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बाढ़ में 750 से ज्यादा मौतें,भारत ने नेपाल को भेजी मदद

नेपाल और चीन के तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक भीषण फ्लैश फ्लड आ गई। तेज रफ्तार से आए पानी और मलबे ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि इसके रास्ते में आने वाले कई घर, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे देखते ही देखते क्षतिग्रस्त हो गए। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा का असर नेपाल से लगे भारत के कुछ सीमावर्ती इलाकों में भी महसूस किया गया है और नदियों के जलस्तर को लेकर संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।

भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी बढ़ी चिंता
नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में भी नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ गई है। नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं, जिसके कारण नेपाल में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ का असर भारतीय सीमा क्षेत्र में भी पड़ सकता है। बिहार के सीमावर्ती जिलों और उत्तर प्रदेश के कुछ तराई क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित खतरे वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और नदी तथा निचले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ी
भीषण बाढ़ और उसके बाद हुए विनाश में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 750 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 2,500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें स्थानीय नागरिकों के साथ भारतीय तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक भी शामिल बताए जा रहे हैं। कई प्रभावित इलाकों में भारी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण राहत और खोज अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन की टीमें लगातार मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। प्रभावित परिवार अपने परिजनों की जानकारी के लिए राहत एजेंसियों और प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।

 

भोपाल में कांग्रेस का प्रदर्शन, कार्यकर्ता पहुंचे एमपी नगर थाना

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े 'शुद्धिकरण' विवाद को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के पदाधिकारी और कार्यकर्ता रविवार को एमपी नगर थाने पहुंचे और पूरे मामले को लेकर पुलिस को शिकायती आवेदन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल का कथित रूप से गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण किया गया। कांग्रेस ने इसे दलित समाज और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अपमान से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति जताई। कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला अब मध्य प्रदेश में भी राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गया है।

एमपी नगर थाने में शिकायत
कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के नेतृत्व में कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता एमपी नगर थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों को शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश प्रवक्ता अभिनव बारोलिया, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कार्यालय प्रभारी मुकेश बंसल, प्रदेश संगठन महामंत्री रमेश चंद्र बकोरिया, प्रदेश सचिव जगदीश रोहर और महेश वर्मा सहित कई नेता मौजूद रहे। जिला अध्यक्ष नीरज चंडाले के साथ दिलावर ओसवाल, शुभम इंद्रसे, केशव चौहान, रूपेश रमन, अमित बेबी, रवि, प्रिंस, करन और आशीष समेत कई कार्यकर्ता भी थाने पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने शिकायत में कथित घटना को सामाजिक भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई होना जरूरी है।

SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस को दिए आवेदन में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी SC-ST Act के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद आयोजन स्थल का कथित शुद्धिकरण किया जाना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं और छुआछूत जैसी प्रथाओं के लिए आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर वह आगे भी राजनीतिक और कानूनी स्तर पर आवाज उठाती रहेगी।

 

भारत-उज्बेकिस्तान के रिश्ते हुए और मजबूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रही है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान 'ओली दाराजली दुस्तलिक' (Order of Oliy Darajali Dostlik) से सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच दोस्ती, आपसी विश्वास और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए दिया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को समर्पित किया। दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इस सम्मान को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी तथा मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

यूरेनियम आपूर्ति को लेकर हुआ अहम समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था पर सहमति बनी है। भारत अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विस्तार के लिए भरोसेमंद यूरेनियम आपूर्ति स्रोतों को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है। यूरेनियम परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है और इसकी नियमित आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काफी अहम मानी जाती है। उज्बेकिस्तान के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था से भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपने रणनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दोनों देशों के बीच यह समझौता ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रिश्ते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी में तब्दील
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने मौजूदा रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाते हुए इसे 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। नई साझेदारी के तहत व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच नई साझेदारी आने वाले वर्षों में व्यापार और रणनीतिक सहयोग को और व्यापक बनाने का आधार तैयार कर सकती है।

 

