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Vijay, Rahul Gandhi: 9 सितंबर को TVK की अहम गठबंधन बैठक

तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने अपने गठबंधन और समर्थन देने वाले दलों की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक 9 सितंबर 2026 को बुलाने की घोषणा की है। यह बैठक चेन्नई के पनेयूर स्थित TVK मुख्यालय में शाम 4 बजे आयोजित की जाएगी और इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री एवं TVK अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय करेंगे। पहली समन्वय बैठक 1 जुलाई को कोवलम में हुई थी, जिसमें कांग्रेस, VCK, IUML और MDMK के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था, जबकि वाम दलों ने दूरी बनाए रखी थी। अब TVK ने दूसरी बैठक के जरिए अपने राजनीतिक मोर्चे को अधिक औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बैठक में गठबंधन की भविष्य की राजनीतिक रणनीति और आपसी समन्वय पर चर्चा होने की संभावना है।

गठबंधन के नाम और राजनीतिक ढांचे पर चर्चा
9 सितंबर की बैठक में TVK के नेतृत्व वाले राजनीतिक मोर्चे को औपचारिक नाम देने और उसके भविष्य के ढांचे पर चर्चा होने की उम्मीद है। India Today की रिपोर्ट के अनुसार बैठक में गठबंधन के आधिकारिक नाम की घोषणा की जा सकती है। वहीं अन्य रिपोर्टों में गठबंधन की संरचना और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चा की बात सामने आई है। ऐसे में बैठक को केवल औपचारिक मुलाकात के बजाय राजनीतिक मोर्चे को व्यवस्थित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। TVK सरकार बनने के बाद यह दूसरी बड़ी समन्वय बैठक होगी। बैठक में स्थानीय निकाय चुनाव और आगे की राजनीतिक रणनीति जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसलों की पुष्टि बैठक के बाद ही होगी।

कांग्रेस 9 सितंबर की बैठक में होगी शामिल
TVK की बैठक को लेकर अब कांग्रेस की भागीदारी भी स्पष्ट हो गई है। तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष बी. मणिकम टैगोर ने 5 सितंबर को पुष्टि की कि कांग्रेस 9 सितंबर की बैठक में शामिल होगी। कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कौन करेगा और बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर पार्टी स्तर पर तैयारी की जा रही है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि TVK के कुछ नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में पेश किए जाने से कांग्रेस के भीतर नाराजगी सामने आई है। इसके बावजूद कांग्रेस ने बैठक में भाग लेने का फैसला किया है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों दलों के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मौजूदा गठबंधन को लेकर बातचीत का रास्ता खुला हुआ है।

 

Supreme Court: 7 राज्यों में जजों की रिटायरमेंट उम्र 62

सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के लिए सात राज्यों को अपने सेवा नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया है। इन राज्यों में छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इन सभी राज्यों की सरकारों ने रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। कोर्ट ने नियमों में जरूरी बदलाव जल्द से जल्द और बेहतर होगा कि दो महीने के भीतर करने को कहा है। यह निर्देश लंबित मामलों और अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की कमी से जुड़ी व्यापक चिंता के बीच आया है।

60 की उम्र के बाद सेवा जारी रखने के लिए Assessment जरूरी
रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष किए जाने का लाभ बिना किसी शर्त के नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब कोई न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष की उम्र पूरी करेगा, तो संबंधित हाईकोर्ट उसकी Suitability और Performance का आकलन करेगा। आकलन में उपयुक्त पाए जाने पर ही अधिकारी 62 वर्ष तक सेवा जारी रख सकेगा। नियमों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने तक भी सात राज्यों में 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके अधिकारियों को निर्धारित शर्तों के अधीन 62 वर्ष तक सेवा से अलग नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य अनुभवी और सक्षम न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग करना है।

बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो सप्ताह का समय
सुप्रीम कोर्ट ने केवल सात राज्यों का मामला तय करके प्रक्रिया खत्म नहीं की है। कोर्ट ने उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा है, जिन्होंने रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का समर्थन नहीं किया है या अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। उन्हें 60 से 62 वर्ष की उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा गया है। इससे संकेत मिलता है कि अदालत जिला न्यायपालिका में रिटायरमेंट उम्र को लेकर व्यापक स्तर पर एकरूपता की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि फिलहाल पूरे देश में 62 वर्ष की समान सीमा लागू नहीं हुई है।

