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Update Mobile Number in Driving Licence Online: ड्राइविंग लाइसेंस का मोबाइल नंबर अब ऑनलाइन अपडेट, RTO की जरूरत नहीं

मोबाइल नंबर अपडेट करना जरूरी
ड्राइविंग लाइसेंस में दर्ज मोबाइल नंबर को सही और सक्रिय रखना उपयोगी है। परिवहन विभाग के पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट करने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है, जिससे इस काम के लिए RTO कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

 

क्यों जरूरी है मोबाइल नंबर अपडेट
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिए परिवहन सेवाओं से जुड़ी जरूरी सूचनाएं और अपडेट प्राप्त हो सकते हैं। अगर पुराना नंबर बंद हो चुका है या मोबाइल नंबर बदल गया है, तो उसे समय रहते अपडेट करना सुविधाजनक रहेगा।

 

Sarathi Parivahan पोर्टल खोलें
सबसे पहले आधिकारिक Sarathi Parivahan पोर्टल खोलें। वहां अपने राज्य का चयन करके ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है। आधिकारिक परिवहन पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

 

Update Mobile Number विकल्प चुनें
संबंधित सेवा में ‘Update Mobile Number’ विकल्प चुनें। इसके बाद पोर्टल पर ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी मांगी गई जानकारी दर्ज करनी होगी।

 

DL की जानकारी दर्ज करें
अब Driving Licence Number, Date of Birth और पोर्टल पर मांगी गई अन्य जानकारी भरें। कैप्चा पूरा करने के बाद Submit पर क्लिक करें। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर लाइसेंस से जुड़ी जानकारी दिखाई जा सकती है।

 

नया मोबाइल नंबर दर्ज करें
रिकॉर्ड सामने आने के बाद अपना वर्तमान मोबाइल नंबर दर्ज करें और Submit करें। मोबाइल नंबर की पुष्टि के लिए पोर्टल पर OTP सत्यापन की प्रक्रिया उपलब्ध हो सकती है।

 

OTP से करें सत्यापन
मोबाइल पर प्राप्त OTP को पोर्टल पर दर्ज करके Verify करें। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मोबाइल नंबर रिकॉर्ड में अपडेट किया जा सकता है। उपलब्ध प्रक्रिया राज्य और पोर्टल पर सक्रिय सेवा के अनुसार अलग हो सकती है।

 

 

Tata Electronics Creates 1.5 Lakh Jobs: टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 1.5 लाख नौकरियां सृजित की, 65% से अधिक महिलाएं कार्यरत

1.5 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने देश में अब तक 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। कंपनी के CEO रणधीर ठाकुर के अनुसार, उसके कुल कार्यबल में करीब 65 प्रतिशत महिलाएं हैं। इनमें बड़ी संख्या दूरदराज के गांवों और वंचित समुदायों से आने वाली महिलाओं की है।

 

गांवों से टेक्नोलॉजी तक पहुंच
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स अपने बढ़ते विनिर्माण नेटवर्क के लिए कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण देने पर जोर दे रही है। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार वह बड़ी संख्या में महिलाओं को कार्यबल में शामिल करने और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने पर भी ध्यान दे रही है।

 

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में तकनीकी दक्षता, सटीकता और प्रशिक्षण की जरूरत होती है। कंपनी के अनुसार, प्रशिक्षित कर्मचारी इस उभरते विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 300 भारतीय इंजीनियरिंग स्नातकों को ताइवान में तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाने की भी जानकारी दी है।

 

हॉसुर में बड़ा मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क
तमिलनाडु के हॉसुर क्षेत्र में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की कई विनिर्माण सुविधाएं हैं। कंपनी की आधिकारिक लोकेशन जानकारी में केलामंगलम और उड्डानापल्ली, हॉसुर की इकाइयां शामिल हैं। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और उत्पादों से जुड़े विनिर्माण कार्य किए जाते हैं।

 

कर्नाटक में भी मौजूदगी
कर्नाटक में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की नरसापुरा, कोलार और वेमगल समेत कई सुविधाएं हैं। कंपनी के नेटवर्क में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के साथ सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं।

 

