भूमिका शुरू करने के लिए लिया है। कायनात ने हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के नेशनल विमेंस अंडर-19 टी20 टूर्नामेंट में मैच रेफरी की जिम्मेदारी संभाली थी, जिसके बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। टूर्नामेंट अगस्त और सितंबर में कराची में खेला गया था।

 

13 साल का रहा अंतरराष्ट्रीय करियर
कायनात इम्तियाज ने साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पोटचेफस्ट्रूम में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रहा। इस तरह उनका अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 13 साल का रहा। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के लिए 19 वनडे और 21 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले।

 

वनडे और टी20 में ऐसा रहा प्रदर्शन
दाएं हाथ की तेज गेंदबाज कायनात ने 19 वनडे मैचों में 6.05 की इकोनॉमी से गेंदबाजी करते हुए 10 विकेट हासिल किए। वहीं 21 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने 5.82 की इकोनॉमी से रन दिए और 8 विकेट अपने नाम किए। 2023 के बाद उन्हें पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली और इसके बाद उन्होंने कमेंट्री सहित क्रिकेट से जुड़ी अन्य भूमिकाओं में काम किया।

 

एशियन गेम्स में पाकिस्तान को दिलाया गोल्ड
कायनात इम्तियाज पाकिस्तान की उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने 2010 और 2014 के एशियन गेम्स में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी पाकिस्तान की टीम का हिस्सा रही थीं और 2017 विश्व कप की टीम में भी उनका नाम शामिल था।

 

तीन साल से टीम से थीं बाहर
कायनात ने पाकिस्तान महिला टीम के लिए अपना आखिरी मैच 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली। हालांकि उन्होंने क्रिकेट से अपना जुड़ाव बनाए रखा और कमेंट्री के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट में मैच ऑफिशियल की भूमिका भी निभाई। हालिया टूर्नामेंट में मैच रेफरी के रूप में काम करने के बाद अब उन्होंने इसी करियर को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

 

मां भी हैं क्रिकेट मैच ऑफिशियल
कायनात इम्तियाज की मां सलीमा इम्तियाज भी क्रिकेट से जुड़ी मैच ऑफिशियल हैं। वह आईसीसी की इंटरनेशनल डेवलपमेंट पैनल की महिला अंपायर रह चुकी हैं और महिला वनडे तथा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अंपायरिंग कर चुकी हैं। अब कायनात भी क्रिकेटर के बाद मैच रेफरी के रूप में नई पारी शुरू करेंगी और अपनी मां के नक्शेकदम पर आगे बढ़ेंगी।

SC Upholds Grandson Appointment: दादा-दादी की मौत पर पोते को मिल सकती है नौकरी

दादा-दादी की मौत पर पोते को मिल सकती है अनुकंपा नियुक्ति
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें रेलवे को मृत कर्मचारी के पोते जितेंद्र वर्मा की अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर राहत देने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और रेलवे की चुनौती वाली याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि यह फैसला हर मामले में पोते को स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं देता, बल्कि संबंधित सेवा नियमों और परिस्थितियों के तहत निकट संबंधी के रूप में दावे पर विचार किए जाने से जुड़ा है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिया फैसला
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने 28 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि उसे हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार नजर नहीं आता। इसके साथ ही रेलवे की वह चुनौती समाप्त हो गई, जिसके जरिए पोते को अनुकंपा नियुक्ति देने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

 

दादी की मृत्यु के बाद जितेंद्र ने किया था दावा
मामले के अनुसार जितेंद्र वर्मा के दादा की वर्ष 2002 में मृत्यु हो गई थी और उनके पिता का भी वर्ष 2006 में निधन हो गया था। जितेंद्र का पालन-पोषण उनकी दादी छमा बाई ने किया, जो पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में हेल्पर-2/खलासी के पद पर कार्यरत थीं। 19 जून 2016 को नौकरी के दौरान छमा बाई की मृत्यु हो गई। इसके बाद जितेंद्र ने उनकी जगह अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का दावा किया।

 

सर्विस रिकॉर्ड में नाम और उत्तराधिकार प्रमाणपत्र का भी जिक्र
जितेंद्र का नाम वर्ष 2007 में छमा बाई के सर्विस रिकॉर्ड में उत्तराधिकारी और नामिनी के रूप में दर्ज किया गया था। इसके अलावा उन्होंने 30 जनवरी 2018 को सिविल कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया था। रेलवे ने इस प्रमाणपत्र को नौकरी देने के बजाय सेवानिवृत्ति से जुड़े बकाया के भुगतान तक सीमित माना। जितेंद्र ने खुद को छमा बाई का गोद लिया हुआ बेटा भी बताया था, लेकिन रेलवे ने उनके गोद लिए जाने की वैधता पर सवाल उठाते हुए नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया।

 

हाई कोर्ट ने माना था निकट संबंधी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रेलवे की अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज-3 का उल्लेख करते हुए कहा था कि पात्रता केवल पुत्र, पुत्री, विधवा या विधुर तक सीमित नहीं है। निर्धारित शर्तों के तहत निकट संबंधी और वैध रूप से गोद लिए गए पुत्र-पुत्री भी इसके दायरे में आ सकते हैं। हाई कोर्ट ने कहा था कि जितेंद्र को दत्तक पुत्र नहीं मानने की स्थिति में भी वह मृत कर्मचारी का पोता होने के कारण निकट संबंधी की श्रेणी में आता है।

 

रेलवे को 30 दिन में नियुक्ति पर विचार का निर्देश
हाई कोर्ट ने रेलवे द्वारा जितेंद्र के दावे को बार-बार खारिज किए जाने पर भी आपत्ति जताई थी और कहा था कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को समय पर राहत देना है। अदालत ने रेलवे को 30 दिन के भीतर अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया था और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने को भी कहा था। रेलवे ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।