 

Delhi NCR : दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन: सर्दियों के प्रदूषण से निपटने की तैयारी

दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और संबंधित राज्यों ने सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक की कार्ययोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-NCR से जुड़े राज्यों की Pollution Action Plans और IEC यानी Information, Education and Communication योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के पर्यावरण मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर क्षेत्रवार और सेक्टरवार कार्रवाई तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाली और नियमों का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर भी जोर दिया। इन तैयारियों का उद्देश्य प्रदूषण के बढ़ते स्तर से पहले ही प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण मजबूत करना है।

दिल्ली में 334 प्रवर्तन टीमें तैनात
दिल्ली सरकार ने स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी के लिए कुल 334 प्रवर्तन टीमों की व्यवस्था की है। इनमें शहर की 39 उपमंडल इकाइयों के लिए 78 टीमें और वार्ड स्तर पर 256 टीमें शामिल हैं। ये टीमें दिन-रात निरीक्षण कर कचरा और बायोमास जलाने, निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, अनधिकृत ईंधन के इस्तेमाल और कचरे की अवैध डंपिंग जैसे मामलों पर नजर रखेंगी। टीमों को रात में भी निरीक्षण करने और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान कर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है। इनके जरिए निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों तथा संबंधित नियमों के अनुपालन की भी निगरानी की जाएगी। इस व्यवस्था का मकसद प्रदूषण के स्रोत सामने आते ही स्थानीय स्तर पर तेजी से कार्रवाई करना है।

48 हॉटस्पॉट पर जीरो टॉलरेंस
दिल्ली में 48 गैर-अनुरूपता वाले प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान की गई है, जहां विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जाएगा। इन क्षेत्रों में जिलाधिकारियों की निगरानी में नियमों का उल्लंघन करने वाली प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इनमें मेटल कास्टिंग, पाउडर कोटिंग, बफिंग और पॉलिशिंग, प्लास्टिक वेस्ट री-प्रोसेसिंग, स्प्रे पेंटिंग और हीट-ट्रीटमेंट जैसी इकाइयां शामिल हैं। केंद्र स्तर की समीक्षा में भी प्रदूषण फैलाने वाली गैर-अनुरूप इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की सामान्य निगरानी के बजाय ज्यादा जोखिम वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

4 साल की एलेना ने रचा इतिहास: बनीं सबसे कम उम्र की FIDE रेटेड महिला

ओडिशा की रहने वाली चार वर्षीय एलेना मिश्रा ने शतरंज की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 4 साल, 6 महीने और 16 दिन की उम्र में एलेना आधिकारिक FIDE रेटिंग हासिल करने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई हैं। सितंबर 2026 की FIDE रेटिंग सूची में उनका नाम 1432 की ब्लिट्ज रेटिंग के साथ दर्ज हुआ है। इतनी कम उम्र में आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग हासिल करना उनकी उपलब्धि को खास बनाता है। उपलब्ध शतरंज रिकॉर्ड और हालिया रिपोर्टों के अनुसार एलेना ने यह मुकाम चार साल की उम्र में हासिल किया है।

1432 की ब्लिट्ज रेटिंग मिली
एलेना मिश्रा को सितंबर 2026 की FIDE रेटिंग सूची में 1432 की आधिकारिक ब्लिट्ज रेटिंग मिली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एलेना का जन्म 15 फरवरी 2022 को हुआ था और वह 2022 या उसके बाद जन्मी आधिकारिक FIDE रेटिंग वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी हैं। उनकी रेटिंग ब्लिट्ज प्रारूप में दर्ज की गई है। इस उपलब्धि के साथ एलेना का नाम कम उम्र में FIDE रेटिंग हासिल करने वाली महिला खिलाड़ियों के रिकॉर्ड में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि भारतीय शतरंज के लिए भी उल्लेखनीय मानी जा रही है।