धोलेरा में बन रहा सेमीकंडक्टर फैब
गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation यानी PSMC के साथ सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा विकसित कर रही है। कंपनी के अनुसार यह फैब करीब 50,000 वेफर स्टार्ट प्रति माह की क्षमता के लिए विकसित किया जा रहा है।

 

 

India Japan T20 Wide Ball Controversy: बारिश वाले T20 में वाइड पर अंपायर का उल्टा फैसला, भारत ने जापान को दो रन से हराया

मैच में वाइड फैसले पर विवाद
भारत और जापान के बीच 22 सितंबर को खेले गए बारिश से प्रभावित T20 मुकाबले में आखिरी ओवर के दौरान वाइड बॉल के फैसले को लेकर विवाद हो गया। पांच ओवर प्रति पारी के इस मुकाबले में भारत ने जापान को दो रन से हराया, लेकिन अंतिम ओवर में बदले गए वाइड के फैसले ने मैच के बाद चर्चा तेज कर दी।

 

आखिरी ओवर में क्या हुआ
जापान को अंतिम ओवर में जीत के लिए आठ रन की जरूरत थी। अक्षर पटेल की गेंद पर ऑन-फील्ड अंपायर ने पहले वाइड का संकेत दिया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने फैसले पर आपत्ति जताई और अंपायर से बातचीत हुई। बाद में फैसला बदलकर गेंद को वाइड नहीं माना गया।

 

अक्षर और श्रेयस की अंपायर से चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार अक्षर पटेल और भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर इस फैसले को लेकर अंपायर से बातचीत करते नजर आए। फैसले के बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में भी बहस शुरू हुई। हालांकि, खिलाड़ियों द्वारा अंपायर के फैसले पर आपत्ति जताने को सीधे तौर पर किसी तरह की ‘धांधली’ का प्रमाण मानना उचित नहीं है।

 

वाइड बॉल पर क्या कहता है नियम
ICC की T20I खेलने की शर्तों के अनुसार वाइड तय करते समय गेंद की स्थिति के साथ बल्लेबाज की मूवमेंट भी महत्वपूर्ण होती है। मौजूदा नियमों में बल्लेबाज की डिलीवरी के समय स्थिति को संदर्भ बिंदु माना जाता है और यह देखा जाता है कि गेंद बल्लेबाज की पहुंच से बाहर थी या नहीं। बल्लेबाज की अपनी मूवमेंट गेंद को उससे दूर ले जाती है, तो ऐसी गेंद को वाइड नहीं माना जा सकता।

 

क्या वाइड का फैसला बदला जा सकता है
हां, अंपायर अपना फैसला बदल सकता है, लेकिन इसके लिए नियमों में समय और परिस्थिति से जुड़ी शर्तें हैं। ICC की अंपायर संबंधी शर्तों के अनुसार अंपायर अपना फैसला तभी बदल सकता है जब बदलाव तुरंत किया जाए। वहीं वाइड के नियम के अनुसार वाइड का संकेत दिए जाने के बाद गेंद अपने आप डेड नहीं हो जाती।

 

बल्लेबाज की मूवमेंट क्यों अहम है
वाइड का फैसला केवल इस आधार पर नहीं किया जाता कि गेंद बल्लेबाज के शरीर से किस तरफ गई। ICC की मौजूदा T20I वाइड-बॉल व्यवस्था में बल्लेबाज की स्थिति और मूवमेंट को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए किसी डिलीवरी को वाइड या वैध गेंद घोषित करने में अंपायर को गेंद और बल्लेबाज दोनों की स्थिति का आकलन करना होता है।

 

Best Wireless Gamepads Under ₹2,000: ₹2,000 तक में मिलें किफायती वायरलेस कंट्रोलर, गेमिंग के लिए बेस्ट चॉइस

बजट में गेमिंग का विकल्प
PC, TV या मोबाइल पर गेमिंग करने वालों के लिए वायरलेस गेमपैड काफी सुविधाजनक हो सकता है। करीब ₹2,000 के बजट में कई विकल्प मिलते हैं। खरीदारी से पहले कनेक्टिविटी, बैटरी, बटन लेआउट और आपके डिवाइस के साथ कंपैटिबिलिटी जरूर जांचनी चाहिए।