नेहा बोरा का सरकार पर हमला

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और छात्र नेता नेहा बोरा ने नागपुर में छात्र आंदोलनों और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। 27 अगस्त को नागपुर दौरे के दौरान उन्होंने कई छात्र सभाओं और कार्यक्रमों को संबोधित किया। इसके बाद 28 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों में उनके एक प्रेस वार्ता में दिए गए बयान की चर्चा तेज हो गई। बोरा ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को युवाओं के बीच बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत बताया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के बाद युवाओं और आम नागरिकों में सत्ता से सवाल पूछने का डर कम हुआ है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

'जंतर-मंतर आंदोलन ने डर खत्म किया'
नेहा बोरा ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन ने देश के युवाओं को अपनी आवाज मजबूती से उठाने का हौसला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वाले छात्रों और नागरिकों को कई बार राष्ट्र-विरोधी जैसे शब्दों से निशाना बनाया जाता है। बोरा के मुताबिक अब युवा अपने अधिकारों, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को लेकर खुलकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने छात्र आंदोलनों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके इस बयान को AISA की ओर से सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। नागपुर में दिए गए इस बयान के बाद छात्र राजनीति और राष्ट्रीय राजनीति के बीच बहस फिर चर्चा में आ गई है।

Gen Z Rising अभियान के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश
नेहा बोरा ने देशभर के युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से Gen Z Rising अभियान शुरू करने की बात कही है। इस अभियान के तहत अलग-अलग शहरों और राज्यों में छात्र सभाओं तथा संवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं से संपर्क किया जा रहा है। नागपुर दौरा भी इसी अभियान से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा बताया गया। अभियान में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में अनियमितता, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। बोरा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने और कोचिंग व्यवस्था से जुड़े कथित माफियाओं पर कार्रवाई की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि देश के युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जुड़े फैसलों में अपनी आवाज रखने का पूरा अधिकार है।

 

392 लोगों की मौत,350 लोगों का रेस्क्यू

नेपाल के रसुवा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया और कई इलाकों में पानी तेजी से घुस गया। बाढ़ की चपेट में आने से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई है और कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। कई सड़कें, पुल और स्थानीय बुनियादी ढांचे भी बाढ़ के पानी में बह गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। स्थिति को देखते हुए लोगों से नदियों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की गई है।

मौतों का आंकड़ा 392 तक पहुंचा
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 389 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि तिब्बत की तरफ तीन मौतों की पुष्टि के बाद कुल आंकड़ा 392 बताया गया। हालांकि राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है। सैकड़ों लोगों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल मलबे और बाढ़ के पानी के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता अब फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की है।

त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल से 350 मजदूरों का रेस्क्यू
बाढ़ के बीच त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे 350 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। टनल में बाढ़ का पानी घुसने के बाद मजदूरों के अंदर फंसे होने से राहत और बचाव एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया। कई घंटे की मशक्कत के बाद सभी 350 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। रेस्क्यू किए गए मजदूरों में कई भारतीय नागरिकों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। सभी सुरक्षित निकाले गए लोगों को मेडिकल जांच के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

 

मां ने बेटे पर पेपर कटर से किया हमला

फरीदाबाद के पल्ला थाना क्षेत्र के शिव एन्क्लेव पार्ट-3 में दो साल के मासूम पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार आरोपी महिला कमलेश तीन बच्चों की देखभाल को लेकर तनाव और परेशानी में थी। 26 अगस्त की दोपहर जब उसका दो साल का बेटा भीष्म रोने लगा तो महिला ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान गुस्से में आकर उसने घर में रखे पेपर कटर से बच्चे की गर्दन पर वार कर दिया। हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और खून से लथपथ हालत में बेहोश हो गया। घटना के बाद परिवार में हड़कंप मच गया और बच्चे को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

पेपर कटर से बच्चे की गर्दन पर किया वार
जानकारी के मुताबिक घटना के समय महिला का पति और सास काम के सिलसिले में घर से बाहर गए हुए थे। इसी दौरान दो साल का बच्चा रोने लगा और उसे संभालने को लेकर महिला कथित तौर पर बेहद तनाव में आ गई। आरोप है कि गुस्से में महिला ने पहले बच्चे के साथ मारपीट की और फिर पेपर कटर से उसकी गर्दन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से बच्चा गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। बच्चे की हालत देखकर आसपास के लोगों और परिवार के सदस्यों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद घायल बच्चे को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया गया।