भुवनेश्वर की प्रतियोगिता से मिली रेटिंग
एलेना ने यह उपलब्धि भुवनेश्वर में आयोजित Odisha State Blitz FIDE Rating Open Chess Championship 2026 में प्रदर्शन के बाद हासिल की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रतियोगिता 16 अगस्त 2026 को आयोजित हुई थी। एलेना ने इस टूर्नामेंट में 9 में से 4 अंक हासिल किए और दो FIDE रेटेड खिलाड़ियों के खिलाफ जीत दर्ज की। प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन के बाद सितंबर की FIDE रेटिंग सूची में उनकी ब्लिट्ज रेटिंग 1432 दर्ज हुई। इतनी कम उम्र में FIDE रेटेड प्रतियोगिता में हिस्सा लेना भी 

 

4 हजार तक पहुंची किसानों की संख्या: चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसान डटे

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले पंजाब के किसान संगठनों का सात दिवसीय पक्का मोर्चा चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर 5 सितंबर को पांचवें दिन भी जारी है। किसानों ने यह आंदोलन 1 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक के लिए शुरू किया है और बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं। यह प्रदर्शन मोहाली और चंडीगढ़ को जोड़ने वाले मार्ग पर हो रहा है, जिसके चलते प्रशासन को यातायात और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने पड़े हैं। Hindustan Times के अनुसार शुक्रवार तक प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़कर करीब 4,000 हो गई थी।

MSP की कानूनी गारंटी प्रमुख मांग
किसानों के आंदोलन की प्रमुख मांग सभी कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी है। SKM की मांग है कि MSP को कानूनी रूप से लागू किया जाए और किसानों को उनकी उपज का सुनिश्चित मूल्य मिले। किसानों ने MSP को स्वामीनाथन आयोग के C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर लागू करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सभी फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस मुद्दे को आंदोलन के प्रमुख कृषि संबंधी मुद्दों में शामिल किया गया है।

कर्जमाफी और गन्ने के दाम की मांग
किसान संगठनों ने किसानों और कृषि मजदूरों के पूर्ण कर्जमाफी की मांग भी उठाई है। इसके अलावा गन्ना उत्पादक किसानों के लिए गन्ने का भाव बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की गई है। किसानों ने गन्ने के बकाया भुगतान को लेकर भी समाधान की मांग रखी है। SKM के मुताबिक कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव के बीच किसानों तथा ग्रामीण श्रमिकों को राहत देने के लिए कर्जमाफी और बेहतर आय जरूरी है। आंदोलन में किसानों और कृषि मजदूरों के लिए 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की मांग भी शामिल है।

 

राष्ट्रपति देंगी 48 शिक्षकों को सम्मान: शिक्षक दिवस पर होगा राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह पुरस्कार समारोह अभी होना बाकी है और राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कार प्रदान किए जाने की आधिकारिक जानकारी शिक्षा मंत्रालय और प्रेस सूचना ब्यूरो ने जारी की है। इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 48 स्कूली शिक्षकों का चयन किया गया है। ये शिक्षक देश के अलग-अलग राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के संस्थानों से चुने गए हैं। समारोह में चयनित शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों को दर्शाने वाली लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित की जाएंगी।

48 स्कूली शिक्षकों का हुआ चयन
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए कुल 48 स्कूली शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें 26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक शामिल हैं। चयनित शिक्षकों का संबंध 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के 6 संगठनों से है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने शिक्षकों के चयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों वाली प्रक्रिया अपनाई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह चयन प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन तरीके से आयोजित की गई थी।

पुरस्कार अभी प्रदान किया जाना बाकी
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 5 सितंबर से पहले इसे राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया नहीं गया है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 5 सितंबर को विज्ञान भवन में पुरस्कार प्रदान करेंगी। इसलिए इस खबर में “राष्ट्रपति ने पुरस्कार दिए” या “पुरस्कार प्रदान कर चुकी हैं” कहना गलत होगा। सही तथ्य यह है कि राष्ट्रपति निर्धारित समारोह में चयनित शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी।

 