 

Cosmic Byte ARES Wireless
Cosmic Byte ARES Wireless 2.4GHz कनेक्टिविटी वाला गेम कंट्रोलर है। मौजूदा लिस्टिंग में इसकी कीमत करीब ₹1,400 से ₹1,500 के आसपास दिखाई दे रही है। इसमें मैग्नेटिक ट्रिगर और Hall Effect जॉयस्टिक जैसे फीचर्स मिलते हैं।

 

Zebronics Max Link+
Zebronics Max Link+ अपनी ट्रांसपेरेंट बॉडी और RGB लाइटिंग के कारण अलग डिजाइन वाला विकल्प है। इसकी कीमत बिक्री प्लेटफॉर्म के अनुसार बदल सकती है और कुछ लिस्टिंग में यह करीब ₹2,000 के आसपास दिखाई देता है। खरीदने से पहले लाइव कीमत और उपलब्धता जांचना बेहतर रहेगा।

 

रेट्रो गेमिंग विकल्प
Cloudtail Plug & Play Dual Wireless Controllers उन यूजर्स के लिए बनाए गए हैं जो टीवी पर दो खिलाड़ियों के साथ रेट्रो और आर्केड गेमिंग करना चाहते हैं। यह सामान्य अकेले गेमपैड की तुलना में प्लग-एंड-प्ले गेमिंग पैकेज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

 

Cosmic Byte Ares Tri-Mode
Cosmic Byte Ares Tri-Mode में Wireless, Bluetooth और USB-C Wired कनेक्शन के विकल्प मिलते हैं। कंपनी की मौजूदा लिस्टिंग में इसकी कीमत करीब ₹1,699 है। इसमें Hall Effect Joystick और 1000Hz सपोर्ट जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं।

 

Ant Esports GP325
Ant Esports GP325 Wireless Game Controller में वायरलेस कनेक्टिविटी के साथ मोबाइल होल्डर दिया जाता है। मौजूदा रिटेल लिस्टिंग में इसकी कीमत करीब ₹1,550 दिखाई गई है, हालांकि अलग-अलग विक्रेताओं के यहां कीमत बदल सकती है।

 

कनेक्टिविटी जरूर देखें
गेमपैड खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपके डिवाइस में 2.4GHz डोंगल, Bluetooth या USB कनेक्शन में से कौन सा विकल्प काम करेगा। PC गेमिंग के लिए XInput सपोर्ट भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि कई PC गेम कंट्रोलर इनपुट के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

 

 

Jamui Case Main Accused Nandan Yadav Arrested: जमुई में नंदन यादव की गिरफ्तारी, पुलिस मुठभेड़ में पैर में लगी गोली

मुख्य आरोपी गिरफ्तार
बिहार के जमुई में दो नाबालिग छात्रों से कथित बदसलूकी के मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लगने की बात सामने आई है। घायल अवस्था में उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

कौन है नंदन यादव
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नंदन यादव जमुई के प्रतापपुर गांव का रहने वाला है और उसकी उम्र करीब 18 वर्ष बताई जा रही है। पुलिस उसे 19 सितंबर को सामने आए मामले का मुख्य आरोपी बता रही है। उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है।

 

वीडियो सामने आने के बाद जांच
मामला तब सामने आया जब दो नाबालिग छात्रों से कथित बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और वीडियो के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास किया। मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम भी गठित की है।

 

पुलिस कार्रवाई में घायल
पुलिस के मुताबिक नंदन को पकड़ने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान उसने भागने की कोशिश की। इसी दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगने की बात कही गई है। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। मुठभेड़ से जुड़ी परिस्थितियों की पूरी जानकारी जांच के बाद स्पष्ट होगी।

 

दूसरा आरोपी भी गिरफ्तार
नंदन यादव के साथ एक अन्य आरोपी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या पांच हो गई है। पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

 

पिता पर मामले की बात
कुछ स्थानीय दावों में नंदन यादव के पिता गनौरी यादव के खिलाफ भी आपराधिक मामला चलने की बात कही गई है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से स्पष्ट नहीं होती है। इसलिए इसे फिलहाल अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

