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Asian Games Medal Dip: 800 करोड़ के बावजूद एशियन गेम्स में घटे भारत के पदक

800 करोड़ के निवेश के बावजूद घटे भारत के पदक
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 21 स्वर्ण समेत कुल 85 पदक जीते और पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। हालांकि, यह प्रदर्शन 2023 के हांगझू एशियन गेम्स के मुकाबले कमजोर रहा, जहां भारत ने 28 स्वर्ण सहित 107 पदक जीते थे। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले संस्करण की तुलना में खेलों की तैयारी और वित्तीय सहायता पर खर्च करीब चार गुना बढ़ाकर लगभग 800 करोड़ रुपये किया गया, लेकिन कुल पदकों में करीब 20.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

 

निशानेबाजी में 7 पदकों की गिरावट
भारत के प्रदर्शन में सबसे बड़ी चिंता निशानेबाजी और एथलेटिक्स जैसे प्रमुख खेलों में दिखाई दी। निशानेबाजी में हांगझू के 22 पदकों के मुकाबले इस बार भारत को 15 पदक मिले। स्वर्ण पदकों की संख्या भी सात से घटकर तीन रह गई। एथलेटिक्स में भी पिछले संस्करण के 29 पदकों के मुकाबले इस बार 24 पदक मिले। हालांकि एथलेटिक्स में कांस्य पदक नौ से बढ़कर 14 हुए, लेकिन स्वर्ण और रजत पदकों में कमी का असर कुल प्रदर्शन पर पड़ा।

 

बैडमिंटन और टेनिस में भी निराशा
बैडमिंटन में भारत ने हांगझू एशियन गेम्स में एक स्वर्ण सहित तीन पदक जीते थे, लेकिन आइची-नागोया में टीम केवल एक पदक तक सीमित रही। टेनिस में पिछली बार भारत ने दो पदक जीते थे, जबकि इस बार खाता नहीं खुल सका। तीरंदाजी में भारत ने कुल पदकों के मामले में पिछला प्रदर्शन दोहराया, लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या पांच से घटकर तीन रह गई। इससे पता चलता है कि पदकों में कमी किसी एक खेल तक सीमित नहीं रही।

 

जापान ने 81 पदक बढ़ाए, चीन शीर्ष पर
एशियन गेम्स 2026 की पदक तालिका में चीन 341 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा। जापान और दक्षिण कोरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जबकि भारत चौथे स्थान पर बना रहा। मेजबान जापान के प्रदर्शन में बड़ी बढ़ोतरी हुई। हांगझू में 188 पदक जीतने वाला जापान इस बार 269 पदक तक पहुंचा। उसके स्वर्ण पदक भी 52 से बढ़कर 83 हो गए, यानी कुल पदकों में 81 की बढ़ोतरी हुई।

 

ईरान के प्रदर्शन से मिला अहम संकेत
ईरान ने भी इस एशियन गेम्स में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और 19 स्वर्ण पदकों के साथ छठा स्थान हासिल किया। रिपोर्ट में उसके सामने मौजूद क्षेत्रीय तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और सीमित परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि खेलों में सफलता केवल बजट पर निर्भर नहीं करती। प्रतिभा विकास, तैयारी, प्रशिक्षण व्यवस्था और खेल तंत्र की निरंतरता भी पदक प्रदर्शन को प्रभावित करती है।

 

बड़ा बजट, लेकिन जमीनी तैयारी पर सवाल
भारत के प्रदर्शन से यह सवाल सामने आया है कि बढ़ा हुआ बजट किस तरह पदकों में बदल रहा है। 800 करोड़ रुपये के निवेश के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, विदेशी एक्सपोजर और आधुनिक सुविधाएं देने पर जोर दिया गया था, लेकिन प्रमुख खेलों में पदकों की संख्या घट गई। रिपोर्ट के अनुसार, जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान, चयन प्रक्रिया, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और खिलाड़ियों की सहायता व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

 