सांभर में गोबर पाउडर मिलाने का आरोप: पत्नी की बर्खास्तगी का बदला लेने का आरोप

तमिलनाडु के ईरोड जिले में सत्यमंगलम के पास एक सरकारी माध्यमिक विद्यालय के नाश्ते में परोसे जाने वाले सांभर के नमूने में कथित तौर पर गोबर का पाउडर मिलाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में 35 वर्षीय ड्राइवर बी अरुमुगम को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर अपनी पत्नी की स्कूल से बर्खास्तगी का बदला लेने के लिए एक छात्रा के जरिए सांभर के नमूने में मिलावट करवाने का आरोप है। घटना रामाबैयालुर सरकारी माध्यमिक विद्यालय से जुड़ी है, जहां करीब 51 छात्र पढ़ते हैं। राहत की बात यह रही कि कथित मिलावट केवल सांभर के नमूने में की गई थी और किसी छात्र को इसका सेवन नहीं करना पड़ा।

शिक्षिका ने सांभर के स्वाद में बदलाव देखा
घटना 31 अगस्त की सुबह सामने आई, जब स्कूल की शिक्षिका रेवती ने नाश्ते के लिए तैयार किए गए सांभर के नमूने की जांच की। बताया गया कि सांभर सामान्य से अधिक पीला दिखाई दे रहा था और उसका स्वाद भी कड़वा था। शिक्षिका ने उसी दिन दोपहर में इसकी जानकारी प्रधानाध्यापिका को दी। इसके बाद स्कूल स्तर पर मामले की जानकारी जुटाई गई और अगले दिन पूछताछ के दौरान एक कक्षा 8 की छात्रा द्वारा सांभर के नमूने में कथित तौर पर गोबर पाउडर मिलाने की बात सामने आई। शिक्षकों ने छात्रा से पूछताछ की तो उसने कथित रूप से बी अरुमुगम का नाम बताया।

पत्नी की बर्खास्तगी से जोड़कर देखा जा रहा मामला
पुलिस के अनुसार, आरोपी अरुमुगम की पत्नी आलममल पहले स्कूल में संविदा आधार पर रसोइया के रूप में काम करती थीं। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, काम में कमियां पाए जाने के बाद उन्हें करीब डेढ़ महीने पहले काम से हटा दिया गया था। पुलिस का आरोप है कि पत्नी को नौकरी से हटाए जाने से नाराज अरुमुगम ने बदला लेने की योजना बनाई। इसी कथित योजना के तहत उसने कक्षा 8 की छात्रा को सांभर के नमूने में गोबर पाउडर मिलाने के लिए मजबूर किया। पुलिस मामले में आरोपी की भूमिका और छात्रा से उसके संपर्क सहित अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

 

10 देशों के न्यायिक प्रमुखों से मिलेंगे CJI: नई दिल्ली में BRICS चीफ जस्टिस फोरम शुरू

भारत की मेजबानी में BRICS Chief Justices Forum की शुरुआत आज नई दिल्ली में हो गई है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय की मेजबानी में आयोजित यह तीन दिवसीय फोरम 4 से 6 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों और Partner Countries के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। फोरम का उद्देश्य न्याय व्यवस्था से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श और न्यायपालिकाओं के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। बैठक में न्याय वितरण, अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान, तकनीक और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा होगी। यह मंच विभिन्न देशों की न्यायिक संस्थाओं के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।

CJI सूर्यकांत करेंगे न्यायिक नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें
फोरम के उद्घाटन दिवस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत विभिन्न देशों के न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, यूएई, बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक नेताओं के साथ बातचीत प्रस्तावित है। द्विपक्षीय मुलाकातों का उद्देश्य साझा न्यायिक हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है। इसके साथ ही विभिन्न न्यायपालिकाओं के बीच सहयोग और संस्थागत संवाद को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। अलग-अलग देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के अनुभवों को साझा करने का अवसर इन बैठकों को महत्वपूर्ण बनाता है। फोरम के दौरान भारत की न्यायपालिका के साथ अन्य देशों के न्यायिक संस्थानों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न्यायपालिका पर चर्चा
BRICS Chief Justices Forum में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न्यायपालिका के भविष्य पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होगी। न्यायिक प्रशासन में डिजिटल तकनीक और AI के इस्तेमाल से जुड़े अवसरों तथा चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। अदालतों में तकनीक के इस्तेमाल से मामलों के प्रबंधन और न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही AI के जिम्मेदार और उचित इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर न्यायिक दृष्टिकोण सामने रखे जाएंगे। बदलती तकनीकी दुनिया में न्यायपालिका की भूमिका और डिजिटल नवाचार के प्रभाव को भी चर्चा के एजेंडे में शामिल किया गया है। यह सत्र न्याय व्यवस्था में तकनीकी बदलावों को समझने और उनके भविष्य के प्रभावों पर साझा विचार विकसित करने का अवसर देगा।