 

 

PPF vs NPS: ₹5,000 Monthly Investment Comparison: PPF बनाम NPS: महीने के ₹5,000 निवेश पर संभावित रिटर्न का विस्तृत विश्लेषण

निवेश की तुलना
बचत और रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए PPF और NPS दोनों लोकप्रिय विकल्प हैं, लेकिन दोनों की संरचना अलग है। PPF सरकार समर्थित बचत योजना है, जबकि NPS बाजार से जुड़ा रिटायरमेंट निवेश विकल्प है। इसी वजह से दोनों में संभावित रिटर्न, जोखिम और निवेश की अवधि अलग-अलग हो सकती है।

 

PPF में निवेश का कैलकुलेशन
दिए गए उदाहरण में PPF में हर साल ₹50,000 निवेश करने की गणना की गई है। 7.1% की ब्याज दर मानने पर 15 साल में कुल निवेश ₹7.50 लाख होगा और अनुमानित मैच्योरिटी राशि करीब ₹13.56 लाख बताई गई है। हालांकि, PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है, इसलिए भविष्य में यह दर बदल सकती है।

 

NPS में ₹5,000 महीने का निवेश
NPS के उदाहरण में 25 वर्ष की उम्र से हर महीने ₹5,000 निवेश करने की बात कही गई है। 9% औसत वार्षिक रिटर्न मानकर 35 साल में कुल योगदान ₹21 लाख होगा। दिए गए अनुमान के मुताबिक रिटायरमेंट के समय कॉर्पस करीब ₹1.47 करोड़ तक पहुंच सकता है।

 

₹1.45 करोड़ या ₹1.47 करोड़ की गारंटी नहीं
यह समझना जरूरी है कि ₹1.45 करोड़ या ₹1.47 करोड़ कोई निश्चित या गारंटीड रकम नहीं है। NPS बाजार से जुड़ा निवेश है और इसका वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इसलिए 9% वार्षिक रिटर्न को केवल अनुमानित उदाहरण के तौर पर देखना चाहिए।

 

PPF और NPS में बड़ा अंतर
PPF में रिटर्न बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित नहीं होता और यह सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। वहीं NPS मुख्य रूप से रिटायरमेंट के लिए कॉर्पस तैयार करने पर केंद्रित है और इसमें इक्विटी समेत अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का विकल्प मिलता है।

 

निवेश की अवधि अलग
PPF की सामान्य अवधि 15 साल होती है, जिसे निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। दूसरी ओर NPS लंबी अवधि की रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बनाया गया है। इसलिए तुलना करते समय केवल अंतिम रकम देखने के बजाय निवेश अवधि और निकासी से जुड़े नियमों को भी समझना जरूरी है।

 

₹5,000 महीने और ₹50,000 सालाना में अंतर
हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर सालाना योगदान ₹60,000 होता है, जबकि दिए गए PPF कैलकुलेशन में सालाना ₹50,000 निवेश माना गया है। ऐसे में दोनों आंकड़ों को समान निवेश राशि मानकर सीधे तुलना करना सही नहीं होगा।

 

Turkey Buys Record Diesel From India: भारत से तुर्किये की डीजल खरीद में नया रिकॉर्ड, रूसी सप्लाई घटने से विकल्पों की ओर रुख

तुर्किये ने भारत से रिकॉर्ड डीजल खरीदा
तुर्किये ने अगस्त 2026 में भारत से रिकॉर्ड मात्रा में डीजल आयात किया। शिपिंग और कमोडिटी डेटा के अनुसार, इस महीने भारत से तुर्किये को डीजल की आवक 1.20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रही। Kpler के 2017 से उपलब्ध आंकड़ों में इसे रिकॉर्ड स्तर बताया गया है।

 

रूस से डीजल सप्लाई में कमी
तुर्किये लंबे समय से अपनी डीजल जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से पूरा करता रहा है। हालांकि, रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और डीजल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों के कारण वहां से आपूर्ति में कमी आई। Kpler के मुताबिक अगस्त में तुर्किये का रूसी डीजल आयात करीब 80,000 बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि साल के शुरुआती महीनों में यह आंकड़ा 2 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा था।