310 से ज्यादा नए खिलाड़ियों पर अब नजर
आइची-नागोया एशियन गेम्स में 310 से अधिक नए खिलाड़ियों को मौका मिलना भारतीय खेलों की अगली पीढ़ी के लिए सकारात्मक संकेत बताया गया है। अब चुनौती इन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार करने की है। मौजूदा पदक विजेताओं के बाद अगली पीढ़ी तैयार करना और कमजोर पड़े खेलों में प्रदर्शन सुधारना भारत के लिए अगले बड़े खेल आयोजनों से पहले अहम लक्ष्य हो सकता है।

SC Questions Form 6: SIR घोषणा जोड़ने पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब

फॉर्म 6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल
मतदाता पंजीकरण के ऑनलाइन फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अदालत ने फॉर्म 6 में किए गए किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। पीठ ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद यह देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किए थे और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी।

 

फॉर्म 6 में जोड़ा गया था नया हिस्सा
सुनवाई के दौरान बताया गया कि पहली बार चुनाव आयोग के ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण फॉर्म 6 में एक नया हिस्सा जोड़ा गया था। इसमें नए मतदाता से उसके माता-पिता की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी कि क्या वे मतदाता सूची के आखिरी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में शामिल थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार फॉर्म के मूल कानूनी प्रारूप में बदलाव नहीं किया गया था।

 

SIR प्रक्रिया वाले राज्यों में घोषणा हटाई गई
जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां चुनाव आयोग ने अपने ECINET पोर्टल से फॉर्म 6 में जोड़ी गई SIR से संबंधित घोषणा को हटा दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान इसी बदलाव और इसके कानूनी आधार को लेकर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म में इस तरह की नई शर्तें जोड़ने का अधिकार नहीं था।

 

कोर्ट ने कहा- किसने किया बदलाव, यह देखेंगे
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि फॉर्म 6 में नई शर्तें जोड़कर इसे इस्तेमाल किया गया और इससे नए मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में किए गए किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की रिपोर्ट आने के बाद अदालत यह देखना चाहेगी कि किसने क्या बदलाव किया।

 

याचिका में बदलाव को बताया गया अनधिकृत
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2026 में ECINET पोर्टल पर फॉर्म 6 में डिजिटल तरीके से बदलाव किया गया। याचिका के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को आयुक्त संधू ने इस बदलाव को कथित तौर पर अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे हटाने का आदेश दिया था। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कानूनी अधिकार या मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन के बिना फॉर्म में बदलाव किया गया। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इस पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

 

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने भी SIR से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाताओं के अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। फिलहाल फॉर्म 6 में बदलाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

PM Surya Ghar Camp: भोपाल में 6 अक्टूबर को पीएम सूर्य घर योजना का शिविर

भोपाल में 6 अक्टूबर को लगेगा शिविर
भोपाल के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत 6 अक्टूबर 2026 को विशेष शिविर लगाया जाएगा। सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत आयोजित इस शिविर में उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर, सब्सिडी, आवेदन प्रक्रिया, ऋण सुविधा और सोलर संयंत्र की स्थापना से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन दिया जाएगा।

 

रविन्द्र भवन के हंसध्वनि हॉल में आयोजन
शिविर का आयोजन भोपाल के रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि हॉल में किया जाएगा। उपभोक्ता सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यहां पहुंचकर पीएम सूर्य घर योजना और घर की छत पर सोलर संयंत्र लगाने से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। शिविर में प्रवेश गेट नंबर 1 से होगा।

 

रूफटॉप सोलर और सब्सिडी की मिलेगी जानकारी
शिविर में उपभोक्ताओं को घर की छत पर सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया के साथ योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा ऋण सुविधा और सोलर संयंत्र की स्थापना से जुड़े विषयों पर भी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का लाभ लेने या आवेदन प्रक्रिया को समझने वाले उपभोक्ता शिविर में संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों से जानकारी ले सकेंगे।

 

शिविर का समय और स्थान
पीएम सूर्य घर योजना का यह शिविर 6 अक्टूबर 2026 को रविन्द्र भवन के हंसध्वनि हॉल, भोपाल में आयोजित होगा। शिविर का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है और उपभोक्ताओं के लिए प्रवेश गेट नंबर 1 से रहेगा।