गंभीर हालत में सफदरजंग अस्पताल रेफर
हमले के बाद बच्चे को सबसे पहले नजदीकी सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। बच्चे की गर्दन पर गंभीर चोट होने के कारण डॉक्टरों ने उसकी हालत को देखते हुए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों ने तत्काल बच्चे को अस्पताल पहुंचाया, जिसके बाद उसका इलाज शुरू किया गया। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से बच्चे की जान बचाने में सफलता मिली। घटना के बाद परिवार के लोग बच्चे की हालत को लेकर बेहद चिंतित रहे। फिलहाल बच्चे की स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी बनी हुई है।

 

मोबाइल में फोटो देख हुआ विवाद

गुरुग्राम के सेक्टर-71 स्थित सीएचडी एवेन्यू सोसायटी में 44 वर्षीय कीर्तिमई मिश्रा की मौत के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम बातें सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक घटना से पहले कीर्तिमई ने अपने पति युवराज शर्मा का मोबाइल फोन देखा था। मोबाइल की गैलरी में उन्हें एयर इंडिया एकेडमी की एक महिला सहकर्मी के साथ युवराज की फोटो दिखाई दी। फोटो को लेकर कीर्तिमई ने पति से सवाल किया और दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान दोनों के बीच बहस काफी बढ़ गई थी। इसके बाद कीर्तिमई नाराज होकर दूसरे कमरे में चली गईं और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

रात में कमरे का दरवाजा अंदर से किया बंद
पुलिस को दिए बयान के अनुसार 26 अगस्त की रात कीर्तिमई अपनी नौ वर्षीय बेटी और पति के साथ कमरे में थीं। इसी दौरान मोबाइल फोन की गैलरी देखते समय उन्हें महिला सहकर्मी के साथ पति की तस्वीर दिखाई दी। तस्वीर को लेकर पति-पत्नी के बीच काफी देर तक बहस और विवाद चलता रहा। झगड़े के बाद कीर्तिमई दूसरे कमरे में चली गईं और उन्होंने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। पति युवराज को लगा कि गुस्सा शांत होने के बाद सुबह स्थिति सामान्य हो जाएगी। इसी वजह से वह अपनी बेटी के साथ दूसरे कमरे में सो गए और रात में दरवाजा खोलने की कोशिश नहीं की।

सुबह दरवाजा नहीं खुला तो बालकनी से देखा
अगली सुबह काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर युवराज ने पत्नी को आवाज लगाई और दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उन्होंने बालकनी की खिड़की से कमरे के अंदर देखने की कोशिश की। अंदर का दृश्य देखकर युवराज के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत मदद के लिए अपने परिचितों तथा पुलिस को सूचना दी। इसके बाद दरवाजा खोलने के लिए शीशा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया गया। पुलिस के पहुंचने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। मामले की जांच में पुलिस अब घटना से पहले हुए विवाद और परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है।

 

सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने का निर्देश

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहने का निर्देश दिया है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के दौरान उन्होंने बदलते वैश्विक हालात को भारत की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया में तेजी से बदल रहे भू-राजनीतिक समीकरण भारत के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। ऊर्जा और संसाधनों की असुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं का भी देश पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को संभावित खतरों की पहले से पहचान करने और उनसे निपटने के लिए तैयार रहना होगा। गृह मंत्री ने एजेंसियों से कहा कि किसी चुनौती के गंभीर संकट में बदलने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।

संकट बढ़ने से पहले खतरों की पहचान पर जोर
अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर ही पहचानने की क्षमता को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि आज सुरक्षा का दायरा केवल सीमा या पारंपरिक सैन्य खतरों तक सीमित नहीं रह गया है। वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट, संसाधनों की कमी और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें भी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। इन परिस्थितियों का सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और आंतरिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को वैश्विक घटनाक्रम पर लगातार नजर रखते हुए संभावित प्रभावों का आकलन करना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि चुनौती बड़ी बनने से पहले ही उसके खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएं।