 

भारत बना बड़ा विकल्प
रूस से सप्लाई घटने और पश्चिम एशिया में ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के बीच तुर्किये ने गैर-रूसी स्रोतों से खरीद बढ़ाई। इसी दौरान भारत और अमेरिका से डीजल आयात में तेजी आई। अगस्त में अमेरिका से तुर्किये का डीजल आयात करीब 90,000 बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि भारत से आने वाली मात्रा 1.20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक बताई गई।

 

अलग डेटा में अलग आंकड़े
भारत से तुर्किये को डीजल निर्यात के आंकड़ों में अलग-अलग डेटा एजेंसियों के बीच अंतर भी देखने को मिला है। Energy Aspects ने अगस्त में भारतीय आपूर्ति का अनुमान करीब 74,000 बैरल प्रतिदिन लगाया। उसके आंकड़ों के मुताबिक यह 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इसलिए अलग-अलग स्रोतों के आंकड़ों को उनकी संबंधित डेटा पद्धति के संदर्भ में देखना जरूरी है।

 

रिलायंस की अहम भूमिका
भारत के प्रमुख रिफाइनिंग और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल है। कंपनी की जामनगर रिफाइनरी से पेट्रोल, डीजल समेत कई रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में अगस्त के दौरान तुर्किये को बढ़े भारतीय पेट्रोलियम निर्यात में रिलायंस की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया गया है।

 

तुर्किये का सप्लाई नेटवर्क बदला
2025 में तुर्किये के डीजल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी बताई गई थी। अगस्त 2026 में रूसी आपूर्ति घटने के बाद यह हिस्सा करीब 20 फीसदी रह गया। इससे पता चलता है कि तुर्किये ने अपनी ईंधन जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से खरीद बढ़ाकर सप्लाई स्रोतों में विविधता लाई है।

 

Vande Mataram Case: Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट में ‘नक्सली’ टिप्पणी पर तीखा तर्क-वितर्क, वंदे मातरम के आदेशों पर केंद्र से सवाल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को वंदे मातरम से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर के बीच तीखी बहस हुई। मामला कर्नाटक संगीतकार टी.एम. कृष्णा की याचिका से जुड़ा है, जिसमें वंदे मातरम के सभी छह अंतरों के गायन से संबंधित केंद्र के निर्देशों और 2026 में किए गए कानूनी संशोधन को चुनौती दी गई है।

 

‘नक्सली’ टिप्पणी पर विवाद
सुनवाई के दौरान मुरलीधर ने संवैधानिक प्रक्रिया और कानून बनाने में व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत पर दलील रखी। इसके जवाब में तुषार मेहता ने संवैधानिक तरीके से निर्णय लेने के संदर्भ में ‘नक्सली’ विचारधारा का उल्लेख किया। मुरलीधर ने इस शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

 

मेहता ने टिप्पणी वापस नहीं ली
रिपोर्टों के मुताबिक, तुषार मेहता ने टिप्पणी वापस लेने से इनकार किया और कहा कि उनका संदर्भ किसी व्यक्ति के बजाय ऐसी विचारधारा से था, जिसे वह संवैधानिक प्रक्रिया के विरोध से जोड़ रहे थे। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने इस दौरान कहा कि किसी मुद्दे पर अलग विचार रखना किसी व्यक्ति को ‘नक्सली’ नहीं बनाता।

 

CJI ने बहस सीमित रखने को कहा
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बहस को मामले के कानूनी सवालों तक सीमित रखने पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी सुनवाई के दौरान संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के महत्व पर टिप्पणी की। अदालत ने संकेत दिया कि किसी व्यक्ति के विचार या पहचान से उसके संवैधानिक अधिकार खत्म नहीं होते।

 

वंदे मातरम के गायन पर कानूनी सवाल
टी.एम. कृष्णा की याचिका 2026 के संशोधन और केंद्र के उन निर्देशों को चुनौती देती है, जिनमें कुछ सरकारी, औपचारिक और सांस्कृतिक अवसरों पर वंदे मातरम के छह अंतरों के गायन का प्रावधान किया गया है। संशोधित कानून में वंदे मातरम के गायन को जानबूझकर रोकने या उसके गायन में लगे समूह को बाधित करने पर दंड का प्रावधान किया गया है।