 

उपभोक्ताओं से पहुंचने की अपील
मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल की ओर से विद्युत उपभोक्ताओं से शिविर में पहुंचकर योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है। शिविर का उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग और रूफटॉप सोलर से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार योजना की प्रक्रिया को समझ सकें।

 

इन विषयों पर मिलेगी मदद
शिविर में रूफटॉप सोलर लगाने की प्रक्रिया, पीएम सूर्य घर योजना, सब्सिडी, आवेदन करने की प्रक्रिया, ऋण सुविधा और सोलर संयंत्र की स्थापना से जुड़े विषयों पर जानकारी दी जाएगी। उपभोक्ता निर्धारित समय में शिविर में पहुंचकर योजना से संबंधित जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

Russia Plague Fear: रूस में प्लेग का खौफ, लैब कर्मचारी की मौत से हड़कंप

लैब कर्मचारी की मौत के बाद बढ़ी चिंता
रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद रहस्यमयी संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। इरकुत्स्क के शेलेखोव स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला दर्या शिपिलोवा की मौत के बाद करीब 200 लोगों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। हालांकि, रूस के अधिकारियों ने उनकी मौत की वजह प्लेग होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और फिलहाल इसे अज्ञात कारण से हुई निमोनिया के तौर पर देखा जा रहा है।

 

लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने का दावा
मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि शिपिलोवा ऐसे संस्थान में काम करती थीं, जहां प्लेग समेत गंभीर संक्रामक रोगों के रोगजनकों पर शोध किया जाता है। स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लैब में सैंपल संभालने के दौरान एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने और गंभीर निमोनिया जैसे लक्षण सामने आने की बात कही गई। हालांकि, टेस्ट ट्यूब में मौजूद सामग्री और उनकी बीमारी के बीच सीधा संबंध अभी तक साबित नहीं हुआ है।

 

200 लोग निगरानी में रखे गए
शिपिलोवा की मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू की। करीब 200 लोगों को एहतियात के तौर पर निगरानी में रखा गया है। शुरुआती जांच में इन लोगों में संक्रमण के स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आए हैं। अधिकारियों की ओर से संपर्क में आए लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी संभावित संक्रमण का समय रहते पता लगाया जा सके।

 

न्यूमोनिक प्लेग को लेकर सवाल
इस घटना के बीच न्यूमोनिक प्लेग का नाम सामने आने से चिंता बढ़ी है। यह प्लेग का एक गंभीर रूप है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। हालांकि, मौजूदा मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शिपिलोवा की बीमारी किस संक्रमण की वजह से हुई थी। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बीमारी का उनके लैब में काम करने से कोई सीधा संबंध था या नहीं।

 

रूस ने प्लेग फैलने से किया इनकार
रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी ने फिलहाल देश में प्लेग फैलने जैसी स्थिति से इनकार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच में अब तक शिपिलोवा के नमूनों से उनके पेशे से जुड़े किसी खास सूक्ष्मजीव की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस घटना को फिलहाल प्लेग का प्रकोप कहना जल्दबाजी होगी और बीमारी की वास्तविक वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

 

अमेरिकी अधिकारी भी रख रहे नजर
मामले पर अमेरिकी अधिकारी भी नजर रख रहे हैं और रूस से स्थिति की स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह तय नहीं है कि महिला की मौत किसी अज्ञात संक्रमण के कारण हुई या लैब में काम करने के दौरान किसी रोगजनक के संपर्क में आने से उनकी हालत बिगड़ी। स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

Delhi Riots Pleas Rejected: दिल्ली दंगों पर नेताओं के खिलाफ FIR की याचिकाएं खारिज

नेताओं के खिलाफ FIR की याचिकाएं खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में कई नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ ने याचिकाओं के एक समूह पर यह फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों को दिल्ली दंगों से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।

 

अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा समेत नेताओं के नाम
शेख मुजतबा फारूक की ओर से दायर याचिकाओं में बीजेपी नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों की वजह से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के। इन दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत होने का उल्लेख याचिका से जुड़ी रिपोर्ट में किया गया है।

 

सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं का भी जिक्र
लॉयर्स वॉइस की ओर से दायर एक अन्य याचिका में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया और असदुद्दीन ओवैसी सहित कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई थी। इस याचिका में एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीश के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई थी। अदालत ने संबंधित याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया।

 

दंगों में पुलिस की भूमिका की जांच की मांग भी खारिज
बृंदा करात और जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली दंगों में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की मांग की थी। इसके अलावा CAA विरोधी प्रदर्शनों को लेकर कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश और विदेशी फंडिंग की जांच के लिए NIA जांच की मांग वाली याचिका भी दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने इन मांगों से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

 

जामिया मामले में SIT जांच की मांग भी खारिज
याचिकाओं के एक अन्य समूह में 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने इस मांग से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। इस तरह अदालत के फैसले में दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भाषणों, पुलिस की भूमिका और जामिया की पुलिस कार्रवाई से संबंधित विभिन्न जांच मांगों पर फैसला शामिल रहा।

 

हाई कोर्ट के फैसले से याचिकाओं पर विराम
दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और विभिन्न जांच एजेंसियों से जांच कराने की मांग करने वाली इन याचिकाओं पर फिलहाल हाई कोर्ट स्तर पर कार्यवाही समाप्त हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया है और मामले से जुड़े आरोपों पर कोई अलग से दोषसिद्धि का निष्कर्ष इस आदेश के आधार पर नहीं बताया गया है।

Protesters Detained: यौन उत्पीड़न के आरोपों पर प्रदर्शनकारी हिरासत में

महिला पत्रकारों समेत 17 प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संसद मार्ग थाने के सामने रातभर धरने पर बैठे तीन महिला पत्रकारों समेत कुल 17 लोगों को सोमवार सुबह पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी आरोपों की जांच और संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR की मांग कर रहे थे।

 

प्रदर्शनकारियों को दिल्ली कैंट थाने ले गई पुलिस
संसद मार्ग थाने के सामने प्रदर्शन करने वालों में फ्रीलांस पत्रकार, यूट्यूबर और एक कथित पीड़ित भी शामिल थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को एक-एक करके बस में बैठाया और दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन ले गई। एक महिला प्रदर्शनकारी ने मीडिया को बताया कि वे पुलिस अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत की स्थिति जानना चाहते थे।

 

नई दिल्ली जिले में धारा 163 का हवाला
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू है और संसद मार्ग पर बिना अनुमति लोगों के इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को मौके से हटने के लिए कहा गया था, लेकिन उनके नहीं हटने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। अधिकारी ने कहा कि उन्हें जल्द रिहा किया जाना था।

 

महिला पत्रकारों ने भी दर्ज कराई शिकायत
DCP नेहा यादव के अनुसार, शनिवार को तीन महिला पत्रकारों ने हिरासत के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित बदसलूकी के आरोप लगाते हुए अलग-अलग शिकायतें दी थीं। पुलिस के अनुसार, शिकायतें दर्ज करने के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और सभी शिकायतों को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया।

 

क्राइम ब्रांच कर रही आरोपों की जांच
पुलिस के मुताबिक, महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन को कवर करने के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया। इन आरोपों के बाद मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों की जांच की जा रही है। प्रदर्शनकारी हालांकि संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखे हुए थे।

 

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से हटने को कहा था
DCP नेहा यादव के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को धारा 163 के प्रावधानों के बारे में पहले ही जानकारी दी गई थी। पुलिस का कहना है कि बिना लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना और प्रदर्शन करना प्रतिबंधित था। इसी आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अपनी शिकायत की स्थिति जानने और FIR की मांग को लेकर वहां मौजूद थे।

BJP Names 8 Candidates: राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की 8 नामों की सूची