वैश्विक तनाव के घरेलू असर पर नजर
गृह मंत्री ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत तक पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा और संसाधनों की उपलब्धता में बदलाव होने से देश की जरूरतों और अर्थव्यवस्था पर दबाव बन सकता है। इसी तरह वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बड़ी बाधा का असर उद्योग, व्यापार और आम लोगों तक पहुंच सकता है। सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे घटनाक्रमों को केवल विदेश नीति या आर्थिक मुद्दे के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्हें इनके संभावित आंतरिक सुरक्षा प्रभावों का भी अध्ययन करना होगा। अमित शाह ने बदलती परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा रणनीति को लगातार अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

वन नेशन वन इलेक्शन की तैयारी

देश में 'एक देश, एक चुनाव' यानी One Nation, One Election को लेकर केंद्र की एनडीए सरकार की तैयारियों की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार 2034 का इंतजार करने के बजाय 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ ही कई राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने के विकल्प पर विचार कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत एनडीए शासित या सहयोगी दलों की सरकार वाले करीब 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराए जाने की संभावना पर मंथन किया जा रहा है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कुछ राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही चुनाव कराने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, यह अभी रिपोर्ट्स में सामने आया एक संभावित राजनीतिक और चुनावी खाका है और इसे अंतिम सरकारी फैसला नहीं माना जा सकता। सरकार के सामने इसे लागू करने के लिए संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक प्रक्रियाओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी।

22 राज्यों को लेकर सामने आया संभावित खाका
रिपोर्ट्स के मुताबिक 2029 में एक साथ चुनाव कराने की संभावित योजना के पहले चरण में उन राज्यों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है जहां एनडीए या उसके सहयोगी दलों की सरकार है। इसका उद्देश्य अलग-अलग समय पर होने वाले विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनाव के साथ जोड़कर चुनावी चक्र को धीरे-धीरे एक समान करना बताया जा रहा है। कुछ राज्यों में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 2029 से आगे तक जा सकता है, इसलिए वहां समय से पहले विधानसभा भंग करने या चुनावी समय-सारणी में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी तरह कुछ राज्यों के चुनावी चक्र को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार समायोजित करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में संसद, केंद्र सरकार और चुनावी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसलिए 2029 में एक साथ चुनाव कराने की संभावित योजना को लेकर अभी से राजनीतिक और कानूनी स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में जनता का रुख
'एक देश, एक चुनाव' की चर्चा के बीच 'मूड ऑफ द नेशन' यानी MOTN सर्वे के आंकड़े भी सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की अवधारणा को अभी भी बहुमत से अधिक लोगों का समर्थन प्राप्त है। जनवरी 2026 में जहां 74 प्रतिशत लोगों ने इस व्यवस्था के समर्थन में राय दी थी, वहीं अगस्त 2026 में यह आंकड़ा घटकर 70.4 प्रतिशत रह गया। यानी समर्थन में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन अभी भी 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग इस विचार के पक्ष में बताए गए हैं। सर्वे के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि चुनाव सुधार और बार-बार होने वाले चुनावों को लेकर जनता के बीच चर्चा बनी हुई है। हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय सर्वे के नमूने, पद्धति और सर्वेक्षण की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

 

SCO समिट में होंगे शामिल

चार दिवसीय विदेश दौरे पर पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चार दिवसीय विदेश यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं। उनकी यात्रा 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित है, जिसमें उज्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य का दौरा शामिल है। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है। दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री इस दौरान क्षेत्रीय सहयोग और भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाओं से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दे सकते हैं। यात्रा का सबसे अहम पड़ाव किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाला शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO का शिखर सम्मेलन होगा।

उज्बेकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता पर फोकस
विदेश यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचेंगे। यहां उनकी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के मौजूदा संबंधों की समीक्षा के साथ भविष्य के सहयोग को लेकर चर्चा होने की संभावना है। बैठक में व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर बातचीत हो सकती है। ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर भी विचार किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना इस यात्रा के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल बताया जा रहा है।

रक्षा और व्यापार समझौतों पर रहेगी नजर
प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत होने की संभावना है। इनमें व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने के लिए नए व्यापारिक अवसरों और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा डिजिटल तकनीक और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है। संभावित समझौतों और घोषणाओं पर भारत तथा उज्बेकिस्तान के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से विशेष नजर रहेगी।