 

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट: तरजीही टैरिफ पर भारत का रुख साफ

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान के बाद वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी समझौते से जुड़े मसौदे और प्रमुख शर्तों पर काम कर रहे हैं। भारत की कोशिश है कि समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी और बेहतर कारोबारी अवसर मिलें। सरकार का रुख है कि घरेलू हितों और भारतीय उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। टैरिफ से जुड़े मुद्दे अभी भी बातचीत के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं। ऐसे में समझौते को अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच शेष मुद्दों पर सहमति बनना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तरजीही टैरिफ दरों पर भारत की नजर
व्यापार समझौते में टैरिफ का मुद्दा सबसे अहम अड़चनों में से एक बना हुआ है। भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में उचित और बेहतर दरों का लाभ मिले। भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है, इसलिए वहां शुल्क दरों का सीधा असर उनके कारोबार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ता है। सरकार का मानना है कि अगर भारतीय सामानों के लिए अनुकूल टैरिफ व्यवस्था तैयार होती है तो निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। इसी वजह से भारत समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देने में जल्दबाजी के बजाय अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। टैरिफ व्यवस्था पर ठोस सहमति बनने के बाद ही डील को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ से बदला परिदृश्य
अमेरिका की ओर से भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता का माहौल और जटिल हुआ है। टैरिफ में बदलाव का असर भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है। भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले प्रतिकूल स्थिति का सामना न करना पड़े। इसी संदर्भ में तरजीही दरों का मुद्दा बातचीत में महत्वपूर्ण बना हुआ है। दोनों पक्षों के बीच व्यापार संतुलन, बाजार पहुंच और शुल्क व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। अंतिम समझौते में इन सभी पहलुओं पर सहमति बनना भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

 

गडकरी का बड़ा ट्रैफिक प्लान: बार-बार नियम तोड़े तो लाइसेंस रद्द

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों की जानकारी दी है। इनमें बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर सख्ती के लिए नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लागू करने की योजना प्रमुख है। इस व्यवस्था के तहत वाहन चालकों के ट्रैफिक उल्लंघनों का डिजिटल रिकॉर्ड रखने और लगातार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य आदतन नियम तोड़ने वाले चालकों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

बार-बार नियम तोड़े तो लाइसेंस पर कार्रवाई
प्रस्तावित नेगेटिव पॉइंट सिस्टम में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को रिकॉर्ड करने और उसके आधार पर चालक के खिलाफ कार्रवाई करने की व्यवस्था की जा सकती है। रेड लाइट जंप करना, तेज रफ्तार से वाहन चलाना, बिना हेलमेट या सीटबेल्ट के वाहन चलाने जैसे उल्लंघनों को इस तरह की व्यवस्था के दायरे में लाने की बात कही गई है। लगातार नियम तोड़ने वाले चालकों के लिए तय सीमा के बाद ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने का प्रावधान प्रस्तावित किया जा रहा है। इसका मकसद बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को सड़क पर जोखिम पैदा करने से रोकना है। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

बाइक टैक्सी को राज्यों में मंजूरी देने की अपील
नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से निजी दोपहिया वाहनों को बाइक टैक्सी के रूप में संचालित करने की अनुमति देने की अपील की है। उनके मुताबिक बाइक टैक्सी व्यवस्था से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। निजी स्कूटर और मोटरसाइकिल के इस्तेमाल से लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है। केंद्र की ओर से इस क्षेत्र के लिए दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन परिवहन से जुड़े कई पहलुओं पर अंतिम निर्णय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए केंद्र सरकार राज्यों से बाइक टैक्सी को लेकर अपने नियमों के अनुसार अनुमति देने की अपील कर रही है।