बीजेपी ने जारी की 8 उम्मीदवारों की सूची
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी सूची में यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है।

 

धर्मपाल सिंह समेत इन नेताओं को टिकट
बीजेपी की सूची में सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह का नाम है। वह पांच बार विधायक रह चुके हैं। उनके अलावा राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया गया है।

 

जातीय समीकरण का रखा गया ध्यान
पार्टी द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची में जातीय समीकरण को भी ध्यान में रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आठ उम्मीदवारों में तीन सामान्य वर्ग, तीन ओबीसी और दो दलित समुदाय से आते हैं। इस तरह बीजेपी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।

 

श्रुति गंगवार और प्रियंका रावत कौन हैं
श्रुति गंगवार बरेली के पूर्व सांसद और वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। वहीं प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से सांसद रह चुकी हैं और दलित समुदाय से आती हैं। दोनों नेताओं को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया गया है।

 

प्रकाश पाल को भी मिला टिकट
प्रकाश पाल वर्तमान में उत्तर प्रदेश बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष हैं। पार्टी ने उन्हें भी राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। उनके नाम को ओबीसी प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का नाम नहीं
बीजेपी की जारी सूची में मौजूदा राज्यसभा सदस्य हरदीप पुरी और बीएल वर्मा के नाम शामिल नहीं हैं। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब पार्टी के इन आठ प्रत्याशियों के नामों पर चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

Gandhi Reel Arrest: गांधी जयंती पर आपत्तिजनक रील बनाने वाली महिला गिरफ्तार

गांधी जयंती पर रील को लेकर गिरफ्तारी
गुजरात के सूरत में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने के आरोप में 47 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर सिमरन पटेल को गिरफ्तार किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, रील में महात्मा गांधी की तस्वीर वाले 500 रुपये के नोट के साथ आपत्तिजनक हरकतें और इशारे किए गए थे। वीडियो गांधी जयंती की पूर्व संध्या 1 अक्टूबर को सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट किया गया था।

 

वायरल रील के बाद पुलिस में शिकायत
रील सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता धर्मेश गामी ने सूरत क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की और सिमरन पटेल को हिरासत में लिया।

 

सूरत पुलिस ने शेयर किया गिरफ्तारी का वीडियो
सूरत पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए कार्रवाई की जानकारी साझा की। पुलिस की ओर से शेयर किए गए वीडियो में पहले विवादित सोशल मीडिया क्लिप और उसके बाद आरोपी महिला को पुलिस हिरासत में दिखाया गया है। वीडियो में सिमरन पटेल अपनी हरकत के लिए माफी मांगती हुई भी नजर आती हैं।

 

सोशल मीडिया पर करीब 10 लाख फॉलोअर्स
पुलिस के अनुसार, सिमरन पटेल सूरत के अडाजन इलाके की रहने वाली हैं और सोशल मीडिया पर नियमित रूप से शॉर्ट वीडियो तथा रील्स बनाती रही हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 10 लाख फॉलोअर्स होने की जानकारी दी गई है। पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि वह शादी के बाद करीब 17 साल पहले सूरत आकर बस गई थीं और 12वीं तक पढ़ी हैं।

 

पुलिस ने लोगों से की अपील
सूरत पुलिस ने नागरिकों से सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री पोस्ट नहीं करने की अपील की है, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों या समाज में तनाव और अशांति पैदा हो। पुलिस की कार्रवाई के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति, आपत्तिजनक कंटेंट और कानूनी जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा में है।

China’s Premium Travel Shift: चीनी पर्यटकों में बढ़ा बिजनेस क्लास का क्रेज

चीनी पर्यटकों में बढ़ी प्रीमियम यात्रा की मांग
चीनी यात्रियों के बीच प्रीमियम यात्रा का रुझान तेजी से बढ़ने की जानकारी सामने आई है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के सप्ताहांत कवरेज राउंडअप में शामिल एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी पर्यटक अब बड़ी संख्या में बिजनेस-क्लास उड़ानों की बुकिंग कर रहे हैं। इसे चीन के यात्रियों की बदलती यात्रा प्राथमिकताओं और प्रीमियम ट्रैवल डिमांड में बढ़ोतरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