 

Disha Salian Case Update: दिशा सालियान केस में नई जांच की दिशा

दिशा सालियान की जून 2020 में हुई मौत का मामला करीब छह साल बाद एक बार फिर जांच के केंद्र में है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया था। अदालत ने मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच और लंबे समय तक FIR दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद CBI ने सितंबर में FIR दर्ज कर जांच शुरू की है। एजेंसी अब पुराने पुलिस रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक सामग्री और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की दोबारा जांच कर रही है। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री सामने आने से पहले किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए।

दिशा के पिता की शिकायत भी जांच के दायरे में
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान लंबे समय से अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों की दोबारा जांच की मांग करते रहे हैं। उनकी शिकायत और अदालत में दायर याचिका के बाद मामले को CBI तक पहुंचाया गया। CBI के सामने अब शुरुआती जांच में दर्ज दस्तावेजों, पुलिस कार्रवाई और उस रात मौजूद लोगों से जुड़े तथ्यों की समीक्षा का विषय है। सतीश सालियान और उनके वकील की ओर से कई गंभीर आरोप और दावे किए गए हैं, लेकिन इन दावों को फिलहाल जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता। इन आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जाने वाले स्वतंत्र सबूतों से होना बाकी है।

FIR में नामों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट
CBI FIR को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग तरह की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि शिकायत के आधार पर कई लोगों के नाम जांच के लिए सामने आए हैं, जबकि अन्य रिपोर्टों ने CBI अधिकारियों के हवाले से स्पष्ट किया कि FIR में इस चरण पर किसी को आरोपी नामित नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश में भी यह स्पष्ट किया गया था कि केवल किसी व्यक्ति का नाम सामने आने से उसे आरोपी नहीं माना जाएगा। इसलिए फिलहाल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप सिद्ध होने की बात कहना उचित नहीं होगा। जांच आगे बढ़ने के साथ CBI उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करेगी।

 

IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे में छात्र की मौत पर छात्रों ने उठाया विरोध

IIT बॉम्बे में बीटेक के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को मौत के बाद संस्थान में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। साहिल को पवई स्थित IIT बॉम्बे के हॉस्टल परिसर में मृत पाया गया था। उनकी मौत से पहले मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर एक परीक्षा संबंधी मामला सामने आया था। संस्थान की शुरुआती जानकारी में कहा गया था कि छात्र ने परीक्षा के दौरान AI प्लेटफॉर्म पर प्रश्नपत्र अपलोड किया था। हालांकि, बाद में IIT बॉम्बे ने अपने इस शुरुआती संचार को वापस लेते हुए माफी मांगी और कहा कि घटना से जुड़े तथ्य जांच के अधीन हैं।

नकल के आरोप और परिवार के गंभीर दावे
परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम के बाद साहिल की मौत हुई, जिसके चलते छात्रों ने संस्थान की अनुशासनात्मक प्रक्रिया और छात्र कल्याण व्यवस्था पर सवाल उठाए। साहिल के परिवार ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से उनके साथ मानसिक उत्पीड़न और जातिगत टिप्पणियां की जा रही थीं। परिवार की शिकायत में प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला और अन्य अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर IIT बॉम्बे ने कहा था कि साहिल ने संस्थान के SC/ST सेल या प्रशासन के सामने जातिगत भेदभाव की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। इसलिए फिलहाल इन आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि परिवार की शिकायत और आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।

पुलिस ने दर्ज किया FIR, जांच क्राइम ब्रांच को
साहिल के परिवार की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। FIR में परीक्षा की निगरानी कर रहे प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का नाम सामने आया है और पुलिस के अनुसार अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी अब साहिल की मौत से पहले की घटनाओं, परीक्षा केंद्र पर हुए घटनाक्रम, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध डिजिटल तथा CCTV साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। 22 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार क्राइम ब्रांच साहिल की अंतिम गतिविधियों और घटनाक्रम को CCTV फुटेज के जरिए भी खंगाल रही है।