 

बिजनेस क्लास को लेकर बदली पसंद
रिपोर्ट में चीनी पर्यटकों के बीच बिजनेस-क्लास उड़ानों को चुनने की बढ़ती प्रवृत्ति को प्रमुख बदलाव के रूप में सामने रखा गया है। पहले जहां हवाई यात्रा में किफायती विकल्पों को अधिक प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब कुछ यात्री अधिक आराम और बेहतर यात्रा अनुभव के लिए प्रीमियम सीटिंग पर खर्च करने को तैयार नजर आ रहे हैं। हालांकि उपलब्ध सामग्री में इस बदलाव के पीछे कोई विशिष्ट आंकड़ा या बुकिंग प्रतिशत नहीं दिया गया है।

 

पांच सप्ताहांत की प्रमुख कहानियों में शामिल
यह जानकारी साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की उन पांच कहानियों के सप्ताहांत राउंडअप का हिस्सा है, जिन्हें पाठकों ने संभवतः मिस किया हो। इनमें एशिया और उसके बाहर यात्रा, निवेश और कला से जुड़े अलग-अलग विषय शामिल किए गए हैं। बिजनेस-क्लास बुकिंग की बढ़ती प्रवृत्ति को राउंडअप में चीन के बदलते ट्रैवल पैटर्न से जुड़ी प्रमुख कहानी के रूप में जगह दी गई है।

 

मलेशिया की निवेशक अपील भी चर्चा में
सप्ताहांत राउंडअप में मलेशिया की ओर निवेशकों के बढ़ते आकर्षण से जुड़ी एक कहानी भी शामिल है। हालांकि उपलब्ध सामग्री में यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि मलेशिया में निवेशकों को आकर्षित करने वाले प्रमुख क्षेत्र या कारण कौन से हैं। इसके अलावा राउंडअप में चीन की कला के अपने देश में लौटने से जुड़ी खबर को भी शामिल किया गया है, जिससे पैकेज का दायरा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहता।

 

प्रीमियम ट्रैवल का व्यापक संकेत
चीनी यात्रियों की बिजनेस-क्लास बुकिंग में बढ़ोतरी को प्रीमियम यात्रा की व्यापक मांग से जोड़ा गया है। यह बदलाव एयरलाइंस और पर्यटन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि यात्रियों की पसंद में बदलाव होने पर प्रीमियम केबिन और बेहतर यात्रा सेवाओं की मांग भी प्रभावित होती है। हालांकि उपलब्ध स्रोत में भविष्य की बुकिंग या एयरलाइन कारोबार पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर कोई विस्तृत अनुमान नहीं दिया गया है।

रेत परिवहन पर कार्रवाई: चालक हिरासत में

सिंगरौली में रेत के अवैध कारोबार पर पुलिस का शिकंजा, 6.04 लाख का ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त

 

सिंगरौली। जिले में अवैध रेत परिवहन के खिलाफ सरई थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की है। रविवार को चुनहिया नाला क्षेत्र में पुलिस टीम ने दबिश देकर रेत लोड कर ले जा रहे वाहन को पकड़ा। कार्रवाई के दौरान चालक को हिरासत में लिया गया। जब्त वाहन और उसमें लदी रेत की अनुमानित कीमत करीब 6 लाख 4 हजार रुपये बताई गई है।

 

 

 

पुलिस के अनुसार, चुनहिया नाला क्षेत्र में अवैध रूप से रेत परिवहन किए जाने की जानकारी के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। जांच के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत लोड मिली, जिसके बाद पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया।

 

मौके पर मौजूद चालक को हिरासत में लेकर उसके विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

 

 

इस कार्रवाई में जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉली और रेत की कुल अनुमानित कीमत 6.04 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस की इस कार्रवाई को क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

सरई थाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में अवैध खनन और रेत के परिवहन पर निगरानी लगातार जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध आगे भी कार्रवाई की जाएगी।